सविनय अवज्ञा आंदोलन एवं दांडी मार्च (1930)
शाब्दिक अर्थ (सविनय + अवज्ञा): ‘सविनय’ का अर्थ है विनम्रता और ‘अवज्ञा’ का अर्थ है कानूनों का पालन नहीं करना या अंग्रेजों के द्वारा बनाये गए नियमों की अवहेलना करना।
A. आंदोलन की पृष्ठभूमि (Background)
इस ऐतिहासिक आंदोलन के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण और घटनाक्रम थे:
- साइमन कमीशन की असफलता।
- नेहरू रिपोर्ट का अस्वीकार होना।
- मोहम्मद अली जिन्ना की 14 सूत्रीय मांग।
- 1929 का लाहौर अधिवेशन: इस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी, जिसे ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकार न करने पर सविनय अवज्ञा आंदोलन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
B. महात्मा गांधी की 11 सूत्रीय मांगें
26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वतंत्रता दिवस मनाने के बाद, महात्मा गांधी ने 30 जनवरी 1930 को ‘यंग इंडिया’ (Young India) पत्रिका में एक लेख लिखा। इस समय भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन थे। गांधी जी ने लॉर्ड इरविन के समक्ष अपनी 11 सूत्रीय मांगें रखीं और चेतावनी दी कि अगर इन्हें नहीं माना गया तो हम सविनय अवज्ञा आंदोलन करेंगे!
| सामान्य हितों से (6 मांगें) | पूंजीपति वर्ग से (3 मांगें) | कृषक वर्ग से (2 मांगें) |
|---|---|---|
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1. शस्त्र कानून में परिवर्तन हो और लाइसेंस निर्गत हों。 2. सेना पर व्यय 50% कम हो。 3. मादक पदार्थों की बिक्री पर पूर्णतः रोक लगे。 4. डाक आरक्षण बिल लाया जाये。 5. राजनैतिक कैदियों को जेल से रिहा करें。 6. गुप्तचर विभाग पर सार्वजनिक नियंत्रण हो। |
1. विदेशी कपड़ों पर आयात शुल्क लगाया जाये。 2. तटकर विधेयक पारित हो。 3. रुपये का विनिमय दर कम हो। |
1. भू-राजस्व को 50% कम किया जाये。 2. नमक कर को समाप्त कर दिया जाये। |
C. आंदोलन के लिए ‘नमक कर’ को ही क्यों चुना गया?
जब आंदोलन की तैयारी हो रही थी, तो सरदार पटेल का मानना था कि भू-राजस्व का विरोध किया जाए, जबकि महात्मा गांधी नमक कर का विरोध करना चाहते थे। अंततः नमक कर को चुनने के प्रमुख कारण थे:
- इससे तटीय क्षेत्र के लोग सीधे जुड़ते और यह रोजगार विहीन लोगों से जुड़ा मुद्दा था।
- नमक पर अंग्रेजों का एकाधिकार स्थापित था (नमक कर एक्ट – 1882 के तहत)।
- अंग्रेजों के कुल राजस्व का 8.5% हिस्सा सिर्फ नमक कर से आता था।
- अत्यधिक कर (Tax): उस समय 1 मन नमक की वास्तविक कीमत 0.25 रुपये थी, जिस पर 1.25 रुपये का टैक्स लगता था।
- सर्वव्यापकता: नमक हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, अमीर और गरीब सभी की थाली में मौजूद होता है।
🌟 महात्मा गांधी का अल्टीमेटम और कथन
गांधी जी ने लॉर्ड इरविन को 2 मार्च 1930 को चिट्ठी लिखी, पर इरविन ने मिलने से मना कर दिया और पुलिस को दमनात्मक कार्यवाही का आदेश दिया। इस पर गांधी जी ने निराश होकर कहा था:
“मैंने रोटी माँगी थी, बदले में मुझे पत्थर मिला।”
D. दांडी यात्रा (Dandi March) का ऐतिहासिक सफर
- तिथि: 12 मार्च 1930 से 6 अप्रैल 1930 तक।
- मार्ग: साबरमती आश्रम से गुजरात के नौसारी जिले में स्थित ‘दांडी’ तक।
- दूरी व समय: लगभग 240/241 मील (385 km) की यह पदयात्रा 24 दिनों में पूरी हुई।
- पदयात्री: महात्मा गांधी सहित कुल 79 लोग (78 अनुयायी + 1 गांधी जी)।
- विशेष: यह महात्मा गांधी की भारत में पहली आधिकारिक पदयात्रा थी।
- बिहार का प्रतिनिधित्व: इस यात्रा में बिहार के गिरिवरधारी चौधरी भी शामिल थे (जिन्हें दरभंगा जिले के ‘मैथिल गाँधी’ के नाम से जाना जाता था)।
E. नमक कानून तोड़ना और गांधी जी का संबोधन
- 12 मार्च 1930: साबरमती से दांडी के लिए निकले।
- 5 अप्रैल 1930: गांधी जी दांडी पहुँचे।
- 6 अप्रैल 1930: गांधी जी ने दांडी के तट पर नमक बनाकर नमक कानून को तोड़ दिया।
महात्मा गांधी का संबोधन एवं आह्वान:
- जो जहाँ हैं, वहीं से नमक कानून का विरोध करें।
- आंदोलन के दौरान पूर्णतः अहिंसक रहें।
- अंग्रेजों के साथ असहयोग एवं कानूनों/नियमों की सविनय अवज्ञा करें।
- महिलाएँ मादक पदार्थों की दुकानों के बाहर शांतिपूर्ण धरना दें।
- विदेशी उपाधियों का त्याग करें।
F. सविनय अवज्ञा आंदोलन का क्षेत्रीय प्रसार (Regional Spread)
नमक कानून टूटते ही यह आंदोलन पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में फैल गया:
| क्षेत्र | नेतृत्वकर्ता / आंदोलन का रूप |
|---|---|
| पश्चिमोत्तर भारत | खान अब्दुल गफ्फार खान ने ‘खुदाई खिदमतगार’ (लाल कुर्ती आंदोलन) चलाया। (अन्य नाम: सीमांत गाँधी, फ्रंटियर गाँधी, बादशाह खान, फख्र-ए-अफगान)। |
| दक्षिण भारत | त्रिचिनापल्ली से वेदारण्यम तक सी. राजगोपालाचारी ने नमक यात्रा की। |
| मालाबार (केरल) | कालीकट से पेन्नूर तक के. केलप्पन और के. माधवन ने पदयात्रा की। |
| बिहार | मुंगेर और पश्चिमी चंपारण के इलाकों में चौकीदारी कर का पुरजोर विरोध किया गया। |
| मध्य प्रांत और आंध्र | यहाँ के लोगों ने वन कानूनों का उल्लंघन किया। |
| असम | यहाँ आंदोलन का नेतृत्व तरुण राम फुकन ने किया। |
| नागालैंड और मणिपुर | नागालैंड में जदोनांग और मणिपुर में रानी गाइडिन्ल्यू ने नेतृत्व किया (इन्हें ‘रानी’ की उपाधि जवाहर लाल नेहरू ने दी थी)। |
| गुजरात | यहाँ ‘कर नहीं देने’ का आंदोलन चलाया गया। |
G. महात्मा गांधी की गिरफ़्तारी और धरसना सत्याग्रह
- गांधी जी की गिरफ़्तारी: विरोध तेज होने पर ब्रिटिश सरकार ने 5 मई 1930 को महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें पूना की यरवदा जेल में भेज दिया।
- धरसना फैक्टरी आंदोलन: गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद बॉम्बे प्रांत के धरसना में आंदोलन तेज हो गया।
- नेतृत्व: इस धरसना आंदोलन का नेतृत्व सरोजिनी नायडू, इमाम साहब और गांधी जी के पुत्र मणिलाल ने किया।
- पुलिस की बर्बरता: यहाँ शांतिपूर्ण सत्याग्रहियों पर पुलिस ने बहुत ही निर्ममता से लाठियां बरसाईं और उन्हें पीटा।
💡 वेब मिलर (Webb Miller) की रिपोर्ट
इस धरसना सत्याग्रह को कवर करने वाले अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर थे, जो ‘New Freeman’ पत्रिका के लिए काम करते थे। उन्होंने इस क्रूरता को देखकर लिखा था:
“आज तक मैंने अपनी ज़िंदगी में ऐसी दर्दनाक घटना नहीं देखी।”