11. भारत के वन (Forests of India)
न्यूनतम वन आवरण: राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार पारिस्थितिक सन्तुलन और पर्यावरण की दृष्टि से देश के कम-से-कम 33% क्षेत्र (सम्पूर्ण भूमि का 33%) पर वनों का आवरण आवश्यक है।
वर्तमान स्थिति: देश के कुल क्षेत्रफल के 24.62% भू-भाग पर वनों का आवरण है। भारत में अधिकांश वन-सम्पदा का मालिक राज्य है।
A. प्रमुख वन एवं पर्यावरण संस्थान (Forest Institutes)
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| संस्थान / कार्यालय | स्थान (मुख्यालय) |
|---|---|
| भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग | देहरादून (उत्तराखण्ड) |
| वन अनुसंधान संस्थान (Forest Research Institute) | देहरादून (उत्तराखण्ड) |
| राष्ट्रीय पर्यावरण शोध संस्थान (NERI) | नागपुर (महाराष्ट्र) |
| इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट | भोपाल (स्थापना: 1981 ई.) |
B. भारत में वनों का वितरण एवं प्रकार
- सर्वाधिक वन आवरण: वन रिपोर्ट सर्वेक्षण 2021 के अनुसार भारत में मध्य प्रदेश राज्य में वन आवरण का सबसे बड़ा क्षेत्र है। साथ ही, घने पतझड़ वाले जंगल से घिरा सर्वाधिक क्षेत्र भी मध्य प्रदेश में है।
- सबसे कम वन विस्तार: भारत में हरियाणा राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के सबसे कम भाग पर वनों का विस्तार पाया जाता है।
- अति सघन वन: भारत में अति सघन वनों का सर्वाधिक क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है।
- सर्वाधिक वृक्षाच्छादित क्षेत्र: भारत में सर्वाधिक वृक्षाच्छादित क्षेत्र पूर्वी डेक्कन में है।
- सर्वाधिक प्रकार के वन: देश के सर्वाधिक क्षेत्रफल पर उष्णार्द्र पतझड़ वन पाये जाते हैं।
- उष्णकटिबंधीय वर्षा वन: भारत में इनकी उपस्थिति असम और केरल में है।
🌿 मैंग्रोव वन (Mangrove Forests)
- दलदली अथवा ज्वार-भाटा क्षेत्रों में पाये जाने वाले वन को मैंग्रोव वन कहा जाता है।
- भारत में मैंग्रोव वनस्पति मुख्यत: सुन्दरवन (प. बंगाल) में पायी जाती है, जो कि इसका सर्वाधिक विस्तार है।
- गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टाई क्षेत्रों में ‘सुन्दरी’ वृक्ष की अधिकता के कारण इसे ‘सुन्दरवन’ कहा जाता है। इसे वैश्विक विरासत का वन माना जाता है।
- भारत में मैंग्रोव का दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र गुजरात तट के सहारे पाया जाता है।
- प्रमुख मैंग्रोव क्षेत्र: सुन्दरवन (पश्चिम बंगाल), भितरकनिका (ओडिशा), पिचवरम (तमिलनाडु)।
C. वृक्ष, उनके उत्पाद एवं वनस्पति
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| वृक्ष / उत्पाद | स्थान / राज्य / विशेषता |
|---|---|
| चन्दन की लकड़ी | कर्नाटक (नीलगिरि की पहाड़ियों में सबसे अधिक) |
| टीक (सागौन) | मध्य प्रदेश (नीलगिरि पहाड़ियों की सामान्य जाति) |
| कत्था (Katha) | खैर की लकड़ी से बनाया जाता है |
| तेंदु पत्ता (Beedi leaf) | मुख्य उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश है |
| शहतूत रेशम | उत्पादक राज्य कर्नाटक है |
| भोजपत्र वृक्ष | हिमालय में मिलता है |
| लीसा (Leesa) | चीड़ के वृक्ष से प्राप्त होता है |
| सागौन तथा साल | ये उष्ण कटिबन्धीय शुष्क पतझड़ी वन के उत्पाद हैं |
| खेजरी (Khejri) | यह सामाजिक वानिकी में प्रयुक्त बहुउद्देशीय वृक्ष का एक उदाहरण है |
D. विविध वन तथ्य एवं पर्यावरण आंदोलन (VVI)
- वन महोत्सव: भारत में वृक्षारोपण उत्सव ‘वन महोत्सव’ के जन्मदाता के. एम. मुंशी हैं। यह जुलाई के प्रथम सप्ताह में मनाया जाता है। वनरोपण प्रक्रिया ‘और पेड़ लगाने की’ है।
- चिपको आन्दोलन: इस आन्दोलन का सम्बन्ध ‘वनों को काटने से रोकने से’ है। यह आन्दोलन सुन्दरलाल बहुगुणा ने चलाया था।
- साइलेन्ट वैली (Silent Valley): केरल में स्थित ‘शान्त-घाटी’ (Silent Valley) के चर्चित होने का कारण वहाँ की जैव विविधता एवं सदाबहार वन का संरक्षण है।
- फूलों की घाटी (Valley of Flowers): यह उत्तराखण्ड में स्थित है।
- जैव विविधता ताप स्थल (Hotspots): भारत में जैव विविधता के ताप स्थल पूर्वी हिमालय व पश्चिमी घाट हैं। पश्चिमी घाट पर पायी जाने वाली वनस्पति ‘सदाहरित’ प्रकार की है।
- उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन: ये वन नीलगिरि पहाड़ियों पर पाये जाते हैं।
- आरक्षित अवरुद्ध वन: लम्बी जड़ों और नुकीले काँटों अथवा शूलयुक्त झाड़ियों और लघु वृक्षों वाले आरक्षित अवरुद्ध वन सामान्य रूप से पश्चिमी आन्ध्र प्रदेश में पाए जाते हैं।
- ऑरिक्स और चीरू में अन्तर: एन्टिलोपों ‘ऑरिक्स’ गर्म और शुष्क क्षेत्रों में रहने के लिए अनुकूलित है, जबकि ‘चीरू’ ठंडे उच्च पर्वतीय घास के मैदान और अर्द्ध मरुस्थली क्षेत्रों में रहने के लिए अनुकूलित है।
- पश्चिमी हिमालय के संसाधन: पश्चिमी हिमालय संसाधन प्रदेश के प्रमुख संसाधन वन हैं।