बंगाल विभाजन और स्वदेशी आन्दोलन (1905)

तत्कालीन वायसराय: लॉर्ड कर्जन (1899-1905)
बंगाल प्रांत में शामिल क्षेत्र: बंगाल, झारखण्ड, बिहार, उड़ीसा, बांग्लादेश, द० असम
कुल क्षेत्रफल: 1,89,000 वर्ग मील (भारत में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा प्रांत)
विभाजन का मुख्य उद्देश्य: ‘फूट डालो और राज करो’ के तहत राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करना

A. बंगाल की पृष्ठभूमि और जनगणना (1901 के अनुसार)

  • जनगणना का इतिहास: पहली बार जनगणना 1872 में (लॉर्ड मेयो के समय) और दशकीय जनगणना 1881 में (लॉर्ड रिपन के समय) शुरू हुई थी।
  • आबादी का अनुपात: 1901 के अनुसार बंगाल की आबादी (7.8 करोड़), भारत की कुल आबादी (25.4 करोड़) का 25% थी।
  • मुसलमानों की संख्या पूरे भारत में सबसे ज्यादा बंगाल में थी।
  • बंगाल उस समय क्रांतिकारियों और राष्ट्रवादियों का सबसे बड़ा गढ़ था।
  • सबसे ज्यादा राजस्व (Revenue) की प्राप्ति भी बंगाल से ही होती थी।

B. विभाजन का प्रस्ताव और कारण

  • 3 Dec 1903: गृह सचिव हार्वट रिजले ने विभाजन का प्रस्ताव पेश किया।
  • बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर एंड्रयू फ्रेजर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
  • प्रस्ताव लॉर्ड कर्जन द्वारा पारित हुआ लेकिन तुरंत लागू नहीं हुआ।
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विभाजन के वास्तविक कारण प्रशासनिक कारण (कर्जन का तर्क)
1. राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करना
2. राष्ट्रवाद को कमजोर करना
3. क्रांतिकारियों का दमन
लॉर्ड कर्जन ने कहा: “मैं विभाजन के द्वारा विरोधियों के संगठित समूह को तोड़ना चाहता हूँ। अविभाजित बंगाल एक महाशक्ति है, जिसे विभाजन के द्वारा खण्डित कर दिया जायेगा।”

C. विभाजन का स्वरूप (धार्मिक और भाषाई आधार)

बंगाल के 1,89,000 वर्ग मील क्षेत्रफल को दो भागों में बांटा गया:

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पश्चिमी बंगाल (हिन्दू बहुल क्षेत्र) पूर्वी बंगाल (मुस्लिम बहुल प्रांत)
राजधानी: कलकत्ता
कुल जनसंख्या: 5.4 करोड़
धार्मिक आधार: 4.2 करोड़ हिन्दू, 90 लाख मुसलमान
भाषाई आधार: 3.7 करोड़ हिंदी/उड़िया बोलने वाले और 1.7 करोड़ बंगाली बोलने वाले
परिणाम: खुद बंगाल में बंगाली बोलने वाले अल्पसंख्यक हो गए।
राजधानी: ढाका
कुल जनसंख्या: 3.1 करोड़
धार्मिक आधार: 1.8 करोड़ मुस्लिम, 1.2 करोड़ हिन्दू
लेफ्टिनेंट गवर्नर: बूमफुल्ड फुल्लर

D. महत्वपूर्ण तिथियाँ (VVI)

  • 19 July 1905: विभाजन का प्रस्ताव पेश किया गया।
  • 20 July 1905: प्रस्ताव पारित हुआ।
  • 7 Aug 1905: कलकत्ता में टाउन हॉल की बैठक हुई और राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। सुरेन्द्र नाथ बनर्जी के नेतृत्व में इसी दिन से स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन की शुरुआत हुई
  • 16 Oct 1905: बंगाल विभाजन पूरी तरह प्रभावी हुआ।

🌟 16 अक्टूबर 1905 (विभाजन के दिन) को मनाये गए दिवस

  • शोक दिवस
  • जन एकता दिवस
  • मैत्री दिवस
  • रक्षा बंधन दिवस: रविन्द्रनाथ टैगोर के कहने पर। हिन्दू-मुस्लिमों ने हुगली नदी में डुबकी लगाई और एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।

E. विभाजन से जुड़े महत्वपूर्ण कथन

  • गोपाल कृष्ण गोखले: “बंगाल विभाजन हमारे घाव पर नमक की तरह है।” / “बंगाल विभाजन एक निर्मम भूल है।”
  • सुरेन्द्र नाथ बनर्जी: “बंगाल विभाजन हमारे ऊपर वज्र/बम की तरह गिरा है।”
  • महात्मा गाँधी: “भारत का वास्तविक जागरण बंगाल विभाजन के बाद हुआ है।”
  • बूमफुल्ड फुल्लर: “भारत में मेरी दो पत्नियाँ हैं, मुस्लिम बेगम मुझे बेहद प्रिय है।”
  • हार्वट रिजले: “संयुक्त बंगाल एक महाशक्ति है। विभाजित बंगाल कई रास्तों पर चलेगा।”

F. स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन

20 July 1905 को बंग-भंग प्रस्ताव पारित होने के बाद बंगाल में व्यापक विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ, जिसके जवाब में अंग्रेजों ने दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी। लोगों ने जनसभाएं कीं, पर्चे बांटे और रैलियां निकालीं। सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने पहली रैली की जिसमें लगभग 50,000 लोग शामिल हुए!

  • उद्देश्य: बंग-भंग का फैसला वापस हो और अंग्रेजों पर दबाव बनाया जाए।
  • नेतृत्व: सुरेन्द्र नाथ बनर्जी। (अन्य नेता: रविन्द्र नाथ टैगोर, पृथ्वीश चन्द्र राय)।
  • बहिष्कार की पहली चर्चा: कृष्ण कुमार मित्रा की पत्रिका ‘संजीवनी’ में पहली बार बहिष्कार की चर्चा की गई थी।

आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम (बहिष्कार)

  • विदेशी वस्तुओं और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार।
  • शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरी का पूर्ण रूप से बहिष्कार।
  • सरकारी उपाधियों एवं अदालतों का बहिष्कार।
  • विशाल विरोध प्रदर्शन एवं जनसभाओं का आयोजन।
  • मादक पदार्थों की दुकान के बाहर महिलाओं के द्वारा धरना देना।

G. रचनात्मक कार्य एवं क्षेत्रीय नेतृत्व

बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों पर भी जोर दिया गया, जैसे – लघु, कुटीर एवं हथकरघा उद्योग स्थापित करना, राष्ट्रीय शिक्षा पद्धति अपनाना और सामाजिक सुधार के कार्यक्रम चलाना!

💡 आंदोलन का क्षेत्रीय नेतृत्व

  • बंगाल: सुरेन्द्र नाथ बनर्जी
  • पंजाब: अजित सिंह, लाला लाजपत राय
  • बाम्बे: बाल गंगाधर तिलक
  • दिल्ली: सैयद हैदर रजा
  • मद्रास: चिदंबरम पिल्लई, विपिन चंद्र पाल
  • संयुक्त प्रांत: लाला लाजपत राय

H. राष्ट्रीय शिक्षा एवं अन्य महत्वपूर्ण तथ्य (VVI Points)

  • राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना सर गुरुदास बनर्जी द्वारा की गई।
  • बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना हुई, जिसके प्रिंसिपल अरबिंदो घोष बने।
  • बंगाल में रंगपुर नेशनल कॉलेज की स्थापना की गई।
  • मद्रास में पचैयप्पा राष्ट्रीय कॉलेज और पंजाब में दयानंद एंग्लो कॉलेज खोले गए।
  • बंगाल ओरिएंटल कॉलेज ऑफ आर्ट्स: इसकी स्थापना अवनिन्द्र नाथ टैगोर ने की (यहाँ पहली छात्रवृत्ति नंदलाल बोस को मिली)।
  • बंगाल केमिकल की स्थापना P.C. राय ने की।
  • वंदे मातरम: राष्ट्रवादियों द्वारा इस आंदोलन के दौरान प्रमुखता से गाया गया।
  • आमार सोनार बांग्ला: रविन्द्र नाथ टैगोर ने इसी आंदोलन के दौरान यह प्रसिद्ध गीत लिखा।

I. आंदोलन की असफलता के कारण

निष्कर्ष/नोट: इतना कुछ करने और व्यापक जनसमर्थन के बाद भी यह आंदोलन पूरी तरह सफल नहीं हो सका।
  • कुशल नेतृत्व की कमी।
  • कांग्रेस में संगठन का अभाव एवं नेताओं में आपसी मतभेद।
  • राष्ट्रीय एकता की कमी।
  • अंग्रेजों का बेहद कठिन और क्रूर दमन चक्र।