गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौता
A. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930-1931)
- स्थान: सेंट जेम्स पैलेस (लंदन)।
- तिथि: 12 नवम्बर 1930 से 19 जनवरी 1931 तक।
- अध्यक्षता: रैम्जे मैकडोनाल्ड (उस समय के ब्रिटिश प्रधानमंत्री)।
- उद्घाटन: जॉर्ज पंचम (ब्रिटिश सम्राट)।
- कुल सदस्य: इस सम्मेलन में कुल 89 सदस्यों ने हिस्सा लिया (57 भारतीय, 16 ब्रिटिश और 16 भारतीय रियासत के प्रतिनिधि)।
सम्मेलन में शामिल प्रमुख दल और सदस्य
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| दल / वर्ग | प्रतिनिधि |
|---|---|
| कांग्रेस | 0 (दांडी यात्रा के दौरान गांधी जी की गिरफ्तारी के कारण कांग्रेस का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ)। |
| मुस्लिम लीग | मो. अली जिन्ना, आगा खाँ, फजलुल हक। |
| हिन्दू महासभा | डॉ. मुंजे, एम. आर. जयकर। |
| दलित वर्ग | डॉ. बी. आर. अम्बेडकर। |
| उदारवादी | तेज बहादुर सप्रू, चिंतामणि, श्रीनिवास शास्त्री। |
| अन्य | सिख: सरदार पूर्ण सिंह | आंग्ल-भारतीय: के. टी. पाल। |
प्रमुख मांगें और निष्कर्ष
- मुस्लिम लीग: पृथक निर्वाचन की सीटों में बढ़ोत्तरी (अस्वीकार/Reject)।
- रियासतें: अखिल भारतीय संघ का निर्माण (स्वीकार/Accept)।
- दलित: पृथक निर्वाचन क्षेत्र की मांग (अस्वीकार/Reject)।
- बैठक का निष्कर्ष: अखिल भारतीय संघ का निर्माण, प्रांतों में उत्तरदायी शासन और केंद्र में द्वैध शासन लागू करने पर सहमति बनी।
- 19 जनवरी 1931 को बैठक समाप्त हुई और ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने वायसराय लॉर्ड इरविन को आदेश दिया कि गांधी जी को जेल से रिहा किया जाए।
B. गाँधी-इरविन समझौता (दिल्ली समझौता)
- किनके बीच: महात्मा गांधी और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन (1926-1931) के बीच।
- स्थान और तिथि: दिल्ली में 5 मार्च 1931 को। इसीलिए इसे ‘दिल्ली समझौता’ भी कहा जाता है।
- मध्यस्थता: इस समझौते में तेज बहादुर सप्रू और एम. आर. जयकर ने अहम भूमिका निभाई।
🤝 समझौते की शर्तें
गाँधी जी की स्वीकार की गई मांगें:
- नमक कर को समाप्त करें और नमक पर एकाधिकार समाप्त हो।
- सरकारी नौकरी वापस मिले।
- महिलाओं को मादक पदार्थों की दुकानों के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार हो।
- राजनैतिक कैदियों को रिहा किया जाए।
- क्रांतिकारियों की जब्त संपत्ति वापस हो।
- सभी अध्यादेश वापस लिए जाएं।
गाँधी जी की अस्वीकार की गई मांगें (Reject):
- भगत सिंह एवं उनके साथियों की फाँसी की सजा माफ़ हो।
- दमनकारी कार्यवाही करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही हो।
लॉर्ड इरविन की मांगें (जिन्हें गाँधी जी ने मान लिया):
- सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करें।
- कांग्रेस द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में शामिल हो।
C. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931)
- स्थान: सेंट जेम्स पैलेस (लंदन)।
- अध्यक्षता: रैम्जे मैकडोनाल्ड।
- तिथि: 7 सितम्बर 1931 से 1 दिसम्बर 1931 तक।
- कुल प्रतिनिधि: 31।
- कांग्रेस का प्रतिनिधित्व: महात्मा गांधी ने किया। वे ‘S.S. राजपूताना’ नामक जहाज से लंदन गए और ‘किंग्सले पैलेस’ में ठहरे।
- गांधी जी के साथ: एनी बेसेंट और सरोजनी नायडू अपने स्वयं के खर्च पर गांधी जी के साथ गए।
अन्य प्रमुख प्रतिनिधि
- मुस्लिम लीग: मो. इकबाल, मो. अली जिन्ना।
- महिला वर्ग: सरोजनी नायडू।
- हिन्दू महासभा: मदन मोहन मालवीय।
- व्यापारी वर्ग: घनश्याम दास बिरला।
- दलित वर्ग: डॉ. अम्बेडकर।
- उदारवादी और ईसाई: तेज बहादुर सप्रू और एस. के. दत्ता।
विवाद और वापसी
- इस सम्मेलन में डॉ. अम्बेडकर ने दलितों के लिए ‘पृथक निर्वाचन’ की मांग की, जिससे गांधी जी नाराज हो गए।
- सम्मेलन विफल रहा। 1 दिसम्बर 1931 को गांधी जी ‘वेसांटियाना’ (इटली का जहाज) से भारत वापस लौटे और 28 दिसम्बर 1931 को बॉम्बे पहुँचे।
- गांधी जी का कथन: “मैं भारत तो खाली हाथ जरूर लौटा हूँ, लेकिन मैंने भारत की इज्जत पर आँच नहीं आने दिया।”
- परिणाम: 3 जनवरी 1932 को गांधी जी ने द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने की घोषणा की। जिसके चलते 4 जनवरी 1932 को उन्हें गिरफ्तार कर यरवदा जेल (पुणे) भेज दिया गया और कांग्रेस को अवैध संस्था घोषित कर दिया गया।
D. साम्प्रदायिक पंचाट (Communal Award) – 1932
- पृष्ठभूमि: द्वितीय गोलमेज सम्मेलन का कोई परिणाम नहीं निकला था। ब्रिटेन के पीएम रैम्जे मैकडोनाल्ड ने ‘लॉर्ड लिनलिथगो समिति’ का गठन किया, जिसकी अनुशंसा पर साम्प्रदायिक पंचाट जारी हुआ।
- उद्देश्य: ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाना।
- घोषणा: इसके माध्यम से दलितों के लिए पृथक निर्वाचन की घोषणा की गई और उनके लिए 78 सीटों की व्यवस्था की गई। (इससे पहले 1909 में मुसलमानों को और 1919 में सिखों, ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों व महिलाओं को पृथक निर्वाचन मिल चुका था, लेकिन बौद्धों को नहीं मिला था)।
- पंचाट जारी: 16 अगस्त 1932 को (इस समय गांधी जी यरवदा जेल में थे)।
- गांधी जी का आमरण अनशन: 19 अगस्त को खबर मिलने पर गांधी जी ने 30 दिनों का अल्टीमेटम दिया और मांग पूरी न होने पर 20 सितम्बर 1932 को जेल में ही आमरण अनशन शुरू कर दिया।
E. पूना समझौता (Poona Pact)
- तिथि: 26 सितम्बर 1932।
- स्थान: यरवदा जेल (पुणे)।
- किनके बीच: महात्मा गांधी और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के बीच।
- हस्ताक्षर: इस समझौते पर डॉ. अम्बेडकर और महात्मा गांधी की ओर से मदन मोहन मालवीय ने हस्ताक्षर किए। (सी. राजगोपालाचारी और एम. सी. रजा भी सक्रिय सदस्य थे)।
✅ पूना समझौते का परिणाम
- दलितों का पृथक निर्वाचन समाप्त कर दिया गया।
- दलितों के लिए प्रांतीय विधान मंडल में आरक्षित सीटों की संख्या 71 से बढ़ाकर 147 कर दी गई।
- केन्द्रीय विधान मंडल में दलितों के लिए 18% सीटें आरक्षित कर दी गईं।
F. तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932)
- तिथि: 17 नवम्बर से 24 दिसम्बर 1932 तक।
- स्थान: सेंट जेम्स पैलेस (लंदन)।
- अध्यक्षता: रैम्जे मैकडोनाल्ड (ब्रिटिश PM) और भारत के राज्य सचिव सैमुअल होरे (Samuel Hoare)।
- कुल प्रतिभागी: 46।
- किसने हिस्सा नहीं लिया: कांग्रेस और मुस्लिम लीग (जिन्ना) ने इसका बहिष्कार किया।
- तीनों गोलमेज सम्मेलनों में शामिल होने वाले: दलित वर्ग से डॉ. अम्बेडकर और उदारवादियों की ओर से तेज बहादुर सप्रू ने तीनों सम्मेलनों में हिस्सा लिया था।
- परिणाम (GOI Act 1935): इस सम्मेलन के बाद अंग्रेजों ने एक ‘श्वेत पत्र’ जारी किया (राज्य सचिव सैमुअल होरे द्वारा)। इसे ब्रिटिश संसद में विधेयक के रूप में पेश किया गया, जो पारित होकर ‘भारत सरकार अधिनियम – 1935’ (GOI Act 1935) बना।