2. प्रागैतिहासिक काल: पुरापाषाण और मध्यपाषाण
A. पाषाण काल का इतिहास एवं विभाजन
- भारतीय प्रागैतिहासिक पुरातत्व का जनक: रॉबर्ट ब्रूस फुट (Robert Bruce Foote) को कहा जाता है। इन्होने 1863 ई. में पल्लवरम (मद्रास) से भारत में पहला पाषाणकालीन औजार (Hand axe) खोजा था।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रथम महानिदेशक: अलेक्जेंडर कनिंघम।
- थॉमसन महोदय ने कोपेनहेगन संग्रहालय की सामग्री के आधार पर इतिहास को 3 भागों में बांटा: 1. पाषाण काल, 2. कांस्य काल, 3. लौह काल।
उपकरणों की भिन्नता के आधार पर पाषाण काल को 3 भागों में बांटा गया है:
1. पुरापाषाण काल (Paleolithic Age)
2. मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)
3. नवपाषाण काल (Neolithic Age)
1. पुरापाषाण काल (Paleolithic Age)
2. मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)
3. नवपाषाण काल (Neolithic Age)
B. पुरापाषाण काल (Paleolithic Age)
कालक्रम: लगभग 25 लाख ई.पू. से 10,000 ई.पू. तक। यह पाषाण काल का सबसे लंबा चरण है।
मानव जीवन एवं विशेषताएं
- जीवन शैली: मानव पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर था। वह आखेटक (शिकारी) और खाद्य संग्राहक (Food gatherer) था।
- कृषि, पशुपालन और बर्तन बनाने का ज्ञान नहीं था।
- आग का आविष्कार: इसी काल (पुरापाषाण काल) में मानव ने आग जलाना सीख लिया था, हालांकि इसका व्यापक उपयोग बाद में शुरू हुआ।
- आधुनिक मानव (होमो सेपियन्स): ज्ञानी मानव का प्रवेश इस काल के अंतिम चरण (उच्च पुरापाषाण काल) में हुआ।
- औजार (Tools): औजार मुख्यतः क्वार्टजाइट (Quartzite) पत्थर के बने होते थे। प्रमुख औजारों में हैंड-एक्स (हस्तकुठार/कुल्हाड़ी), क्लीवर (विदारणी) और चॉपर शामिल थे।
पुरापाषाण काल के प्रमुख स्थल एवं साक्ष्य (VVI)
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| प्रमुख स्थल (स्थान) | प्राप्त महत्वपूर्ण साक्ष्य / प्रमाण |
|---|---|
| भीमबेटका (रायसेन, मध्य प्रदेश) | यहाँ से गुफा चित्रकारी (Rock Art) का सबसे प्राचीन साक्ष्य मिला है। (खोज: वी.एस. वाकणकर ने की)। |
| हथनौरा (नर्मदा घाटी, मध्य प्रदेश) | भारत में मानव का सबसे प्राचीन साक्ष्य (मानव खोपड़ी/जीवाश्म) यहीं से मिला। (खोज: अरुण सोनकिया ने 1982 में की)। |
| पल्लवरम (तमिलनाडु) | भारत का प्रथम पुरापाषाणकालीन औजार (Hand axe) यहीं से प्राप्त हुआ। |
| बेलन घाटी (उत्तर प्रदेश) | यहाँ से अस्थि (हड्डी) निर्मित मातृदेवी की प्रतिमा प्राप्त हुई है। |
C. मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)
कालक्रम: 10,000 ई.पू. से 4,000 ई.पू. तक। यह पुरापाषाण और नवपाषाण काल के बीच का संक्रमण काल (Transitional phase) है। भारत में इसके बारे में पहली जानकारी 1867 ई. में सी.एल. कार्लाइल (C.L. Carlleyle) द्वारा विंध्य क्षेत्र से औजार खोजने पर मिली।
मानव जीवन एवं विशेषताएं
- माइक्रोलिथ (Microliths): इस काल में पत्थरों के औजार आकार में बहुत छोटे (1 से 5 सेमी.) हो गए। इसलिए इस काल को ‘सूक्ष्म पाषाण काल’ (Microlithic Age) भी कहा जाता है। ये औजार ज्यामितीय आकार (त्रिभुज, समलंब) के होते थे।
- पशुपालन की शुरुआत: मानव ने शिकार के साथ-साथ पशुओं को पालतू बनाना शुरू कर दिया।
- प्रथम पालतू पशु: मानव द्वारा पाला गया पहला जानवर कुत्ता (Dog) था।
- तीर-कमान (Bow and arrow) का विकास संभवतः इसी काल में हुआ।
- मानव अब अस्थाई बस्तियां (झोपड़ियाँ) बनाकर रहने लगा था।
मध्यपाषाण काल के प्रमुख स्थल एवं साक्ष्य (VVI)
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| प्रमुख स्थल (स्थान) | प्राप्त महत्वपूर्ण साक्ष्य / प्रमाण |
|---|---|
| आदमगढ़ (मध्य प्रदेश) व बागौर (राजस्थान) | भारत में पशुपालन का सबसे प्राचीनतम साक्ष्य इन्हीं दो स्थानों से प्राप्त हुआ है। |
| सराय नाहर राय (प्रतापगढ़, UP) | युद्ध का प्राचीनतम साक्ष्य और एक साथ 4 मानव कंकाल दफनाए जाने का प्रमाण। |
| महदहा (प्रतापगढ़, UP) | यहाँ से हड्डी एवं सींग निर्मित आभूषण और स्त्री-पुरुष को एक साथ दफनाने (युग्म शवाधान) का साक्ष्य मिला है। |
| चौपानी माण्डो (प्रयागराज, UP) | यहाँ से विश्व में मिट्टी के बर्तन (मृदभांड) के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। |
| लांघनाज (गुजरात) | यहाँ से 14 मानव कंकाल और रेत के टीले प्राप्त हुए हैं। |
💡 परीक्षा उपयोगी सार (Quick Revision Facts)
- आग का आविष्कार: पुरापाषाण काल में।
- पशुपालन की शुरुआत: मध्यपाषाण काल में।
- माइक्रोलिथ्स (छोटे औजार): मध्यपाषाण काल से संबंधित।
- पहला पालतू पशु: कुत्ता (Dog)।
- भारत में मानव का पहला साक्ष्य: हथनौरा (नर्मदा घाटी)।
- सबसे प्राचीन चित्रकारी: भीमबेटका (मध्य प्रदेश)।