16. वर्धन वंश: हर्षवर्धन (606 – 647 ई.)
A. प्रारंभिक जीवन, राजधानियां एवं उपाधियां
- राजधानी: हर्षवर्धन ने अपनी प्रथम राजधानी थानेश्वर (हरियाणा) को बनाया और अपनी दूसरी राजधानी कन्नौज (UP) को बनाया।
- उपाधि: परम सौगात, शिलादित्य, और परमेश्वर।
- अन्य नाम: साहित्यक सम्राट, साक्षात् वाणी विलास।
- भविष्यवाणी: ‘तारक’ नामक ऋषि ने हर्षवर्धन के बारे में भविष्यवाणी की थी कि यह आगे चलकर महान चक्रवर्ती सम्राट बनेंगे।
- हर्षवर्धन ने अपना पूरा जीवन अपने मामा ‘भांडी’ के यहाँ बिताया था।
- हर्षवर्धन को शस्त्र विद्या का ज्ञान था और वह एक कुशल नाटककार, वीणावादक एवं सुलेखक था।
पारिवारिक संघर्ष एवं प्रमुख घटनाएं
- इनके भाई राज्यवर्धन के मरने की सूचना ‘कुंतल’ नामक घुड़सवार ने दी थी।
- हर्षवर्धन ने शशांक एवं देवगुप्त की हत्या की थी।
- इनकी बहन ‘राज्यश्री’ विंध्यांचल पहाड़ी की तरफ आत्महत्या करने जा रही थी, इस बात की सूचना हर्षवर्धन को ‘दिवाकर मित्र’ नामक पंडित ने दी थी।
- नर्मदा का युद्ध: 629 ई. में नर्मदा नदी के किनारे चालुक्य वंश के राजा पुलकेशिन II ने हर्षवर्धन को हराया था।
B. हर्षवर्धन के समकालीन राजा
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| राज्य / वंश | समकालीन राजा का नाम |
|---|---|
| मगध | पूर्ण वर्मा |
| कश्मीर | दुर्लभ वर्धन |
| बंगाल | ध्रुव सेन |
| असम | भास्कर वर्मन |
| नेपाल | अंशु वर्मन |
| पल्लव वंश | महेन्द्र वर्मन |
| चालुक्य वंश | पुलकेशिन II |
C. चीनी यात्री ह्वेनसांग एवं नालंदा विश्वविद्यालय
- हर्षवर्धन के शासनकाल में ह्वेनसांग नामक चीनी यात्री भारत आया (629 ई. में भारत आया और 645 ई. में भारत से चला गया)।
- भारत आने का उद्देश्य: नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म का अध्ययन करना और बौद्ध ग्रंथों को अपने साथ ले जाना।
- ह्वेनसांग के उपनाम: यात्रियों का राजकुमार, नीतियों का पंडित, और वर्तमान शाक्यमुनि।
नालंदा विश्वविद्यालय का विवरण
- नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में सबसे पहला विवरण ह्वेनसांग ने ही दिया।
- इसके अनुसार, नालंदा में 10,000 छात्रों को पढ़ाने के लिए 1,000 शिक्षक मौजूद थे।
- उस समय नालंदा विश्वविद्यालय के आचार्य ‘शीलभद्र’ थे।
- नालंदा विश्वविद्यालय का खर्च उठाने के लिए हर्षवर्धन ने 200 गाँव दान में दिए थे।
D. दरबारी कवि बाणभट्ट एवं साहित्यिक रचनाएं
- बाणभट्ट बिहार में प्रीतिकुट के निवासी थे और शैव धर्म के अनुयायी थे।
- बाणभट्ट के गुरु का नाम ‘भुरचु’ था।
- हर्षवर्धन से बाणभट्ट की मुलाकात अचिरावती नदी के किनारे हुई थी।
बाणभट्ट की प्रमुख रचनाएं (संस्कृत भाषा में)
- हर्षचरित: इसमें कुल 8 अध्याय हैं, जिन्हें ‘उच्छ्वास’ कहा जाता है। प्रथम 3 अध्याय में बाणभट्ट की आत्मकथा है, और बाकी 5 अध्याय में हर्षवर्धन की जीवनी है।
- कादंबरी: इसे दुनिया का पहला उपन्यास माना जाता है। कादंबरी पूरा नहीं होने पर इसको उनके बेटे ‘भूषण भट्ट’ ने पूरा किया था।
- अन्य रचनाएं: चंडी शतक और पार्वती परिणय।
हर्षवर्धन द्वारा रचित 3 प्रमुख नाटक
- नागानंद
- रत्नावली
- प्रियदर्शिका
नोट: हर्षवर्धन ने अपने इन नाटकों का मंचन भी करवाया था।
E. प्रमुख धार्मिक आयोजन एवं महत्वपूर्ण तथ्य
कन्नौज की पांचवीं बौद्ध संगीति (643 ई.)
- हर्षवर्धन ने कन्नौज में ‘पाँचवीं बौद्ध संगीति’ का आयोजन किया था (समय: 643 ई.)।
- इसकी अध्यक्षता ह्वेनसांग ने की थी।
- इसमें 3000 बौद्ध साधु, 3000 जैन साधु, 1000 नालंदा वि.वि. के शिक्षक, और 500 ब्राह्मणों को बुलाया गया था।
प्रयाग का महामोक्षपरिषद (644 ई.)
- प्रयाग में हर्षवर्धन ने ‘महामोक्षपरिषद’ का आयोजन करवाया (समय: 644 ई.)।
- यह प्रत्येक 5 साल पर बुलाया जाता था और इसमें 18 देशों के राजाओं ने भाग लिया था।
- इसमें शिव, सूर्य, बुद्ध, और अग्नि की पूजा की गई थी।
परीक्षा उपयोगी वन-लाइनर तथ्य
- हर्षवर्धन के समय की सूचना कल्हण की पुस्तक ‘राजतरंगिणी’ में मिलती है।
- हर्षवर्धन के समय सूती वस्त्र उत्पादन का प्रमुख केंद्र मथुरा था।
- रेशमी/ऊनी वस्त्र उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनारस था।
- ‘हर्षचरित’ ग्रंथ का अंग्रेजी अनुवाद केबल एवं थामसन (Cowell & Thomas) के द्वारा किया गया।
- ‘हर्षचरित’ ग्रंथ पर छोटा रूप/टीका आदि शंकराचार्य महाराज ने लिखा था।