14. मौर्योत्तर काल: शुंग एवं कण्व वंश
A. पुष्यमित्र शुंग एवं प्रारंभिक जानकारी
- राजधानी: शुंग वंश की प्रारंभिक राजधानी पाटलिपुत्र थी। बाद में पुष्यमित्र शुंग ने अपनी दूसरी राजधानी मध्य प्रदेश के विदिशा को बनाया।
- जानकारी के स्रोत: इनके इतिहास की जानकारी मत्स्य पुराण, हर्षचरित, मालविकाग्निमित्र और गार्गी संहिता से मिलती है।
- उपाधियां: पुष्यमित्र की प्रमुख उपाधि ‘सेनापति’ या ‘सेनानी’ की थी। बाणभट्ट रचित ‘हर्षचरित’ ग्रंथ में पुष्यमित्र को ‘अनार्य’ कहा गया है।
- अश्वमेध यज्ञ: धनदेव के अयोध्या अभिलेख से जानकारी मिलती है कि पुष्यमित्र ने दो अश्वमेध यज्ञ करवाए थे। यह यज्ञ महर्षि पतंजलि द्वारा संपन्न कराये गए थे (पतंजलि पुष्यमित्र के पुरोहित थे)।
धार्मिक नीतियां एवं कृत्य
- पुष्यमित्र शुंग हिन्दू सनातन धर्म का प्रबल अनुयायी था। शुंग काल में ब्राह्मण धर्म और संस्कृत भाषा का पुनरुत्थान हुआ।
- कहा जाता है कि इसने अशोक द्वारा बनवाये गए 84,000 स्तूपों को तुड़वा दिया था।
- इसने घोषणा की थी कि जो भी व्यक्ति बौद्ध संतों का सिर काटकर लायेगा, उसे इनाम के तौर पर 100 दीनार दिए जाएंगे।
- पुष्यमित्र ने अयोध्या का नाम बदलकर ‘साकेत’ रख दिया था।
- हालाँकि बाद में इसने भरहुत स्तूप का निर्माण करवाया और साँची के स्तूप की चारदीवारी (वेदिका) को पत्थर से बनवाया था।
B. प्रथम यूनानी (यवन) आक्रमण
- पुष्यमित्र के शासनकाल के दौरान ही भारत पर यूनानियों का सबसे पहला आक्रमण हुआ।
- इस यूनानी आक्रमण के बारे में जानकारी महाभाष्य, मालविकाग्निमित्र और गार्गी संहिता से प्राप्त होती है।
- प्रथम यूनानी आक्रमणकारी ‘डेमेट्रियस प्रथम’ था।
- इस आक्रमणकारी को पुष्यमित्र शुंग एवं उसके लड़के अग्निमित्र ने बुरी तरह पराजित किया और मार-मार कर भगाया।
C. शुंग वंश के अन्य प्रमुख शासक
1. अग्निमित्र
- पुष्यमित्र शुंग के बाद उसका पुत्र ‘अग्निमित्र’ राजा बना।
- अग्निमित्र और मालवा की राजकुमारी ‘मालविका’ के बीच प्रेम प्रसंग था।
- इन दोनों ने आगे चलकर विवाह कर लिया।
- प्रसिद्ध संस्कृत कवि कालिदास ने इन्हीं की कथा पर आधारित अपना प्रसिद्ध नाटक ‘मालविकाग्निमित्रम्’ लिखा।
2. वसुमित्र एवं वज्रमित्र
- अग्निमित्र के बाद ‘वसुमित्र’ राजा बना और उसके बाद ‘वज्रमित्र’ राजा बना।
- इन दोनों के शासनकाल की कोई विशेष ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं है।
3. भागभद्र
- वज्रमित्र के बाद ‘भागभद्र’ शुंग वंश का राजा बना।
- इसी के समय में यूनानी राजा ‘एंटियालकिडस’ ने अपने राजदूत ‘हेलियोडोरस’ को भारत (भागभद्र के दरबार) में भेजा था।
- इसी हेलियोडोरस ने मध्य प्रदेश के विदिशा (बेसनगर) में ‘गरुड़ स्तंभ लेख’ का निर्माण करवाया।
- इस बेसनगर के गरुड़ स्तंभ लेख में पहली बार ‘भागवत धर्म’ के बारे में जानकारी मिलती है।
4. देवभूति (अंतिम शासक)
- शुंग वंश का छठा एवं अंतिम राजा ‘देवभूति’ था।
- देवभूति की हत्या उसके मंत्री ‘वासुदेव’ ने कर डाली।
- इस वासुदेव ने मगध की सत्ता पर एक नए राजवंश की नींव रखी, जिसका नाम ‘कण्व वंश’ रखा गया।
D. कण्व वंश (73 ई.पू. – 28 ई.पू.)
- कण्व वंश की स्थापना वासुदेव द्वारा शुंग शासक देवभूति की हत्या करके की गई थी।
- यह एक अत्यंत छोटा राजवंश था, जिसने कुछ ही दशकों तक मगध पर शासन किया।
- इस वंश में मुख्य रूप से चार शासक हुए: वासुदेव, भूमिमित्र, नारायण और सुशर्मा।
- कण्व वंश का अंतिम शासक सुशर्मा (Susharman) था।
- सुशर्मा की हत्या ‘सिमुक’ नामक सामंत ने कर दी और इसके साथ ही मगध पर कण्व वंश का अंत हो गया। सिमुक ने इसके बाद ‘सातवाहन वंश’ की स्थापना की।
💡 परीक्षा उपयोगी विविध तथ्य (VVI Summary)
| महत्वपूर्ण बिंदु | उत्तर / तथ्य |
|---|---|
| शुंग वंश का संस्थापक | पुष्यमित्र शुंग |
| शुंग वंश का अंतिम राजा | देवभूति |
| कण्व वंश का संस्थापक | वासुदेव |
| पुष्यमित्र के पुरोहित | महर्षि पतंजलि |
| भागवत धर्म का प्रथम प्रमाण | हेलियोडोरस का बेसनगर गरुड़ स्तंभ लेख |
| प्रथम यूनानी आक्रमणकारी | डेमेट्रियस प्रथम |
नोट: शुंग काल में ही प्रसिद्ध हिन्दू विधि ग्रंथ ‘मनुस्मृति’ की रचना हुई थी। यह काल वैदिक धर्म के पुनर्जागरण का काल माना जाता है।