चंपारण सत्याग्रह (1917)

वर्ष: 1917
स्थान: चंपारण (बिहार का उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र)
प्रमुख कारण: तिनकठिया प्रथा (नील की खेती)
विशेष: यह भारत में महात्मा गाँधी का प्रथम सफल सत्याग्रह था। यह प्रथम किसान आंदोलन था जिसमें गाँधी जी ने भाग लिया था।

A. पृष्ठभूमि और तिनकठिया प्रथा

  • तिनकठिया प्रथा (3/20): इस प्रथा के तहत चंपारण के किसानों को अपनी भूमि के 3/20 हिस्से (यानी प्रति एक बीघा में 3 कट्ठा) पर ‘नील’ (Indigo) की खेती करना अनिवार्य था।
  • नील दर्पण: नील की खेती करने वाले किसानों की दुर्दशा और इस शोषण की विस्तृत जानकारी दीनबंधु मित्रा की प्रसिद्ध पुस्तक ‘नील दर्पण’ में मिलती है।
  • 1916 का लखनऊ अधिवेशन: कांग्रेस के इस अधिवेशन (अध्यक्ष: अंबिका चरण मजूमदार) में चंपारण के किसानों की समस्या पर चर्चा हुई।
  • गाँधी जी को आमंत्रण: इसी दौरान राजकुमार शुक्ल ने गाँधी जी से मुलाकात की। कानपुर रेलवे स्टेशन पर गाँधी जी ने शुक्ल जी से वादा किया कि वे मार्च-अप्रैल में चंपारण आएंगे और इस मामले की रिपोर्ट तैयार करेंगे।

B. गाँधी जी की चंपारण यात्रा (10 अप्रैल 1917)

10 अप्रैल को महात्मा गाँधी चंपारण के लिए रवाना हुए। उनके इस सफर का घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा:

  • पटना आगमन: सबसे पहले गाँधी जी पटना पहुँचे। यहाँ वे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के निवास ‘बदर बगीचा’ और मजहर-उल-हक के निवास ‘सिकंदर मंजिल’ गए।
  • मुजफ्फरपुर यात्रा: पटना के बाद वे मुजफ्फरपुर गए, जहाँ वे जे. बी. कृपलानी (जो पेशे से एक शिक्षक थे) से मिले।

C. आंदोलन में शामिल प्रमुख नेता

चंपारण सत्याग्रह में महात्मा गाँधी के साथ कई स्थानीय और राष्ट्रीय नेताओं ने कन्धे से कन्धा मिलाकर साथ दिया:

👥 प्रमुख सत्याग्रही

  • महात्मा गाँधी
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • महादेव देसाई
  • नरहरि पारिख
  • शंभू शरण शर्मा
  • ब्रज किशोर सिन्हा
  • राम नवमी प्रसाद
  • नारायण सिन्हा
  • मजहर-उल-हक
  • जे. बी. कृपलानी

D. सत्याग्रह का परिणाम (चंपारण एग्रेरियन कमिटी)

  • गाँधी जी के सत्याग्रह और भारी दबाव के कारण ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और जांच के लिए एक ‘चंपारण एग्रेरियन कमिटी / सोसाइटी’ (Champaran Agrarian Committee) का गठन हुआ।
  • सदस्य: इस कमिटी में महात्मा गाँधी को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।

कमिटी के प्रमुख फैसले:

  1. शोषणकारी ‘तिनकठिया प्रथा’ को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया।
  2. किसानों से की गई अवैध वसूली का 25% हिस्सा उन्हें वापस लौटा दिया गया।
इस प्रकार गाँधी जी का यह भारत में पहला सत्याग्रह पूरी तरह सफल रहा।

E. परीक्षा उपयोगी विविध तथ्य (VVI Points)

  • ‘महात्मा’ की उपाधि: चंपारण सत्याग्रह की इसी अपार सफलता के बाद रविन्द्र नाथ टैगोर ने गाँधी जी को पहली बार ‘महात्मा’ की उपाधि दी थी।
  • आंदोलन का विरोध: इस आंदोलन का विरोध एन. जी. रंगा (N.G. Ranga) ने किया था।
  • जानलेवा साजिश (Poison Incident): अंग्रेज अधिकारी लार्ड इरविन ने महात्मा गाँधी और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को रात्रि भोजन (Dinner) पर आमंत्रित किया था। साजिश के तहत बतख मियां ने जहर भरा दूध का गिलास गाँधी जी को दिया, जिसे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने गिरा दिया। इस प्रकार उस रात महात्मा गाँधी की जान बच गई।