18. कुषाण वंश और कनिष्क महान (30 ई. – 225 ई.)

कुषाण वंश का उद्गम: कुषाण वंश के लोग चीन के कान्सु प्रदेश के रहने वाले थे। यह लोग ‘यूची’ नामक कबीले से सम्बंधित थे। कुषाण साम्राज्य का शासनकाल लगभग 30 ई. से 225 ई. तक रहा।

A. कुषाण वंश के प्रारंभिक शासक

1. कुजुल कडफिसस (30 – 80 ई.)

  • यह कुषाण वंश का संस्थापक था।
  • इसने ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि धारण की थी।
  • इसने केवल तांबे का सिक्का चलाया।
  • यह शैव धर्म का अनुयायी था।

2. विम कडफिसस (95 – 127 ई.)

  • इसे कुषाण वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
  • उपाधि: महराज एवं सर्वलोकेश्वर।
  • कुषाण वंश में सबसे पहले सोने का सिक्का इसी ने चलाया (साथ ही तांबे का सिक्का भी चलाया)।
  • इसके सिक्कों पर शिव, नंदी एवं त्रिशूल का चित्र अंकित था।
  • इसने तक्षशिला एवं पंजाब के क्षेत्र पर अधिकार किया।
  • सीमा विस्तार: पंजाब, मथुरा, उज्जैन एवं सिंध तक किया।

B. कनिष्क (127 – 150 ई.)

यह कुषाण वंश का सबसे महानतम एवं प्रतापी राजा था। इसकी उपाधि ‘देवपुत्र शाही’ थी।

राजधानी एवं नगर निर्माण

  • इसने कुषाण वंश की प्रथम राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) को बनाया।
  • कनिष्क ने अपनी दूसरी राजधानी मथुरा को बनाया।
  • कश्मीर में कनिष्क ने ‘कनिष्कपुर’ नामक शहर की स्थापना की।
  • तक्षशिला में ‘सिरकप’ नामक शहर की स्थापना की।

प्रमुख उपलब्धियां

  • इसने 78 ई. में ‘शक संवत्’ चलाया।
  • अखिल भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय साम्राज्य पर अधिकार किया।
  • चीन के महान रेशम मार्ग (Silk Route) पर कब्ज़ा किया।
  • इसने अफगानिस्तान में ‘रबातक अभिलेख’ का निर्माण करवाया (इसमें कुषाणों की वंशावली का वर्णन है)।
  • सर्वाधिक मात्रा में कुषाण राजाओं ने सोने के सिक्के जारी किए।
  • इसके सिक्कों पर शिव, बुद्ध, अग्नि, स्कंद और गणेश का चित्र अंकित है।

बौद्ध धर्म एवं कनिष्क

  • कनिष्क बौद्ध धर्म के महायान शाखा का अनुयायी था।
  • इसी के समय चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन कुण्डलवन (कश्मीर) में हुआ।

C. कनिष्क के प्रमुख दरबारी विद्वान

कनिष्क के दरबार में कई महान विद्वान रहते थे, जिनमें प्रमुख हैं: वसुमित्र, अश्वघोष, चरक, पार्श्व, नागार्जुन, संरक्षत और महाचेत।

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विद्वान का नाम प्रमुख रचना / विशेषता
चरक इन्होंने ‘चरक संहिता’ (आयुर्वेद से सम्बंधित ग्रंथ) की रचना संस्कृत भाषा में की।
पार्श्व इन्हीं के कहने पर कनिष्क ने चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन किया था।
वसुमित्र इन्होंने ‘महाविभाषासूत्र’ ग्रंथ की रचना संस्कृत भाषा में की। इस ग्रंथ को बौद्ध धर्म का विश्वकोष कहते हैं।
अश्वघोष इन्हें ‘भारत का मिल्टन’ कहा जाता है। इनकी प्रमुख रचनाएँ (संस्कृत भाषा में) हैं:
बुद्धचरितम्: (इसे बौद्धों का रामायण कहा जाता है)
• सौदरानंद
• सूत्र अलंकार
• सारीपुत्र प्रकरणम्

D. कुषाण वंश के परवर्ती शासक

4. वसिष्क (150 – 160 ई.)

  • यह कनिष्क का पुत्र था।
  • इन्होने कश्मीर में ‘हुविष्कपुर’ शहर की स्थापना की।
  • कश्मीर में इसने चतुर्भुजी विष्णु मंदिर बनवाया।

5. वासुदेव

  • यह कुषाण वंश का अंतिम राजा था।

💡 परीक्षा उपयोगी विविध तथ्य (VVI Points)

  • संयुक्त शासन व्यवस्था: कुषाण शासकों ने भारत में पहली बार संयुक्त शासन व्यवस्था प्रारंभ किया था।
  • देवकुल की प्रथा: कुषाण राजाओं ने ‘देवकुल’ की प्रथा प्रारंभ की थी।
  • नियमित सोने के सिक्के: भारत में नियमित रूप से सोने का सिक्का कुषाण राजाओं ने ही चलाया था।