अगस्त प्रस्ताव, क्रिप्स मिशन, भारत छोड़ो आंदोलन एवं स्वतंत्रता प्राप्ति

यह कालखंड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और सबसे निर्णायक चरण था। द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत, क्रिप्स मिशन की विफलता और अंततः ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ ने ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिला दीं।

A. अगस्त प्रस्ताव (1940) और व्यक्तिगत सत्याग्रह

  • तिथि और वायसराय: 8 अगस्त 1940 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने यह प्रस्ताव (Offer) पेश किया।
  • प्रस्ताव की शर्तें: WW-II के समाप्त होने के बाद ‘अधिराज्य’ (Dominion) का दर्जा देंगे, वायसराय की कार्यकारी परिषद में भारतीयों को शामिल करेंगे, युद्ध समाप्ति के बाद संविधान निर्मात्री परिषद का गठन करेंगे, और युद्ध सलाहकारी परिषद का गठन करेंगे।
  • परिणाम: कांग्रेस ने इसे Reject कर दिया और ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग की।

व्यक्तिगत सत्याग्रह (17 Oct 1940)

  • शुरुआत: महात्मा गांधी द्वारा 17 अक्टूबर 1940 को ‘पवनार आश्रम’ (महाराष्ट्र) से।
  • उद्देश्य: गांधी जी इस सत्याग्रह के माध्यम से संपूर्ण विश्व को यह संदेश देना चाहते थे कि भारत द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन के साथ नहीं है।
  • प्रमुख सत्याग्रही: प्रथम – विनोबा भावे, द्वितीय – जवाहर लाल नेहरू, तृतीय – ब्रह्म दत्त।

B. क्रिप्स मिशन / प्रस्ताव (1942)

  • उद्देश्य: द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को शामिल करने के लिए।
  • ब्रिटेन के PM: विंस्टन चर्चिल।
  • घोषणा और आगमन: 11 मार्च 1942 को घोषणा हुई, 23 मार्च 1942 को सर स्टैफोर्ड क्रिप्स भारत पहुँचे, और 11 अप्रैल 1942 को वापस गए।
  • क्रिप्स का Offer: युद्ध के बाद डोमिनियन का दर्जा, सभी प्रांतों को मिलाकर ‘भारतीय संघ’ की स्थापना, संविधान निर्मात्री परिषद का गठन, और राष्ट्रमंडल से अलग होने की इजाजत।
  • कांग्रेस के वार्ताकार: मौलाना अबुल कलाम आजाद और जवाहर लाल नेहरू।

💡 क्रिप्स प्रस्ताव पर प्रमुख कथन

  • महात्मा गांधी: “यह डूबते हुए बैंक की उत्तर दिनाँकित चेक है (Post-dated cheque)”।
  • लॉर्ड लिनलिथगो: गांधी के आंदोलन को ‘राजनैतिक फिरौती’ की संज्ञा दी।
  • Cripps Statement (11 April 1942): “गांधीजी आप बातचीत का सारा रास्ता बंद कर रहे हैं”।

C. भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement – 1942)

  • पृष्ठभूमि और कारण: क्रिप्स मिशन की असफलता, द्वितीय विश्व युद्ध से उपजी बेरोजगारी व महँगाई, भारत पर जापानी आक्रमण का डर, और दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रिटिश पराजय से भारतीयों के इच्छाशक्ति में वृद्धि।
  • आदर्श वाक्य और नारा: ‘करो या मरो’ (Do or Die)। ‘भारत छोड़ो’ का नारा यूसुफ मेहर अली ने दिया था।
  • गांधी जी का ऐतिहासिक कथन: “मैं भारत के एक मुट्ठी बालू से कांग्रेस से बड़ा आंदोलन खड़ा कर दूँगा”।

महत्वपूर्ण घटनाक्रम

  • 14 जुलाई 1942: वर्धा में कांग्रेस कार्यकारिणी सभा (CWC) में भारत छोड़ो का प्रस्ताव प्रस्तुत एवं पारित हुआ।
  • 8 अगस्त 1942: बॉम्बे के ‘ग्वालिया टैंक मैदान’ में बैठक हुई और प्रस्ताव अंतिम रूप से पारित हुआ।
  • प्रस्ताव महात्मा गांधी, नेहरू और मौलाना आजाद ने तैयार किया था। इसे नेहरू ने पेश किया, सरदार पटेल ने समर्थन किया और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने पारित करवाया।
  • 9 अगस्त 1942 (Operation Zero Hour): इसके तहत ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर लिया और कांग्रेस को अवैध संस्था घोषित कर दिया।

D. नेताओं की गिरफ़्तारी और भूमिगत आंदोलन

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गिरफ्तार नेता जेल का नाम
महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी, महादेव देसाईआगा खाँ पैलेस (पूना)
जवाहर लाल नेहरू, पट्टाभि सीतारमैय्या, गोविंद बल्लभ पंतअहमदनगर किले में (नेहरू को बाद में अल्मोड़ा जेल भेजा गया)
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. अनुग्रह नारायण सिंहबाँकीपुर जेल (पटना)
मौलाना अबुल कलाम आजादबांकुड़ा जेल
जय प्रकाश नारायणहजारीबाग जेल

भूमिगत आंदोलन और समानांतर सरकारें

  • भूमिगत नेता: जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, उषा मेहता (प्रथम रेडियो ऑपरेटर), अरुणा आसफ अली (आंदोलन के दौरान तिरंगा झंडा फहराया), सुचेता कृपलानी, अच्युत पटवर्धन।
  • समानांतर सरकारें (Parallel Govts): बलिया में (चित्तू पांडे), तामलुक में (सतीश सामंत), सतारा में (वाई. बी. चौहान), और अहमदाबाद में (आजाद सरकार)।
  • भारत की सबसे पहली समानांतर सरकार 1857 में जगदीशपुर में ‘अमर सिंह’ ने बनाई थी।
  • सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र: बिहार (मुंगेर) और संयुक्त प्रांत।

E. आजाद हिंद फौज और शाही नौसेना विद्रोह

  • आजाद हिंद फौज (1942): इसकी स्थापना रास बिहारी बोस ने की थी। इसका विचार सबसे पहले सिंगापुर में कैप्टन मोहन सिंह के मन में आया था। बाद में इसका नेतृत्व सुभाष चन्द्र बोस ने किया।
  • नारे: जय हिंद, दिल्ली चलो, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा (सुभाष चन्द्र बोस)।
  • प्रमुख ब्रिगेड: गांधी ब्रिगेड, रानी लक्ष्मीबाई ब्रिगेड, आजाद सुभाष ब्रिगेड, और नेहरू ब्रिगेड।
  • जापान ने सुभाष चन्द्र बोस को अंडमान एवं निकोबार द्वीप सौंपे, जिनका नाम शहीद द्वीप और स्वराज द्वीप रखा गया।
शाही नौसेना विद्रोह (18 Feb 1946): बॉम्बे के समुद्री तट पर प्रशिक्षण पोत HMIS तलवार पर नौसैनिकों ने खराब भोजन, रंग-भेद और कम वेतन के कारण विद्रोह कर दिया। इसका नेतृत्व M.S. Khan ने किया।

F. कैबिनेट मिशन (1946) और अंतरिम सरकार

  • 14 मार्च 1946: भारत के राजनैतिक और सामाजिक गतिरोध को दूर करने के लिए ब्रिटेन से तीन सदस्यीय टीम भेजी गई।
  • 24 मार्च 1946: मिशन भारत पहुँचा। इसके सदस्य सर पैथिक लॉरेंस (अध्यक्ष), ए. वी. अलेक्जेंडर, और स्टैफोर्ड क्रिप्स थे।
  • मुख्य योजनाएं (16 मई 1946): भारत में ‘संविधान सभा’ का गठन किया जाएगा और तत्काल रूप से एक ‘अंतरिम सरकार’ (Interim Govt) बनाई जाएगी।
  • अंतरिम सरकार का गठन (2 Sep 1946): वायसराय ने जवाहर लाल नेहरू को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया। परिषद के अध्यक्ष वायसराय और उपाध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू बने। 26 अक्टूबर 1946 को इसमें मुस्लिम लीग के 5 सदस्य भी शामिल हुए।

G. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस और भारत का विभाजन (1947)

  • प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (Direct Action Day): जिन्ना पाकिस्तान की मांग को लेकर असंतुष्ट थे, जिसके कारण मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को यह दिवस मनाया।
  • इसके कारण बंगाल (विशेषकर नोआखली) में भीषण दंगे हुए और खून की नदियाँ बह गईं। 1 लाख से अधिक हिन्दुओं की हत्या हुई।
  • महात्मा गांधी के नोआखली पहुँचने पर मामला शांत हुआ। इस पर माउंटबेटन ने गांधी जी को “One man Boundary Force” कहा था।
  • विभाजन की योजना: सरदार पटेल और नेहरू ने विभाजन के लिए सहमति दी। वी. पी. मेनन और लॉर्ड माउंटबेटन ने योजना तैयार की, जिसे 3 जून 1947 को प्रस्तुत किया गया (माउंटबेटन प्लान)।

🇮🇳 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

  • ब्रिटेन की संसद (हाउस ऑफ कॉमन और हाउस ऑफ लॉर्ड) में यह विधेयक जुलाई 1947 में पेश और पारित किया गया।
  • 18 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता विधेयक को शाही मंजूरी मिल गई।
  • सीमा आयोग: भारत-पाकिस्तान के विभाजन के लिए ‘रेडक्लिफ’ की अध्यक्षता में सीमा आयोग की नियुक्ति हुई।
  • 14 अगस्त 1947: पाकिस्तान का निर्माण।
  • 15 अगस्त 1947: भारत की स्वतंत्रता।