खेड़ा सत्याग्रह (1918)
स्थान: गुजरात के खेड़ा जिले में (तत्कालीन बॉम्बे प्रांत)
आंदोलनकारी (शामिल): मुख्य रूप से पाटीदार किसान
स्थानीय नेता: मोहन लाल पांड्या
मुख्य नेतृत्व: महात्मा गाँधी
A. सत्याग्रह की पृष्ठभूमि और प्रमुख कारण
- भीषण अकाल और फसल खराब: खेड़ा में भीषण अकाल पड़ा था, जिसके कारण किसानों की फसल खराब हो गई थी और पैदावार 25% से भी कम रह गई थी।
- महामारी का प्रकोप: 1918 में गुजरात में ‘प्लेग’ महामारी फैल गई थी, जिसमें लगभग 10% लोगों की मृत्यु हो गई थी (आंकड़ों के अनुसार 46,740 मौतें)।
- भू-राजस्व (Tax) का मुद्दा: इतनी भयानक स्थिति के बावजूद, अंग्रेजों ने किसानों की भू-राजस्व माफ करने की मांग को ‘Reject’ (खारिज) कर दिया।
- कर में वृद्धि: किसानों को राहत देने के बजाय, ब्रिटिश सरकार ने उल्टे भू-राजस्व में 23% की वृद्धि कर दी।
💡 अकाल संहिता (Famine Code) क्या थी?
ब्रिटिश शासन के नियमों (अकाल संहिता) के अनुसार: “ब्रिटेन शासित देशों में यदि पिछले वर्ष की तुलना में 25% या उससे कम फसल की पैदावार हुई हो, तो उस वर्ष का भू-राजस्व (Land Revenue) पूरी तरह माफ कर दिया जाता था।”
B. स्थानीय प्रयास एवं गुजरात सभा की भूमिका
- स्थानीय नेता मोहन लाल पांड्या ने नवम्बर 1917 (Nov-1917) में ‘राजस्व रहित अभियान’ शुरू किया था।
- इस प्रयास में शंकर लाल पारिख भी उनके साथ शामिल थे।
- जब अंग्रेजों पर कोई असर नहीं हुआ, तो इन नेताओं ने ‘गुजरात सभा’ से मदद मांगी।
- गुजरात सभा: इसका मुख्यालय अहमदाबाद में था और इसके अध्यक्ष महात्मा गाँधी थे।
C. गाँधी जी का प्रवेश और नाडियाड बैठक
- महात्मा गाँधी फरवरी 1918 (Feb 1918) में इस मामले और आंदोलन से जुड़े।
- 22 मार्च 1918: बढ़ते दबाव के कारण सरकार ने मामले की जाँच के आदेश दिए, लेकिन फिर भी टैक्स (Tax) माफ नहीं किया।
- इसके बाद नाडियाड में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई।
- इस बैठक में गाँधी जी ने किसानों से आह्वान किया कि: “1 वर्ष तक कोई भी कर का भुगतान नहीं करें।”
- किसानों का नेतृत्व करने और कर न देने का आह्वान करने के कारण गाँधी जी को हिरासत में भी लिया गया।
D. आंदोलन के महत्वपूर्ण नेता
खेड़ा सत्याग्रह में महात्मा गाँधी के साथ कई महत्वपूर्ण नेताओं ने हिस्सा लिया:
↔️ टेबल को दायें-बायें खिसकाएं
| क्रम | नेता का नाम |
|---|---|
| 1. | महात्मा गाँधी (इनके साथ सहयोगी के रूप में महादेव देसाई और इंदुलाल याज्ञनिक भी सक्रिय थे) |
| 2. | नरहरि पारीख |
| 3. | मोहनलाल कामेश्वर पांड्या |
| 4. | रविशंकर व्यास |
| 5. | सरदार वल्लभ भाई पटेल |
E. आंदोलन का परिणाम (गाँधी जी की माँगें)
लगातार विरोध और सत्याग्रह के बाद अंततः ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा। महात्मा गाँधी ने सरकार के सामने प्रमुख रूप से ये शर्तें रखीं, जिन्हें मान लिया गया:
- कर (Tax) केवल उन्हीं किसानों से वसूला जाय, जो इसे देने में सक्षम हों (यानी गरीब और प्रभावित किसानों को पूरी छूट मिले)।
- जिन किसानों की भूमि अंग्रेजों द्वारा जब्त कर ली गई है, वह भूमि उन्हें वापस की जाय।
निष्कर्ष: इस प्रकार चंपारण के बाद खेड़ा सत्याग्रह भी महात्मा गाँधी के नेतृत्व में एक सफल किसान आंदोलन साबित हुआ।