साइमन कमीशन तथा नेहरू रिपोर्ट

आधिकारिक नाम: इंडियन स्टैच्यूटरी कमीशन (Indian Statutory Commission)।
नियुक्ति की तिथि: 8 नवम्बर 1927।
अध्यक्ष: सर जॉन साइमन।
तत्कालीन वायसराय: लॉर्ड इरविन।

A. साइमन कमीशन की पृष्ठभूमि और नियुक्ति का कारण

  • संवैधानिक समीक्षा: 1909 के मार्ले-मिंटो सुधार और 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार में यह प्रावधान था कि हर 10 वर्ष बाद इनकी समीक्षा की जाएगी।
  • नियम के अनुसार 1919 के सुधार की समीक्षा 1929 में होनी थी, लेकिन कमीशन की नियुक्ति 1927 में ही कर दी गई।
  • समय से पहले नियुक्ति का कारण: ब्रिटेन में चुनाव होने वाले थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री ‘स्टेनली बाल्डविन’ (Conservative Party) को डर था कि वे चुनाव हार जाएंगे और लेबर पार्टी (जो भारतीयों के प्रति उदार थी) जीत जाएगी, इसलिए उन्होंने पहले ही कमीशन का गठन कर दिया।
  • उद्देश्य: प्रशासनिक सुधार की समीक्षा और संवैधानिक विकास का अध्ययन करना।
  • अनुशंसा: साइमन कमीशन की नियुक्ति करने की अनुशंसा भारत के तत्कालीन राज्य सचिव लॉर्ड बर्कनहेड ने की थी।
  • सभी अंग्रेज सदस्य: लॉर्ड इरविन की अनुशंसा पर साइमन कमीशन में एक भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया (इसलिए इसे ‘श्वेत कमीशन’ भी कहा गया)।

B. साइमन कमीशन के 7 सदस्य

👥 कमीशन के सभी 7 सदस्य अंग्रेज थे

  1. सर जॉन साइमन (अध्यक्ष)
  2. क्लीमेंट एटली (लेबर पार्टी से)
  3. सेसिल जॉर्ज काडिगन
  4. हैरी लेवी लॉनसन
  5. बर्नोन हार्टसन
  6. डोनाल्ड स्टालिन
  7. जॉर्ज रिचर्ड लेन फॉक्स

C. भारत में आगमन, विरोध और प्रमुख घटनाएँ

  • भारत आगमन: कमीशन 3 फरवरी 1928 को बॉम्बे पहुँचा।
  • विरोध का फैसला: 1927 में मद्रास में हुए कांग्रेस अधिवेशन (अध्यक्ष: डॉ. एम.ए. अंसारी) में साइमन कमीशन का विरोध करने का फैसला लिया गया था।
  • भारत पहुँचते ही हड़ताल और काले झंडे दिखाए गए।
  • प्रसिद्ध नारा: “साइमन वापस जाओ” (Simon Go Back) का नारा यूसुफ मेहर अली ने दिया था।
  • लखनऊ में विरोध: गोबिंद बल्लभ पंत और जवाहर लाल नेहरू ने विरोध किया, जहाँ दोनों को लाठियों से चोट लगी।
  • पटना में विरोध: इसका नेतृत्व मजहर-उल-हक ने किया।

लाहौर में विरोध और लाला लाजपत राय की शहादत

  • लाहौर में विरोध का नेतृत्व लाला लाजपत राय कर रहे थे।
  • अंग्रेज अधिकारी SP सॉन्डर्स के आदेश पर हुए लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय को गंभीर चोटें आईं।
  • 17 नवम्बर 1928 को लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई।
  • लाला लाजपत राय का प्रसिद्ध कथन: “मेरे ऊपर किया गया लाठियों का एक-एक प्रहार ब्रिटिश हुकूमत की ताबूत की आखिरी कील साबित होगा।”
  • मोतीलाल नेहरू का कथन: लाला लाजपत राय की मृत्यु पर उन्होंने कहा- “Prince Among the Peace maker”
कमीशन का कार्यक्रम: कमीशन 3 Feb 1928 को आया और उसी वर्ष वापस गया। दुबारा 1929 में आया और 1930 में वापस गया। इसने अपनी रिपोर्ट 27 मई 1930 को दी।

D. साइमन कमीशन के समर्थक और विरोधी दल

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समर्थन करने वाले दल विरोध करने वाले दल
1. जस्टिस पार्टी (मद्रास)
2. यूनियनिस्ट पार्टी (पंजाब)
3. मुस्लिम लीग (शफी गुट)
4. केन्द्रीय सिख संगठन
5. अखिल भारतीय अछूत संगठन
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2. मुस्लिम लीग (जिन्ना गुट)
3. किसान मजदूर पार्टी
4. हिन्दू महासभा
5. इंडियन लिबरल एसोसिएशन
6. भारतीय औद्योगिक एवं वाणिज्यिक कांग्रेस

E. साइमन कमीशन की प्रमुख सिफारिशें

  1. प्रत्येक 10 वर्षीय समीक्षा समाप्त की जाए।
  2. प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर उत्तरदायी सरकार की स्थापना की जाए।
  3. बर्मा को भारत से अलग किया जाए
  4. अल्पसंख्यक वर्ग का विशेष ध्यान रखा जाए।
  5. केन्द्र में उत्तरदायी सरकार की स्थापना नहीं की जाए।
  6. मताधिकार की छूट का विस्तार किया जाए।
  7. उड़ीसा और सिंध को अलग प्रांत का दर्जा दिया जाए।

F. नेहरू रिपोर्ट (1928)

  • चुनौती: साइमन कमीशन के विरोध के बाद, भारत के राज्य सचिव लॉर्ड बर्कनहेड ने नाराज कांग्रेस नेताओं को चुनौती दी कि “एक ऐसा संविधान का निर्माण करो जो भारत के सभी राजनीतिक दलों को मंजूर हो।”
  • मोतीलाल नेहरू ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया।
  • सर्वदलीय बैठक: इसके लिए फरवरी 1928 में दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस, मुस्लिम लीग, हिन्दू महासभा, खिलाफत समिति और भारतीय ईसाई संगठन ने भाग लिया।
  • मई 1928 की बैठक: बॉम्बे में डॉ. एम.ए. अंसारी की अध्यक्षता में एक और बैठक हुई जिसमें 29 दल शामिल हुए।

नेहरू समिति का गठन

  • अध्यक्ष: मोतीलाल नेहरू।
  • सचिव: जवाहर लाल नेहरू।
  • अन्य सदस्य: तेज बहादुर सप्रू, मंगल सिंह, जी.आर. प्रधान, महादेव अणे, एम.आर. जयकर।
  • मुस्लिम लीग से सदस्य: अली इमाम, शोएब कुरैशी।
  • रिपोर्ट की स्वीकृति: इस समिति ने जो रिपोर्ट तैयार की उसे 28 अगस्त 1928 को स्वीकार किया गया।

G. नेहरू रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें

  1. भारत को अधिराज्य (Dominion Status) का दर्जा दिया जाए।
  2. मूल अधिकार की माँग।
  3. महिलाओं को भी समान अधिकार मिलना चाहिए।
  4. संयुक्त निर्वाचन मंडल की व्यवस्था।
  5. भाषाई आधार पर प्रान्तों का गठन।
  6. राज्य का धर्म से पृथक्करण की माँग।
  7. द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका।
  8. भारत में उत्तरदायी शासन की स्थापना।

H. रिपोर्ट का विरोध और 1928 का कांग्रेस अधिवेशन

  • मुस्लिम लीग इस रिपोर्ट से नाराज थी।
  • मोतीलाल नेहरू द्वारा माँगे गए ‘अधिराज्य के दर्जे’ (Dominion Status) का विरोध जवाहर लाल नेहरू और सुभाष चन्द्र बोस ने किया।
  • इन्होंने इसके स्थान पर ‘पूर्ण स्वराज’ की माँग की।
  • विरोध के चलते इन दोनों नेताओं ने 1928 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और एक नई राजनीतिक पार्टी ‘Independence for India League’ (नवम्बर 1928) का गठन किया।

1928 का कांग्रेस अधिवेशन

  • स्थान: कलकत्ता।
  • अध्यक्ष: मोतीलाल नेहरू।
  • प्रस्ताव एवं चेतावनी: इस अधिवेशन में प्रस्ताव पेश किया गया कि “अगर नेहरू रिपोर्ट को ब्रिटिश हुकूमत 31 Dec 1929 तक स्वीकार नहीं करती है, तो हम ‘पूर्ण-स्वराज’ की ओर आगे बढ़ेंगे और उसकी प्राप्ति के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करेंगे।”