15. सातवाहन वंश और वर्धन वंश

सातवाहन वंश: सातवाहन वंश की स्थापना सिमुक द्वारा की गई थी। इस वंश की स्थापना कृष्णा एवं गोदावरी नदी के संगम पर हुई थी। सातवाहन वंश का इतिहास पुराणों एवं अभिलेखों से मिलता है। पुराणों में सातवाहन वंश को ‘आंध्र वंश’ कहा गया है।

A. प्रारंभिक जानकारी एवं शासक (सातवाहन वंश)

  • सातवाहन वंश की पहली राजधानी अमरावती थी।
  • सातवाहनों की दूसरी राजधानी प्रतिष्ठान (महाराष्ट्र) में बनाई गई थी।
  • सातवाहन राजाओं की राजकीय भाषा प्राकृत, संस्कृत, तमिल और तेलुगु थी।

जानकारी के प्रमुख स्रोत

  • ऐतरेय ब्राह्मण ग्रंथ
  • मत्स्य पुराण (सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक)
  • नाना घाट अभिलेख (महाराष्ट्र)
  • नासिक गुहा लेख (महाराष्ट्र)

नोट: वायु पुराण से गुप्त वंश की जानकारी और विष्णु पुराण से मौर्य वंश की जानकारी मिलती है।

1. सिमुक (संस्थापक)

  • यह सातवाहन वंश का संस्थापक था, जिसका अन्य नाम ‘सिन्धुक’ भी था।
  • इसी ने राजधानी अमरावती को बनाया था।
  • इस वंश के राजा ब्राह्मण धर्म एवं बौद्ध धर्म दोनों के अनुयायी थे।

2. कृष्णा जी (कान्हा जी)

  • यह सिमुक का भाई था जिसे ‘कान्हा जी’ के नाम से भी जानते हैं।
  • इसने अपने शासनकाल में महाराष्ट्र के नासिक में बौद्ध गुफा का निर्माण करवाया था।
  • इसका उल्लेख नासिक लेख में दिया गया है।

3. शातकर्णी प्रथम

  • इसका विवाह अंग वंशीय राजकुमारी ‘नयनिका देवी’ से हुआ था।
  • नयनिका देवी ने नानाघाट अभिलेख (महाराष्ट्र) बनवाया था।
  • भारत में भूमिदान करने का उल्लेख इसी अभिलेख में मिलता है।
  • इसी अभिलेख से जानकारी मिलती है कि इसके पति (शातकर्णी प्रथम) ने अश्वमेध यज्ञ करवाया था।
  • प्रमुख उपाधियाँ: प्रतिष्ठान पति और दक्षिणापथ पति। इसी आदमी ने दूसरी राजधानी प्रतिष्ठान को बनाया था।

B. सातवाहन वंश के अन्य प्रमुख शासक

4. हाल

  • इसकी प्रमुख रचना ‘गाथा सप्तशती’ (प्राकृत भाषा में) है, जिसमें हाल की प्रेम कहानी का वर्णन है।
  • दरबारी कवि: ‘गुणाढ्य’ (किताब: बृहत् कथा कोष – प्राकृत भाषा में) और ‘शर्ववर्मन’ (किताब: कातंत्र – प्राकृत भाषा में)।
  • हाल का सेनापति ‘विजयानंद’ था, जिसने श्रीलंका पर अधिकार किया और वहाँ की राजकुमारी लीलावती का अपहरण करके लाया था।
  • बाद में लीलावती से हाल ने विवाह किया।

5. गौतमीपुत्र शातकर्णी (VVI)

  • इसने शक शासक नहपान को पराजित कर उसकी हत्या कर डाली।
  • इसने महराज, राजराज, स्वामी जैसे उपाधि ग्रहण किया।
  • महाराष्ट्र में ‘वेणकटक’ नामक शहर की स्थापना की।
  • इसने बौद्ध संतों को अजकालिकाएँ नामक गुफा (महाराष्ट्र) और करजक नामक क्षेत्र बौद्ध साधुओं को दान में दिया।
  • इनके बारे में नासिक लेख में कहा गया: ‘त्रि समुद्र तोय पीतवाहन’ (तीनों समुद्र का पानी पीने वाला)।
  • सबसे पहले भारत में बौद्ध साधुओं को भूमि दान देने की प्रथा इसी ने प्रारंभ की।
  • इसे अद्वितीय ब्राह्मण, वर्ण व्यवस्था का रक्षक, पर्वतों का स्वामी, वेदों का आश्रयदाता कहा जाता है।

6. वशिष्ठीपुत्र पुलवामी

  • यह गौतमीपुत्र शातकर्णी का पुत्र था।
  • इसका विवाह उज्जैन के शक राजा रुद्रदामन की पुत्री से हुआ था।
  • प्रमुख उपाधि: दक्षिणापथेश्वर
  • इसने अमरावती बौद्ध स्तूप का पूर्ण निर्माण करवाया और महाराष्ट्र में ‘नवलगढ़’ नामक शहर की स्थापना की।
  • इसे ‘पुलोमा शातकर्णी’ भी कहा जाता है और समस्त आन्ध्रप्रदेश पर कब्जा करने के कारण ‘आन्ध्र सम्राट’ भी कहा जाता है।

7. यज्ञश्री शातकर्णी

  • इसे ‘जलयात्रा का प्रेमी’ कहा जाता है।
  • इसके सिक्कों पर जहाज का चित्र बना है।
  • इसके सिक्के महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, सौराष्ट्र, गुजरात और MP से पाये गए हैं।
  • इनके समय से ही सातवाहन वंश का पतन प्रारंभ हो गया था।

💡 सातवाहन काल के परीक्षा उपयोगी तथ्य (One-Liners)

  • सातवाहन वंश के शासकों के समय में कार्ले चैत्य गुफा (मुंबई) और अजंता की गुफा (मुंबई) में बनी।
  • सातवाहन वंश के समय में आन्ध्रप्रदेश में अमरावती कला का विस्तार हुआ।
  • भारत में शीशा का सिक्का सातवाहन राजाओं ने पहली बार चलाया।
  • सातवाहन काल में स्त्रियों को सम्मान और आदर प्रदान किया जाता था (यह मातृसत्तात्मक समाज था)।
  • प्रमुख व्यवसाय: कृषि तथा पशुपालन था और बौद्ध कला का खूब विकास हुआ।
  • तांबे/चाँदी के सिक्के को ‘कार्षापण’ तथा सोने के सिक्कों को ‘सुवर्ण’ कहा जाता था।
  • सातवाहन राजा ब्राह्मण थे (गौतमीपुत्र शातकर्णी के नासिक लेख में उन्हें ब्राह्मण कहा गया है)।
  • सातवाहन काल में आन्ध्रप्रदेश कपास के लिए प्रसिद्ध था।
  • सातवाहन काल में बौद्ध धर्म का मुख्य केंद्र आन्ध्रप्रदेश के गुन्टूर जिले में अमरावती था।
  • सातवाहन शासकों ने ब्राह्मणों को जो भूमि दान में दिए उसे ‘अग्रहार’ कहा गया।

C. वर्धन वंश / पुष्यभूति वंश

इतिहास की जानकारी के स्रोत

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पुरातात्विक स्रोत साहित्यिक एवं अन्य स्रोत
• बासखेड़ा अभिलेख (UP)
• मधुवन अभिलेख (UP)
(ये दोनों अभिलेख हर्षवर्धन के हैं)
• हर्षवर्धन के सिक्के: नालंदा, फर्रुखाबाद, और सोनीपत से पाए गए हैं।
• आर्य मंजुश्री मूल कल्पग्रंथ (बौद्ध ग्रंथ)
• बाणभट्ट की पुस्तक हर्षचरित
• विदेशी यात्री: ह्वेनसांग, इत्सिंग, मतवालिन।

वंश की स्थापना एवं प्रभाकर वर्धन

  • पुष्यभूति वंश की स्थापना नरवर्धन ने की, जिनके लड़के का नाम प्रभाकर वर्धन था।
  • प्रभाकर वर्धन को पुष्यभूति वंश का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है।
  • प्रभाकर वर्धन के दो लड़के (बड़ा पुत्र: राज्यवर्धन, छोटा पुत्र: हर्षवर्धन) और एक पुत्री (राज्यश्री) थी।
  • प्रभाकर वर्धन की पत्नी का नाम यशोमती था, जो शैव धर्म की अनुयायी थीं।
  • इनके दरबार में दो वैद्य थे: रसायन और सुशेन।
  • उपाधि: प्रतापशील, महाराजाधिराज, हुण-हरिण केशरी, और सिन्धुराज।

प्रभाकर वर्धन की मृत्यु एवं उत्तराधिकार

  • प्रभाकर वर्धन की मृत्यु हूणों के आक्रमण को दबाने के क्रम में हो गई।
  • इनकी मृत्यु की सुचना ‘कुरंगक’ नामक दूत ने (हर्षवर्धन को) दी।
  • इसके पश्चात् इनकी पत्नी यशोमती ने सरस्वती नदी में जल समाधि ले लिया।
  • प्रभाकर वर्धन की मृत्यु के पश्चात् राज्यवर्धन राजा बने, जिनकी हत्या बंगाल के नरेश शशांक ने कर दी।
  • बहन राज्यश्री का विवाह कन्नौज के मौखरी वंश के राजा (ग्रहवर्मन) से हुआ था।
  • ग्रहवर्मन की हत्या मालवा नरेश देवगुप्त ने कर डाली।