7. महाजनपद काल (600 ई.पू.)
A. महाजनपदों की जानकारी के स्रोत एवं वितरण
- कुल संख्या: महाजनपदों की कुल संख्या 16 थी।
- जानकारी के प्रमुख स्रोत: ‘अंगुत्तर निकाय’ (बौद्ध ग्रंथ), ‘भगवती सूत्र’ (जैन ग्रंथ), अथर्ववेद, ‘अष्टाध्यायी’ (रचनाकार- पाणिनी), और ‘बुद्धिस्ट इंडिया’ (रचनाकार- रिचर्ड डेविडसन) से इनकी जानकारी मिलती है।
- दिशाओं के अनुसार अवस्थिति: सबसे उत्तरी (कोई नहीं), सबसे दक्षिणी (अश्मक), सबसे पूर्वी (अंग), और सबसे पश्चिमी (अवंति) महाजनपद था।
- भौगोलिक वितरण: 16 महाजनपदों में से सबसे अधिक 8 उत्तर प्रदेश में (कोसल, काशी, वत्स, शूरसेन, पांचाल, कुरु, मल्ल, चेदि) और 3 बिहार में (मगध, वज्जि, अंग) स्थित थे। पाकिस्तान में 2 (कम्बोज, गांधार), MP में 1 (अवंति), आंध्र प्रदेश में 1 (अश्मक) और राजस्थान में 1 (मत्स्य) स्थित थे।
शासन व्यवस्था एवं शक्तिशाली महाजनपद
- शासन व्यवस्था: वज्जि एवं मल्ल महाजनपद की शासन व्यवस्था गणतंत्रात्मक (Republic) थी। बाकी 14 महाजनपदों में राजतंत्रात्मक व्यवस्था थी।
- 4 सबसे शक्तिशाली महाजनपद: 1. मगध, 2. अवंति, 3. कोसल, 4. वत्स।
B. 16 महाजनपदों का विस्तृत विवरण (VVI)
पाकिस्तान में स्थित महाजनपद (2)
| महाजनपद | राजधानी एवं प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| 1. कम्बोज |
• राजधानी: राजपुर या हाटक। • यह पाकिस्तान के हजारा एवं राजौरी सेक्टर में स्थित था। • विशेषता: अच्छे नस्ल के घोड़ों के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ के लोग अस्त्र-शस्त्र बनाकर अपनी जीविका चलाते थे। • कौटिल्य ने यहाँ के निवासियों को ‘वार्ता शस्त्रोपजीवी’ कहा था। |
| 2. गांधार |
• राजधानी: उत्तरी गांधार की ‘तक्षशिला’ और पश्चिमी गांधार की ‘पुष्कलावती’। पुष्कलावती की पहचान ‘चारसद्दा’ नामक स्थान से की गई है। • तक्षशिला: सिंधु एवं झेलम नदियों के बीच है। रामायण के अनुसार भरत ने अपने पुत्र तक्ष के नाम पर इसका नाम रखा। महाभारत के अनुसार परीक्षित के लड़के जनमेजय ने इसे जीता और यहाँ ‘नाग यज्ञ’ करवाया। • शासक: यहाँ का राजा ‘पुष्कर सारिन’ था (बिम्बिसार ने इसके दरबार में अपना राजदूत भेजा था और इसने अवंति के राजा चन्द्र प्रद्योत को पराजित किया था)। • तक्षशिला विश्वविद्यालय: यह धनुर्विद्या के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ से प्रसेनजीत, चरक, जीवक, चाणक्य, वसुबंधु, वसुमित्र और अश्वघोष ने अध्ययन किया था। यह जैन धर्म का प्रसिद्ध केंद्र और रोमन व्यापार का प्रसिद्ध केंद्र रहा। |
उत्तर प्रदेश के महाजनपद (8)
- 3. कोसल: लोकेशन- फैजाबाद। दो राजधानियां: उत्तरी कोसल- श्रावस्ती (पहचान ‘सहेत-महेत’ से, कृषि के लिए प्रसिद्ध) और दक्षिणी कोसल- कुशावती। इन दोनों राजधानियों के मध्य सरयू नदी बहती है। राजा ‘कंस’ थे (इनके पुत्र प्रसेनजीत और पुत्री महाकोशला थीं)। गंधकुटी विहार एवं कोसाम्बकुटी विहार यहीं पर है।
- 4. काशी: जानकारी अथर्ववेद से मिलती है। राजधानी- बनारस (यह वरुणा एवं अस्सी नदी के संगम पर बसा है)। यह महत्वपूर्ण धार्मिक एवं व्यापारिक केंद्र था और रेशमी वस्त्र उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ के राजा ‘दिवोदास’ थे।
- 5. पांचाल: लोकेशन- बरेली, बदायूं, फर्रुखाबाद। दो राजधानियां: उत्तरी पांचाल (अहिच्छत्र) और दक्षिणी पांचाल (काम्पिल्य)। राजा का नाम ‘चुलानी ब्रह्मदत्त’ था। उल्लेख महाभारत एवं अष्टाध्यायी में मिलता है।
- 6. शूरसेन: यमुना नदी के किनारे बसा था। जानकारी मेगास्थनीज की ‘इंडिका’ में मिलती है। राजधानी- मथुरा। राजा- ‘अवंतिपुत्र’ (जो महात्मा बुद्ध के प्रिय शिष्य थे)। यूनानी ग्रंथों में इसका नाम ‘सुरसेनोई’ मिलता है।
- 7. वत्स: राजधानी- कौशाम्बी (यमुना नदी के किनारे)। राजा- ‘उदयन’ (पौरव वंश के राजा और संगीत के बहुत बड़े शिक्षक)। उदयन बौद्ध भिक्षुक ‘पिंडोला’ का शिष्य था। उदयन, चन्द्रप्रद्योत की लड़की ‘वासवदत्ता’ का गुरु था (दोनों में प्रेम हुआ और भागकर विवाह किया, जिसका वर्णन भास की पुस्तक ‘स्वप्नवासवदत्तम’ में है)। कौशाम्बी बौद्ध धर्म के प्रचार का बहुत बड़ा केंद्र था और वत्स सूती वस्त्र का सबसे बड़ा केंद्र था। शिशुनाग राजा ने वत्स को जीतकर मगध में मिला लिया था।
- 8. मल्ल: क्षेत्र- कोसल एवं विदेह (गंगा नदी के किनारे)। उल्लेख अंगुत्तर निकाय एवं महाभारत में है। राजधानी: कुशीनगर एवं पावापुरी। राजा- ‘महाराज विश्वसेन’। कुशीनगर में महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था।
- 9. कुरु: क्षेत्र- हरियाणा + दिल्ली + पश्चिमी UP। राजा ‘कुरु’ के नाम पर इसका नाम पड़ा। राजधानी- इन्द्रप्रस्थ। शासक का नाम- कोरव। चाणक्य ने अर्थशास्त्र में यहाँ के निवासियों को ‘राजशब्दोपजीविन्’ की संज्ञा दी। उल्लेख महाभारत एवं अष्टाध्यायी में है।
- 10. चेदि: क्षेत्र- UP + MP (बुंदेलखंड क्षेत्र)। केन नदी के किनारे बसा था। राजधानी- शुक्तिमती / सोत्थिवती। राजा- ‘शिशुपाल’ थे (जिनका वध कृष्ण द्वारा किया गया)। महाभारत के अलावा विष्णुपुराण, मिलिंदपन्हो (बौद्ध ग्रंथ), जातक ग्रंथ एवं जैन ग्रंथों में इसका उल्लेख है।
बिहार के महाजनपद (3)
- 11. अंग: स्थिति- भागलपुर एवं मुंगेर वाला क्षेत्र। यह सबसे पूर्वी महाजनपद था। इसका सबसे पहला उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है। राजधानी- मालिनी (जो आगे चलकर ‘चंपा’ नाम से प्रसिद्ध हुई)। वास्तुकार- ‘महागोविन्द’ थे। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने यहाँ के निवासियों को ‘चेन-पो’ कहा था। बिम्बिसार ने सबसे पहले अंग को ही जीता था। ब्रह्मदत्त का लड़का -> दधिवाहन (इसकी लड़की ‘चन्दना’ महावीर स्वामी की प्रथम शिष्या बनी)।
- 12. वज्जि: यह 8 गणराज्यों का संघ था। राजधानी- वैशाली। राजा- ‘इक्ष्वाकु विशाल’। बौद्ध ग्रंथों में वैशाली का नाम ‘बसाड़गढ़’ मिलता है। 8 संघ: विदेह, लिच्छवी (विश्व का पहला गणतंत्र), वज्जि, ज्ञातृक, कुण्डग्राम, भोज, कौरव, इक्ष्वाकु।
- 13. मगध: (मगध का विस्तृत वर्णन नीचे अलग सेक्शन में दिया गया है, क्योंकि यह सबसे महत्वपूर्ण है।)
अन्य राज्यों के महाजनपद
- 14. अवंति (मध्य प्रदेश): उत्तरी अवंति की राजधानी- उज्जैनी (प्राचीन नाम- अवंतिका) और दक्षिणी अवंति की राजधानी- माहिष्मती। दोनों के मध्य ‘वेत्रवती’ नदी बहती है। राजा- ‘चन्द्र प्रद्योत’ (जिन्हें ‘मलेच्छहंता’ भी कहा जाता है, यह पीलिया रोग से ग्रसित थे, इनका इलाज बिम्बिसार के वैद्य ‘जीवक’ ने किया)। लोहे की खान के कारण यह शक्तिशाली था।
- 15. अश्मक (आंध्र प्रदेश): यह 16 महाजनपदों में एकमात्र दक्षिणी महाजनपद था। दूसरा नाम- ‘मूलक’। राजधानी- पोतली / पोतन। यह गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। राजा अरुण ने कलिंग को जीता था, बाद में अवंति ने अश्मक को जीत लिया। जानकारी पुराणों, बौद्ध ग्रंथों, वैदिक ग्रंथों और महाभारत में मिलती है।
- 16. मत्स्य (राजस्थान): राजधानी- विराटनगर। राजा- ‘विराट’। उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। इसी महाजनपद में 5 पांडव छिपे थे।
C. मगध महाजनपद: सबसे शक्तिशाली क्यों बना?
मगध 16 महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा, जिसके निम्नलिखित भौगोलिक एवं आर्थिक कारण थे:
- यह गंगा, सोन, और गंडक नदी के मध्य स्थित था (परिणाम: उन्नत सिंचाई का साधन मिला)।
- घने जंगलों का व्यापक प्रमाण था (परिणाम: हथियार के बेंट, दरवाजे, खिड़की, जलावन, रथ एवं पहिया निर्माण हेतु लकड़ियां मिलीं)।
- व्यापक लोहे की खान मिली (परिणाम: किसान उपकरण, हथियार, और रथ की धुरी बनाने में मदद मिली)।
- यहाँ पहली बार ‘कृषि पंचांग’ मिला।
- यहाँ पहली बार ‘धान की रोपणी प्रणाली’ देखी गई।
- व्यापक मात्रा में उपजाऊ ‘दोमट मिट्टी’ पाई गई।
मगध की राजधानी: राजगीर (राजगृह)
- इसे हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल माना जाता है।
- प्राचीनतम नाम गिरिव्रज था (महाभारत के समय जरासंध की राजधानी थी)।
- महावीर स्वामी ने अपना प्रथम प्रवचन ‘विपुलागिरि पर्वत’ पर दिया था। फकीर मखदूम शाह का मजार यहीं पर है।
- जैन ग्रंथ ‘सूत्र कृतांग’ में राजगीर को संपन्न, धनवान, सुखी नर-नारियों का नगर कहा गया है। जैन ग्रंथ ‘अंतकृतांग दशांग’ में इसे ‘पुष्पधनुओं का वाटिका’ कहा गया है।
- वाल्मीकि के रामायण में राजगीर में ‘सुमागधी नदी’ का वर्णन है।
- महावीर स्वामी ने अपने जीवन के 14 साल इसी राजगीर में बिताये थे।
⛰️ राजगीर 5 पहाड़ियों से घिरा है
- विपुलाञ्चल पहाड़ी
- रत्नागिरी पहाड़ी
- उदयगिरी पहाड़ी
- स्वर्ण गिरी पहाड़ी
- वैभार गिरी पहाड़ी