1857 की महान क्रांति (The Revolt of 1857)
शुरुआत: 10 मई 1857 को मेरठ से।
गवर्नर जनरल: विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग था।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री: उस समय ब्रिटेन के PM लॉर्ड पामर्स्टन थे।
क्रांति का प्रतीक: कमल एवं चपाती (रोटी)।
A. क्रांति की शुरुआत और मंगल पाण्डे का बलिदान
- एनफील्ड राइफल: अंग्रेजी भारतीय सेना में चर्बी वाले कारतूसों से चलने वाली ‘एनफील्ड राइफल’ दिसम्बर 1856 में शामिल की गई थी।
- मंगल पाण्डे: वह पहला भारतीय सिपाही जिसने चर्बी वाले कारतूस का प्रयोग करने से इंकार कर दिया, वह मंगल पाण्डे था।
- वर्ष 1857 के विद्रोह में सबसे पहले अपना बलिदान मंगल पाण्डे ने ही दिया था।
- बैरकपुर छावनी: मंगल पाण्डे बैरकपुर (प. बंगाल) के विप्लव से जुड़े थे। उस समय वहां का ब्रिटिश कमांडिंग ऑफिसर हैरसे था।
- मंगल पाण्डे 34वीं नेटिव इन्फेंट्री (34th Bengal Native Infantry) के सिपाही थे।
- फाँसी: मंगल पाण्डे को 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दी गई थी।
B. प्रमुख केंद्र और उनके नेतृत्वकर्ता (VVI)
↔️ टेबल को दायें-बायें खिसकाएं
| क्रांति का केंद्र | भारतीय नेतृत्वकर्ता |
|---|---|
| कानपुर | नाना साहब (इनके ‘कमांडर इन चीफ’ तात्या टोपे थे और सलाहकार अजीमुल्ला खाँ थे) |
| लखनऊ (अवध) | बेगम हजरत महल (बेगम ऑफ अवध) |
| बिहार (जगदीशपुर) | कुँवर सिंह |
| बरेली | खान बहादुर |
| इलाहाबाद | लियाकत अली |
| दिल्ली | बख्त खाँ (सैन्य-नेतृत्व) |
सर्वाधिक सिपाही: 1857 के संघर्ष में भाग लेने वाले सिपाहियों की सर्वाधिक संख्या अवध से थी।
C. महत्वपूर्ण क्रांतिकारी और उनसे जुड़े विशेष तथ्य
1. महारानी लक्ष्मीबाई
- रानी लक्ष्मीबाई का मूल नाम मणिकर्णिका था।
- इनका जन्म 19 नवम्बर 1835 को गोलघर, वाराणसी में हुआ था।
- इनकी समाधि ग्वालियर में स्थित है।
- अंतिम युद्ध में इन्हें ब्रिटिश अधिकारी ह्यूरोज का सामना करना पड़ा था।
2. तात्या टोपे
- तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचन्द्र पांडुरंग था।
- इन्हें इनके एक मित्र ने धोखा दिया था, जिसके बाद अंग्रेजों द्वारा इन्हें बंदी बनाकर मार दिया गया।
3. बहादुर शाह जफर (द्वितीय)
- विद्रोह के दौरान बहादुर शाह ने बख्त खाँ को ‘साहब-ए-आलम बहादुर’ का खिताब दिया था।
- किसे विद्रोह की ‘सबसे कमजोर कड़ी’ के रूप में देखा जाता है? उत्तर: बहादुरशाह।
- असफलता के बाद मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को रंगून निर्वासित कर दिया गया था।
D. क्रांति के परिणाम, असफलता और ब्रिटिश नीतियां
- असफलता का कारण: 1857 का विद्रोह मुख्यतः किसी सामान्य योजना और केन्द्रीय संगठन की कमी के कारण असफल रहा।
- किसने भाग नहीं लिया: भारत के शिक्षित मध्यम वर्ग ने इस क्रांति में तटस्थता बनाए रखी (तटस्थ रहे)। इसके अलावा साहूकार और जमींदार वर्ग ने भी इसमें भाग नहीं लिया।
- अंग्रेजों की सहायता: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में ग्वालियर के सिंधिया राजवंश ने अंग्रेजों की सर्वाधिक सहायता की थी। जातीय आधार पर सिख, गोरखा और पठान ने अंग्रेजों का सहयोग किया था।
- आपातकालीन मुख्यालय: लॉर्ड कैनिंग ने इलाहाबाद को आपातकालीन मुख्यालय बनाया था।
- पील आयोग: विद्रोह दमन के बाद भारतीय फौज के नवसंगठन के लिए पील आयोग (Peel Commission) का गठन किया गया।
- सत्ता का हस्तांतरण: इस घटना के बाद शासन ईस्ट इंडिया कम्पनी के हाथों से निकलकर ब्रिटिश सम्राट (ताज) के हाथों में आ गया। गवर्नर जनरल का पद समाप्त कर ‘वायसराय’ का पद बनाया गया।
- विक्टोरिया की घोषणा: 1 नवम्बर 1858 को महारानी विक्टोरिया ने भारतीय प्रशासन को ब्रिटिश ताज के नियंत्रण में लेने की घोषणा की।
E. 1857 की क्रांति पर इतिहासकारों के प्रमुख कथन
💬 किसने क्या कहा?
- वी. डी. सावरकर: इन्होने इसे “स्वतंत्रता की पहली लड़ाई” कहा और लिखा: “यह विद्रोह भारत की स्वतंत्रता के लिए सुनियोजित युद्ध था”।
- बेंजामिन डिजरायली: इन्होने विद्रोह के तुरंत बाद इसे एक “राष्ट्रीय विद्रोह” की संज्ञा दी।
- जेम्स आउट्रम व डब्ल्यू. टेलर: इन्होने 1857 के विद्रोह को एक ‘षड्यंत्र’ की संज्ञा दी।
- आर. सी. मजूमदार: “तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न प्रथम, न राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था”।
अन्य विविध तथ्य
- भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का सरकारी इतिहासकार एस. एन. सेन था।
- भारतीय भाषा में 1857 के विप्लव के कारणों पर लिखने वाला प्रथम भारतीय सैयद अहमद खाँ था।
- अंग्रेजों का सबसे कट्टर दुश्मन मौलवी अहमदुल्ला शाह था।
- मशहूर उर्दू कवि मिर्जा गालिब ने 1857 के विद्रोह को अपनी आँखों से देखा था।
- विद्रोह की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता हिन्दू-मुस्लिम एकता थी।