रॉलेट एक्ट (1919) और हंटर कमीशन
तत्कालीन वायसराय: लॉर्ड चेम्सफोर्ड।
उपनाम: रॉलेट एक्ट को ‘काला कानून’ भी कहा गया।
A. रॉलेट एक्ट की पृष्ठभूमि एवं सिडिशन कमिटी
- पृष्ठभूमि: 1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता हुआ तथा गरम दल एवं नरम दल भी एक हो गए।
- देश में राष्ट्रवाद की भावना प्रखर हो रही थी और 1917 में गाँधी जी का चंपारण सत्याग्रह भी सफल रहा था।
- ब्रिटिश सरकार ‘बांटो और राज करो’ की नीति अपना रही थी, लेकिन भारतीय जनमानस में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ काफी असंतोष और क्रांतिकारी गतिविधियां बढ़ रही थीं।
- सिडिशन कमिटी (Sedition Committee): इस स्थिति से निपटने के लिए लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने एक सिडिशन कमिटी का गठन किया।
- इसके अध्यक्ष सर सिडनी रॉलेट (हाई कोर्ट के जज) थे।
- कमिटी का मुख्य कार्य भारत में हो रही क्रांतिकारी गतिविधियों का अध्ययन करना और उनको रोकने का सुझाव देना था।
B. रॉलेट एक्ट के प्रावधान और विरोध
- प्रावधान: इस एक्ट के तहत किसी भी व्यक्ति को केवल ‘शक के आधार पर’ 2 वर्ष तक जेल भेजा जा सकता था।
- इसे “बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील” वाला कानून कहा गया।
- गाँधी जी का कथन: गाँधी जी ने कहा कि “यह कानून अनुचित, स्वतंत्रता विरोधी एवं आम लोगों के मूल अधिकारों की हत्या है। हम इसका पूरे भारत में विरोध करेंगे।”
- सत्याग्रह सभा: अखिल भारतीय स्तर पर रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए गाँधी जी ने ‘सत्याग्रह सभा’ का गठन किया।
- सत्याग्रह सभा के सदस्य: इसके संस्थापक महात्मा गाँधी थे, तथा अन्य सदस्यों में शंकरलाल बैंकर, जमुना लाल बजाज, उमर सोमानी और बी. जी. हॉर्निमन शामिल थे।
विरोध की प्रमुख तिथियां:
- 30 मार्च 1919: रॉलेट एक्ट का विरोध शुरू हुआ। यह दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, बॉम्बे, लाहौर, पंजाब और कलकत्ता जैसे शहरों में सफल रहा। (दिल्ली में नेतृत्व स्वामी श्रद्धानंद ने किया)।
- 6 अप्रैल 1919: संपूर्ण भारत में हड़ताल और सड़क पर विरोध प्रदर्शन हुए, जो काफी सफल रहे।
- 9 अप्रैल 1919: पंजाब में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ। रॉलेट एक्ट के तहत पंजाब के दो प्रमुख नेताओं डॉ. सत्यपाल मलिक और डॉ. सैफुद्दीन किचलू को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।
- गाँधी जी पंजाब जाने की तैयारी में थे, लेकिन उन्हें हरियाणा के पलवल रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया और वापस बॉम्बे भेज दिया गया।
C. जालियांवाला बाग नरसंहार (13 अप्रैल 1919)
- स्थान: अमृतसर (पंजाब)।
- कारण: 13 अप्रैल 1919 को ‘वैशाखी पर्व’ के दिन लोग अमृतसर के जालियांवाला बाग मैदान में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित हुए थे। वे डॉ. सत्यपाल और डॉ. किचलू की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे।
- अंग्रेजों को इस बैठक का पता चल गया। 12 अप्रैल को ही पूरे अमृतसर में ‘मार्शल लॉ’ (Martial Law) लागू हो चुका था।
- सैन्य कमांडर: रेजिनाल्ड डायर (Reginald Dyer)।
- गवर्नर: माइकल ओ डायर (Michael O’Dwyer)।
- नरसंहार: सैन्य कमांडर डायर ने 150 सैनिकों को गोली चलाने का आदेश दे दिया। इस घटना में लगभग 379 लोग मारे गए और 1200 लोग घायल हुए।
प्रतिशोध: इस भीषण हत्याकांड का बदला लेने के लिए उधम सिंह ने 1940 में लंदन जाकर माइकल ओ डायर की हत्या कर दी थी।
D. हंटर कमीशन (1919)
जालियांवाला बाग हत्याकांड की जांच के लिए ब्रिटिश सरकार ने ‘हंटर कमीशन’ का गठन किया।
- इस कमीशन में कुल 8 सदस्य थे (5 अंग्रेज और 3 भारतीय)।
- 3 भारतीय सदस्य: 1. चिमन लाल सीतलवाड़, 2. साहबजादा सुल्तान अहमद, 3. जगत लाल।
- कमीशन की रिपोर्ट: रिपोर्ट में कहा गया कि डायर ने जरूरत से थोड़ा ज्यादा बल का प्रयोग किया है। सजा के तौर पर उन्हें केवल नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
🌟 हंटर कमीशन रिपोर्ट पर प्रमुख प्रतिक्रियाएं
- महात्मा गाँधी: “यह पन्ने दर पन्ने सरकारी लीपापोती है।”
- रविन्द्रनाथ टैगोर: विरोध स्वरूप अपनी ‘नाइटहुड’ (Knighthood) की उपाधि वापस कर दी।
- शंकर नायर: विरोध में वायसराय की कार्यकारिणी परिषद के पद से इस्तीफा दे दिया।
- सी. एफ. एंड्रयूज (C.F. Andrews): इस नरसंहार को ‘जान-बूझ कर की गई हत्या’ बताया।