दिल्ली दरबार तथा हार्डिंग बम काण्ड
कारण: जब-जब ब्रिटेन में गद्दी के शासक बदलते थे, तो उनके सम्मान में भारत में एक शाही आयोजन होता था।
शुरुआत: 1877 में लॉर्ड लिटन ने इसकी शुरुआत की थी।
A. भारत में आयोजित तीन दिल्ली दरबार
भारत में कुल 3 बार दिल्ली दरबार आयोजित हुआ:
- प्रथम: 1877 में – लॉर्ड लिटन के समय।
- द्वितीय: 1903 में – लॉर्ड कर्जन के समय।
- तृतीय: 1911 में – लॉर्ड हार्डिंग II के समय।
विशेष तथ्य: 1911 का दिल्ली दरबार एकमात्र आयोजन था जिसमें स्वयं ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम एवं महारानी मैरी शामिल हुए थे।
B. 1911 के दिल्ली दरबार की ऐतिहासिक घोषणाएँ
सम्राट ने 12 Dec 1911 को निम्नलिखित महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं:
1. बंगाल विभाजन रद्द एवं राज्यों का पुनर्गठन
- जॉर्ज अरुंडेल समिति की अनुशंसा पर बंगाल विभाजन को रद्द कर दिया गया।
- बंगाल का पुनर्गठन: बंगाल से अलग करके ‘बिहार’ का निर्माण किया गया।
- बिहार के गठन की घोषणा 12 Dec 1911 को हुई और यह 22 मार्च 1912 को लागू हुआ। (नोट: 2010 से नीतीश कुमार द्वारा 22 मार्च को ‘बिहार दिवस’ के रूप में मनाना शुरू हुआ)।
- बाद में बिहार से उड़ीसा (1 April 1936) और झारखण्ड (15 Nov 2000) को अलग किया गया।
2. राजधानी का स्थानांतरण
- भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया।
- घोषणा: 12 Dec 1911।
- लागू: 1 April 1912।
- आगे चलकर 1931 में दिल्ली से ‘नई दिल्ली’ को राजधानी बनाया गया।
C. हार्डिंग बम काण्ड (1912)
- पृष्ठभूमि एवं कारण: भारत में राजधानी का कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरण होने पर क्रांतिकारियों में भारी गुस्सा था।
- योजना: रास बिहारी बोस ने लॉर्ड हार्डिंग की हत्या की योजना बनाई (इस घटना के बाद वे जापान भाग गये)।
- घटना: 23 Dec 1912 को दिल्ली के चाँदनी चौक से लॉर्ड हार्डिंग II की बग्घी गुजर रही थी, तभी उन पर बम/गोली चलाई गई।
- परिणाम: इस जानलेवा हमले में लॉर्ड हार्डिंग बच गया।
D. मुकदमा, गद्दारी और फाँसी
हार्डिंग के बच निकलने के बाद अंग्रेजों ने दमनात्मक कार्रवाई शुरू की:
- इस मामले में 34 लोगों पर मुकदमा चलाया गया और 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- अपनों ने गद्दारी की: दीनानाथ नाम का व्यक्ति अंग्रेजों का सरकारी गवाह बन गया।
- कुल 4 लोगों को इस मामले में फाँसी की सजा दी गई।
🌟 हार्डिंग बम काण्ड में फाँसी पाने वाले 4 क्रांतिकारी
- मास्टर अमीर चंद
- बसंत विश्वास
- बाल मुकुंद
- अवध बिहारी