प्रांतीय चुनाव (1937), पाकिस्तान की माँग और द्वितीय विश्व युद्ध
कांग्रेस की घोषणा: 1936 के लखनऊ अधिवेशन में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने स्पष्ट रूप से कहा था कि कांग्रेस इन चुनावों में हिस्सा लेगी.
A. चुनाव के उद्देश्य और नई पार्टियां
- उद्देश्य: सीधे जनता से संवाद करना, सत्ता में भागीदारी, आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना और रचनात्मक कार्यों में बढ़ोत्तरी करना.
- कुल 11 प्रांतों में चुनाव आयोजित किए गए.
- चुनाव में भागीदारी: कांग्रेस, मुस्लिम लीग और अन्य छोटे-बड़े दलों ने भाग लिया.
चुनाव से पहले गठित नई पार्टियां:
- इंडिपेंडेंस लेबर / वर्कर पार्टी: डॉ. अम्बेडकर द्वारा गठित.
- कृषक प्रजा पार्टी: फजलुल हक द्वारा गठित.
- यूनियनिस्ट पार्टी: अफसर हुसैन द्वारा गठित.
B. कांग्रेस का घोषणापत्र (Manifesto)
चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस ने जनता के समक्ष अपना घोषणापत्र रखा, जिसमें निम्नलिखित वादे किए गए थे:
- कृषक ऋण माफ़ी.
- मालगुजारी माफ़ी.
- राजनीतिक कैदियों की रिहाई.
- नागरिक स्वतंत्रता की बहाली.
- उद्योग-कारखाने स्थापित करेंगे.
- मजदूर संगठन का निर्माण.
- छुआ-छूत एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करेंगे.
- कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन करेंगे.
C. चुनाव परिणाम और प्रांतीय सरकारें
- कुल सीटें: 11 प्रांतों में कुल 1585 सीटें थीं, जिनमें से कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 711 सीटें जीतीं.
- पूर्ण बहुमत (5 प्रांत): कांग्रेस को संयुक्त प्रांत, बिहार, मध्य प्रांत, उड़ीसा और मद्रास में पूर्ण बहुमत मिला.
- गठबंधन सरकार (3 प्रांत): बॉम्बे, पश्चिमोत्तर प्रांत और असम में कांग्रेस ने गठबंधन सरकार बनाई.
- इस प्रकार कांग्रेस ने कुल 8 प्रांतों में सरकार बनाई और 6 प्रांतों (5 बहुमत वाले + बॉम्बे) में कांग्रेस का मंत्रिमंडल बना.
- अन्य दलों की सरकारें: बंगाल में (कृषक प्रजा पार्टी + मुस्लिम लीग), सिंध में (सिंध यूनाइटेड पार्टी) और पंजाब में (यूनियनिस्ट पार्टी) की सरकार बनी.
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| प्रांत (कुल 11) | प्रधानमंत्री (उस समय मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था) |
|---|---|
| 1. बिहार | मो. यूनुस (इस्तीफा देने के बाद श्री कृष्ण सिंह बने) |
| 2. संयुक्त प्रांत | गोविंद वल्लभ पंत |
| 3. मद्रास | सी. राजगोपालाचारी |
| 4. उड़ीसा | बी. एन. दास |
| 5. बॉम्बे | बी. जी. खरे |
| 6. असम | सादुल्लाह (बाद में गोपीनाथ बारदोलोई) |
| 7. पश्चिमोत्तर प्रांत | डॉ. खान साहब |
| 8. सिंध | अल्ला बख्श सूमरो |
| 9. बंगाल | फजलुल हक |
| 10. मध्य प्रांत | एन. बी. खरे (बाद में रविशंकर शुक्ल) |
| 11. पंजाब | सिकंदर हयात खाँ |
D. कांग्रेस का इस्तीफा और ‘मुक्ति दिवस’
- द्वितीय विश्व युद्ध (WW-II, 1939-45) शुरू होने पर अंग्रेजों ने भारतीयों को बिना बताये उन्हें युद्ध में शामिल कर लिया.
- इसके विरोध में 22 अक्टूबर 1939 को कांग्रेस ने सभी 8 प्रांतों की सरकार से अचानक इस्तीफा दे दिया.
- इस प्रकार प्रांतीय सरकारें केवल 28 महीनों तक ही चलीं.
- कांग्रेस के इस्तीफे से खुश होकर मुस्लिम लीग ने 22 दिसम्बर 1939 को ‘मुक्ति दिवस’ मनाया.
E. पाकिस्तान की माँग (Demand for Pakistan)
- पृष्ठभूमि (1930): मुस्लिम लीग का अधिवेशन इलाहाबाद में हुआ, जिसकी अध्यक्षता मो. इकबाल ने की। उन्होंने पहली बार भाषण में कहा कि धर्म के आधार पर राष्ट्रों का गठन होना चाहिए.
- ‘पाकिस्तान’ शब्द के जनक: मार्च 1933 में चौधरी रहमत अली ने ‘पाकिस्तान’ (PAKISTAN) शब्द दिया.
- PAKISTAN का अर्थ: P=पंजाब, A=अफगानिस्तान, K=कश्मीर, S=सिंध, TAN=बलूचिस्तान.
1940 का लाहौर अधिवेशन और महत्वपूर्ण घटनाएँ:
- 1940 में मुस्लिम लीग का अधिवेशन लाहौर में हुआ, जिसकी अध्यक्षता मो. अली जिन्ना ने की.
- 23 मार्च 1940 को पाकिस्तान का प्रस्ताव पेश किया गया। इसे खलीकुज्जमा ने पेश किया, ड्राफ्ट सिकंदर हयात खाँ ने तैयार किया और प्रस्तुत फजलुल हक ने किया.
- मुस्लिम लीग ने 23 मार्च 1943 को ‘पाकिस्तान दिवस’ मनाया.
- 1943 के करांची अधिवेशन में मुस्लिम लीग ने “बाँटो और छोड़ो” का नारा दिया.
💡 पाकिस्तान की माँग से जुड़े महत्त्वपूर्ण कथन
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: इन्होंने लॉर्ड मिंटो द्वितीय को पाकिस्तान का जन्मदाता कहा है.
- सरोजनी नायडू: इन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को ‘हिन्दू-मुस्लिम एकता का दूत’ कहा था.
- मो. इकबाल: इन्होंने जिन्ना को ‘राजनीतिज्ञ’ एवं नेहरू को ‘राष्ट्रभक्त’ कहा था.
F. द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) और भारत
- द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत 1 सितम्बर 1939 को हुई जब जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण कर दिया (मुख्य मुकाबला ब्रिटेन vs जर्मनी था).
- भारत को घसीटना: तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने बिना भारतीयों से बातचीत किए 17 अक्टूबर 1939 को घोषणा कर दी कि भारत द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी के खिलाफ लड़ेगा.
- इस तानाशाही फैसले का सर्वप्रथम विरोध महात्मा गांधी ने किया.
- उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल थे.
- वैश्विक दबाव: द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन कमजोर पड़ रहा था। जापान, चीन और अमेरिका के भारी दबाव के कारण ब्रिटेन किसी भी तरह भारत को इस युद्ध में शामिल कराना चाहता था, जिसके परिणामस्वरूप बाद में ‘अगस्त प्रस्ताव’ लाया गया.