सामाजिक-धार्मिक आन्दोलन (Socio-Religious Movements)

उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों का भारत के आधुनिक इतिहास में विशेष स्थान है। इस आंदोलन से बुद्धिजीवी, नगरीय उच्च जातियाँ एवं उदार रजवाड़े सर्वाधिक प्रभावित हुए, जबकि निर्धन सर्वसाधारण वर्ग इससे लगभग अप्रभावित ही रहा।

A. राजा राममोहन राय एवं ब्रह्म समाज

  • संस्थापक: राजा राममोहन राय द्वारा 1828 ई. में ‘ब्रह्म समाज’ की स्थापना की गई। यह आधुनिक भारत में हिन्दू धर्म में पहला सुधार आंदोलन था।
  • उद्देश्य एवं सिद्धांत: इसका मुख्य उद्देश्य और सिद्धांत ‘एकेश्वरवाद’ (एकदेववाद) का प्रचार करना था।
  • प्रमुख उपाधियाँ: राजा राममोहन राय को ‘आधुनिक भारत का जनक’, ‘भारतीय राष्ट्रवाद का जनक’, ‘प्रथम आधुनिक पुरुष’ और ‘भारतीय पुनर्जागरण का पिता’ कहा जाता है। ‘राजा’ की उपाधि उन्हें अकबर द्वितीय ने दी थी।
  • प्रथम संस्था: राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित प्रथम संस्था ‘आत्मीय सभा’ थी।
  • सती प्रथा का उन्मूलन: मुख्य रूप से राजा राममोहन राय के प्रयासों से 1829 ई. में लॉर्ड विलियम बैंटिंक द्वारा सती प्रथा का उन्मूलन किया गया।
  • पत्र-पत्रिका एवं शिक्षा: इन्होंने फारसी साप्ताहिक ‘मिरात-उल-अखबार’ प्रकाशित किया। डेविड हेयर की सहायता से ‘हिन्दू कॉलेज’ की स्थापना की।
  • मृत्यु: इनकी मृत्यु भारत के बाहर ब्रिस्टल, इंग्लैण्ड में हुई थी, जहाँ इनकी समाधि है। इनके इंग्लैंड जाने के पश्चात् ब्रह्म समाज की बागडोर रामचन्द्र विद्यावागीश ने सँभाली।

B. स्वामी दयानंद सरस्वती एवं आर्य समाज

  • मूल नाम: स्वामी दयानंद सरस्वती का मूल नाम ‘मूल शंकर’ था।
  • आर्य समाज की स्थापना: दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 ई. में आर्य समाज की स्थापना की गई। यह मुख्य रूप से धार्मिक अनुष्ठान व मूर्ति-पूजा के विरुद्ध था।
  • प्रमुख नारे/कथन: “वेदों की ओर लौटो” (Go back to the Vedas) और “भारत भारतीयों के लिए है” का नारा इन्होंने ही दिया था। “अच्छा शासन स्वशासन का स्थानापन्न नहीं है” यह कथन भी इन्हीं का है।
  • पुस्तक: इन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ नामक प्रसिद्ध/पवित्र पुस्तक की रचना हिन्दी भाषा में की थी।
  • भारत का मार्टिन लूथर: दयानंद सरस्वती को ‘भारत का मार्टिन लूथर’ कहा जाता है।
  • स्वराज्य शब्द का प्रयोग: सबसे पहले ‘स्वराज्य’ शब्द का प्रयोग करने वाले और हिन्दी को राष्ट्रभाषा मानने वाले व्यक्ति स्वामी दयानंद सरस्वती ही थे।
  • शुद्धि आंदोलन: आर्य समाज ने ‘शुद्धि आन्दोलन’ का समर्थन किया था।

C. स्वामी विवेकानंद एवं रामकृष्ण मिशन

  • मूल नाम: स्वामी विवेकानंद का मूल नाम ‘नरेन्द्रनाथ दत्त’ था।
  • विश्व धर्म संसद (शिकागो): सितम्बर 1893 ई. में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म पार्लियामेंट (संसद) में भाग लेकर वे प्रसिद्ध हुए।
  • रामकृष्ण मिशन: 1897 ई. में स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरु के नाम पर ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की। इसका मुख्यालय ‘बेलूर’ में स्थित है।
  • रामकृष्ण परमहंस: इनका मूल नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था और इनका जन्म हुगली जिला के कमारपुकुर गाँव में हुआ था। ‘शारदामणि’ इनकी पत्नी थीं।
  • नव हिन्दू वाद (Neo-Hinduism): 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में नव हिन्दू वाद के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि स्वामी विवेकानंद थे। इन्हें ‘व्यावहारिक-वेदांत’ का प्रतिपादक माना जाता है।
  • सुभाष चन्द्र बोस का कथन: सुभाष चन्द्र बोस ने विवेकानंद को ‘आधुनिक राष्ट्रीय आन्दोलन का आध्यात्मिक पिता’ कहा था।
  • कन्याकुमारी का रॉक मेमोरियल स्वामी विवेकानंद के लिए समर्पित है।

D. अन्य प्रमुख समाज सुधारक एवं संस्थाएं

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आन्दोलन / संस्था संस्थापक / नेतृत्वकर्ता एवं विशेष तथ्य
सत्यशोधक समाज (1873 ई.) ज्योतिबा फुले। उद्देश्य: दंभी ब्राह्मणों तथा उनके अवसरवादी धर्मग्रन्थों से नीची जातियों की रक्षा करना (महाराष्ट्र में दलित उत्थान)।
अलीगढ़ मुस्लिम आन्दोलन सैय्यद अहमद खाँ। इन्होने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय / मुहमडन एंग्लो-ओरिएण्टल कॉलेज स्थापित किया। ये ‘तहजीब-उल-अखलाक’ के रचनाकार हैं।
सर्वेन्ट्स ऑफ इण्डिया सोसाइटी (1905 ई.) गोपाल कृष्ण गोखले (भारत सेवक मण्डल)। इसके प्रमुख सदस्य: एम. सी. सीतलवाड़, बी. एन. राव तथा अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर।
युवा बंगाल आन्दोलन (Young Bengal) हेनरी विवियन डेरोजियो।
प्रार्थना समाज संस्थापक: आत्माराम पांडुरंग। केशवचन्द्र सेन की प्रेरणा से स्थापित हुआ।
देव समाज शिवनारायण अग्निहोत्री।
आत्म-सम्मान आन्दोलन ई. वी. रामास्वामी नायकर।
अहमदिया / कादियानी आन्दोलन मिर्जा गुलाम अहमद (1889-90)।
कूका आन्दोलन गुरु रामसिंह ने संगठित किया।

E. अंग्रेजों द्वारा निर्मित सामाजिक सुधार के कानून

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कानून गवर्नर जनरल वर्ष विशेषता
नवजात कन्या हत्या कानून जॉन शोर 1795 इस कानून के द्वारा कन्याओं की हत्या पर रोक लगायी गयी।
बाल हत्या निरोधक कानून लॉर्ड वेलेजली 1804 इस कानून के द्वारा नवजात शिशुओं को मारने पर रोक लगाई गई।
सती प्रथा निषेध कानून विलियम बैंटिंक 1829 इसके द्वारा सती प्रथा पर कानूनी रोक लगाकर इसे हत्या माना गया।
हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लॉर्ड डलहौजी 1856 इस अधिनियम द्वारा विधवा विवाह को कानूनी मान्यता दी गयी।
सम्मति आयु अधिनियम (Age of Consent Act) लेंसडाऊन 1891 12 वर्ष से कम आयु के बालकों के विवाह पर रोक लगायी गई।
शारदा एक्ट लॉर्ड इरविन 1929 इस एक्ट के द्वारा बालकों एवं बालिकाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु क्रमशः 18 तथा 14 वर्ष निश्चित की गई।
हिन्दू महिला सम्पत्ति अधिनियम लॉर्ड ऑकलैण्ड 1937 इसमें हिन्दू महिलाओं को सम्पत्ति का अधिकार प्रदान किया गया।
दास प्रथा प्रतिबंध लॉर्ड एलनबरो 1843 1833 के चार्टर अधिनियम द्वारा दास प्रथा प्रतिबंधित किया गया।

F. परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (VVI Points)

  • महाराष्ट्र का सुकरात: महादेव गोविंद रानाडे को कहा जाता है।
  • महाराष्ट्र के ‘लोकहितवादी’: गोपाल हरिदेशमुख को कहा जाता है।
  • थियोसोफिकल सोसाइटी ने भारत में अपना मुख्य कार्यालय 1882 ई. में अडयार में स्थापित किया था।
  • वहाबी आंदोलन का मुख्य केन्द्र पटना था।
  • ‘अभिनव भारत समाज’ नामक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना विनायक दामोदर सावरकर ने की।
  • राधा स्वामी सत्संग के संस्थापक शिवदयाल साहब थे।
  • बहुजन समाज के संस्थापक मुकुंद राव पाटिल थे।
  • नव बौद्धवाद के प्रतिपादक डॉ. अम्बेडकर थे।
  • राधाकांत देव वह बंगाली नेता थे जिसने सामाजिक धार्मिक सुधारों का विरोध किया और रूढ़िवादिता का समर्थन किया।
  • महाराष्ट्र में विधवा पुनर्विवाह हेतु अभियान का नेतृत्व विष्णु परशुराम पंडित ने किया।
  • 19वीं सदी के महानतम पारसी समाज सुधारक बहरामजी एम. मालाबारी थे।
  • बाल गंगाधर तिलक का कथन: “यदि भगवान अस्पृश्यता को सहन करते हैं, तो मैं उन्हें कभी भगवान नहीं मानूँगा”।