13. भारत की मिट्टियाँ (Soils of India)

सबसे बड़ा मृदा वर्ग: भारत में सबसे बड़ा मिट्टी का वर्ग कछारी (जलोढ़) मिट्टी है। कछारी मिट्टी देश के 40 प्रतिशत भाग के लगभग 15 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हुई है।
सबसे उपजाऊ मृदा: भारत में सबसे अधिक उपजाऊ मृदा जलोढ़ मृदा है।
pH मान: सामान्य फसलें उगाने के लिए उर्वर भूमि का pH मान 6 से 7 होने की सम्भावना है।

🗺️ भारत की प्रमुख मिट्टियाँ (Smart Soil Layout)

भारत की मुख्य मृदाओं और उनकी विशेषताओं को इस आरेख से आसानी से याद करें:

🌊 जलोढ़ / कछारी मिट्टी (Alluvial Soil)
भारत के सर्वाधिक क्षेत्र पर इसी मिट्टी का विस्तार पाया जाता है। भारत के उत्तरी मैदान की मृदा सामान्यतः तलोच्चन से बनी है। पुरानी जलोढ़ मिट्टी (या गंगा के मैदानों की पुरानी कछारी मिट्टी) को ‘बांगर’ के नाम से जाना जाता है।
⚫ काली मिट्टी / रेगुर (Black Soil)
काली मिट्टी का निर्माण लावा के प्रवाह (बेसाल्ट लावा के अपक्षय) से होता है। इसे ‘रेगुर’, ‘कपास मिट्टी’ या ‘उष्ण कटिबन्धीय चरनोजम’ आदि नामों से जाना जाता है। कपास की खेती के लिए यह सर्वोत्तम मिट्टी होती है।
🔴 लाल मिट्टी (Red Soil)
भारत में लाल मिट्टी का सर्वाधिक विस्तार आन्ध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु में पाया जाता है। मिट्टी के इस लाल रंग का प्रमुख कारण ‘फेरिक ऑक्साइड’ की विद्यमानता है।
🟤 लैटेराइट मिट्टी (Laterite Soil)
लैटेराइट मिट्टी महत्त्वपूर्ण रूप से मालाबार तटीय क्षेत्र में पायी जाती है। मखरैला (लैटराइट) मिट्टी निथरन (लीचिंग) का परिणाम होता है। लोहे का अतिरेक होने के कारण यह मृदा समूह अनुर्वर होता जा रहा है।

A. मिट्टियों की विशेषताएँ एवं विस्तार

  • काली मिट्टी का विस्तार: यह प्रायद्वीपीय भारत में अधिकतम क्षेत्र पर विस्तृत है। रेगुर मिट्टी सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में है। झारखण्ड में काली मिट्टी राजमहल पहाड़ी प्रदेश में पाई जाती है। मालवा पठार की प्रमुख मिट्टी भी काली मिट्टी है।
  • नमी धारण क्षमता: काली मिट्टी को सिंचाई की कम आवश्यकता होती है क्योंकि यह नमी रोककर रखती है।
  • कार्बनिक पदार्थ: काली मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की अधिकता होती है।
  • उर्वरक की आवश्यकता: लाल मिट्टी के लिए न्यूनतम उर्वरक की आवश्यकता होती है।
  • गंगा की जलोढ़ मृदा की गहराई: गंगा के जलोढ़ मिट्टी की भूमि सतह के नीचे है, लगभग 600 मीटर।

B. मृदा की समस्याएँ (अपरदन, लवणता व क्षारीयता)

मृदा अपरदन (Soil Erosion)

  • चम्बल घाटी: भारत का चम्बल घाटी क्षेत्र मृदा अपरदन (इरोजन) से अत्यधिक प्रभावित है। अवनलिका (गली) अपरदन के कारण ही चम्बल के खड्ड बने हैं।
  • अपरदन बढ़ाने वाले पौधे: कृष्य भूमि में सोरघम के पौधे उगाने से भूमि का अपरदन अधिकतम तीव्रता से होता है।
  • बचाव: मृदा अपरदन को वन रोपण (वनारोपण) द्वारा रोका जा सकता है।

मृदा में खारापन और क्षारीयता

  • जिप्सम का प्रयोग: मिट्टी में खारापन एवं क्षारीयता की समस्या का दीर्घकालीन हल खेतों में जिप्सम का उपयोग है। अम्लीय किस्म की मिट्टी में भी जिप्सम का प्रयोग करके उसे फसल उगाने के उपयुक्त बनाया जाता है।
  • सर्वाधिक क्षारीय क्षेत्र: भारत में सर्वाधिक क्षारीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश राज्य में पाया जाता है।
  • सर्वाधिक लवणीय क्षेत्र: भारत में लवणीय मृदा का सर्वाधिक क्षेत्रफल गुजरात में है। भारत की सबसे बड़ी अन्तर्देशीय लवणीय आर्द्र भूमि राजस्थान में है।
  • लवणीभवन का प्रभाव: सिंचित भूमि पर मृदा का लवणीभवन (Saline Building) कुछ मृदाओं को अपारगम्य बना देता है।

C. अन्य महत्त्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (VVI Facts)

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तथ्य / विशेषता संबंधित मृदा / जानकारी
धान की खेती के लिए अति उपजाऊ भूमि दोमट
सभी प्रकार के कणों वाली मिट्टी दुम्मटी (लोम) मिट्टी
जाफरान (केसर) के उत्पादन के लिए उपयोगी करेवास मृत्तिका (कश्मीर हिमालय में)
पौधों को सबसे अधिक पानी मिलने वाली मिट्टी चिकनी मिट्टी
पश्चिमी राजस्थान की मिट्टी में अधिकता कैल्शियम की
भारतीय मृदाओं में सर्वाधिक कमी वाला सूक्ष्म तत्त्व जस्ता
मृदा की उर्वरता शक्ति में वृद्धि हेतु आवश्यक फसल चक्र