20. पल्लव वंश

पल्लव वंश का उद्गम: पल्लव वंश से पहले तमिलनाडु में नाग वंश चल रहा था। पल्लवों (कलभ्रों नामक लड़ाकू जातियों) ने नाग वंश का खात्मा किया और पल्लव राजाओं ने इनका विनाश कर अपनी सत्ता स्थापित की। पल्लव राजाओं का प्रतीक चिन्ह ‘बैल’ था।

A. प्रारंभिक जानकारी एवं अभिलेख

  • ये गुप्त राजाओं के सामंत थे।
  • पल्लव वंश के राजा सनातन एवं बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और शिव के उपासक थे।
  • राजधानी: इन्होने अपनी राजधानी कांचीपुरम में बनाई।
  • राजकीय भाषा: इनकी राजकीय भाषा तमिल, तेलुगु और संस्कृत थी।
  • पल्लव वंश के राजाओं का प्रमुख बंदरगाह ‘महाबलीपुरम’ था।

पल्लव वंश की जानकारी के प्रमुख अभिलेख

↔️ टेबल को दायें-बायें खिसकाएं
अभिलेख का नाम संबंधित शासक
गुंटूर अभिलेखशिव स्कंद वर्मन
वेलुर अभिलेखसिंह विष्णु
मुण्ड गुपल्लम अभिलेखमहेन्द्र वर्मन
बालकुण्ड अभिलेखमहेन्द्र वर्मन

B. पल्लव वंश के प्रमुख शासक

1. सिंह विष्णु (575 – 600 ई.)

  • इन्होंने पल्लव वंश की स्थापना की।
  • इन्होंने पाण्ड्य, चेर, और चालुक्य शासकों को हराया।
  • इनके दरबारी कवि ‘भारवि’ थे।

2. महेन्द्र वर्मन प्रथम (600 – 630 ई.)

  • यह एक बेहतर संगीतज्ञ थे। इनके गुरु का नाम ‘रुद्राचार्य’ था।
  • इन्होंने ‘अपर’ नामक संत के प्रभाव में आकर शैव धर्म अपनाया।
  • प्रमुख उपाधियां: महेन्द्र विक्रम, चित्रकारी, महेश्वर, गुणभर, मत्तविलास, और सत्रुमल।
  • प्रसिद्ध रचनाएं: ‘मत्तविलास प्रहसन’, ‘भगवदज्जुकियम’, और ‘कुडमिमालय’।
  • इनके समकालीन शासक हर्षवर्धन एवं पुलकेशिन II थे।

3. नरसिंह वर्मन प्रथम (630 – 668 ई.)

  • यह पल्लव वंश का सबसे शक्तिशाली राजा था। यह महेन्द्र वर्मन का प्रथम लड़का था।
  • इसने ‘महामल्ल’ की उपाधि ग्रहण की।
  • श्रीलंका के राजा ‘मानवर्मा’ के सहयोग से इसने चालुक्य नरेश पुलकेशिन II को हराया
  • इसने ‘वातापीकोंड’ की उपाधि ग्रहण की।
  • महाबलीपुरम में प्रसिद्ध रथ मंदिर का निर्माण इसी ने करवाया।

4. नरसिंह वर्मन द्वितीय (695 – 722 ई.)

  • प्रमुख उपाधियां: शंकर भक्त, कामदेव, आगम प्रिय, राजसिंह, और परमभागवत।
  • इन्होंने अपना एक दूत मंडल चीन भेजा था।
  • चीन के लोगों के लिए नागपट्टनम (गंगैकोंड चोल पुरम) में बौद्ध विहार बनवाया।
  • यह अपने को ‘शिव का अवतार’ मानता था।
  • इसने कांचीपुरम का कैलाशनाथ मंदिर बनवाया (इसे ‘राजसिद्धेश्वर मंदिर’ भी कहा जाता है)।
  • मामल्लपुरम में ‘ऐरावतेश्वर मंदिर’ और ‘शोर मंदिर’ बनवाया।
  • इनके प्रसिद्ध दरबारी कवि ‘दंडी’ थे।

5. अंतिम शासक

पल्लव वंश का अंतिम राजा ‘अपराजित वर्मन’ था。

💡 मंदिर निर्माण शैली (Important Questions)

  • दक्षिण भारत में मंदिर निर्माण की शैली ‘द्रविड़ शैली’ कहलाती है।
  • द्रविड़ शैली का विस्तार कृष्णा नदी से लेकर कन्याकुमारी तक था।
  • भारत में मंदिर निर्माण की शैली का प्रारंभ मौर्यकाल से होता है।
  • नागर शैली का विकास उत्तर भारत में हुआ था।