23. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना एवं अधिवेशन (1885 – 1948)

कांग्रेस के गठन के उद्देश्य:
  • आम जनमानस की समस्याओं का समाधान करना।
  • भारतीयों और अंग्रेजों के बीच मधुर संबंध स्थापित करना।
  • भारत में राष्ट्रीय एकता स्थापित करना।
  • भारत के सभी प्रांतों के नेताओं को संगठित करना।
  • भारतीयों पर हो रहे शोषण और अत्याचार को रोकना।

ये तात्कालिक और प्रारंभिक उद्देश्य थे, जबकि इसका अंतिम उद्देश्य देश की स्वतंत्रता था।

A. एलन ऑक्टेवियन ह्यूम (A. O. Hume)

  • इन्हें ‘कांग्रेस का पिता’ और ‘कांग्रेस के संस्थापक’ कहा जाता है।
  • ये 1885 से 1906 तक कांग्रेस के सचिव रहे (सबसे लम्बी अवधि तक सचिव रहे)।
  • इनका जन्म स्कॉटलैंड में हुआ था। यह एक रिटायर्ड ICS (असैनिक) अधिकारी थे (Join 1849 – Retd 1882, बंगाल सिविल सर्विस)।
  • इन्हें ‘हरमिट ऑफ शिमला’ की उपाधि मिली थी।
  • इन्हें भारत में पक्षी विज्ञान का जनक और ‘जनता का मित्र’ भी कहा जाता था। इनके भारतीयों से अच्छे संबंध थे और ये उनके प्रति उदार थे।

B. कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशन

कांग्रेस के अधिवेशन (सामूहिक बैठक) दो प्रकार के होते थे: वार्षिक अधिवेशन (वर्ष में एक बार आयोजित) और विशेष अधिवेशन (किसी भी विशेष परिस्थिति में)।

1886: कलकत्ता अधिवेशन

  • अध्यक्ष: दादा भाई नौरोजी (प्रथम पारसी अध्यक्ष एवं प्रथम गैर-हिन्दु अध्यक्ष)।
  • दादा भाई नौरोजी कुल 3 बार अध्यक्ष बने (1886-कलकत्ता, 1893-लाहौर, 1906-कलकत्ता)।
  • इसी अधिवेशन में सुरेन्द्र नाथ बनर्जी की ‘इंडियन एसोसिएशन’ का कांग्रेस में विलय हो गया।
  • इस अधिवेशन में बिहार के 2 लोग शामिल हुए: विश्वेश्वर सिंह और शालीग्राम सिंह (इनके सहयोगी गजाधर प्रसाद और पुणेन्दु नारायण सिंह थे)।
  • इस अधिवेशन में 16000 रु खर्च हुए थे, जिसमें 2500 रु दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह ने दिया था।

1887 से 1891 के अधिवेशन

  • 1887 मद्रास: अध्यक्ष- बदरुद्दीन तैयब जी (प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष)। यह पहला अधिवेशन था जहाँ तेलगू भाषा का प्रयोग हुआ। 1878 के लॉर्ड लिटन के शस्त्र अधिनियम के विरोध में प्रस्ताव पारित हुआ। यहीं पर लॉर्ड डफरिन ने कहा था— “कांग्रेस सूक्ष्म अल्पसंख्यक लोगों का प्रतिनिधित्व करती है”।
  • 1888 इलाहाबाद: अध्यक्ष- जॉर्ज यूल (प्रथम यूरोपियन अध्यक्ष)। लाला लाजपत राय पहली बार इसी में शामिल हुए। पहली बार हिन्दी भाषा का प्रयोग हुआ। गवर्नर कॉल्विन ने स्थान देने से मना किया, तब दरभंगा महाराज ने ‘लोथर काउंसिल’ खरीदकर कांग्रेस को दान कर दिया।
  • 1889 बॉम्बे: अध्यक्ष- विलियम वेडरबर्न (इन्होंने A.O. Hume की जीवनी लिखी, ये द्वितीय यूरोपीय अध्यक्ष थे)। लंदन में ब्रिटिश इंडिया कमेटी (अध्यक्ष- विलियम डिग्बी, पत्रिका- इंडिया) स्थापित की गई। 21 वर्षीय मताधिकार का प्रस्ताव पारित। यह प्रथम अधिवेशन था जिसमें 4 महिलाओं ने हिस्सा लिया: कादम्बिनी गांगुली (प्रथम स्नातक उत्तीर्ण महिला), जानकी नाथ घोषाल, स्वर्णा कुमारी देवी, पंडिता रमा बाई। दादा भाई नौरोजी ने घोषणा की कि 1892 का अधिवेशन लंदन में होगा।
  • 1890 कलकत्ता: अध्यक्ष- फिरोज शाह मेहता। पहली बार महिला कादम्बिनी गांगुली ने मंच से संबोधन (धन्यवाद ज्ञापन) दिया।
  • 1891 नागपुर: अध्यक्ष- आनंद पी. चार्लू। नारा दिया गया- “कांग्रेस का दूसरा नाम राष्ट्रीयता है”।

1892 से 1896 के अधिवेशन

  • 1892 इलाहाबाद: अध्यक्ष- W.C. बनर्जी (यह बैठक लंदन में प्रस्तावित थी लेकिन लंदन में चुनाव के कारण इलाहाबाद में हुई)। दादा भाई नौरोजी ने लिबरल पार्टी से चुनाव लड़ा और House of Common में चुनाव जीतने वाले प्रथम भारतीय बने।
  • 1893 लाहौर: अध्यक्ष- दादा भाई नौरोजी। Indian Civil Services की परीक्षा लंदन के साथ-साथ भारत में भी आयोजित कराने का प्रस्ताव पारित।
  • 1894 मद्रास: अध्यक्ष- अल्फ्रेड वेब।
  • 1895 पूना: अध्यक्ष- सुरेन्द्र नाथ बनर्जी। तिलक ने महादेव गोविन्द रानाडे की संस्था ‘सोशल कांफ्रेंस’ को कांग्रेस के मंच से बंद करने की घोषणा की।
  • 1896 कलकत्ता: अध्यक्ष- रहीमतुल्लाह सयानी (द्वितीय मुस्लिम अध्यक्ष)। बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ गीत पहली बार गाया गया। दादा भाई नौरोजी ने ‘धन का बहिर्गमन’ (Drain of Wealth) / आर्थिक दोहन का सिद्धांत पारित किया।

C. 1897 – 1904 के अधिवेशन एक नज़र में

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वर्षस्थानअध्यक्ष
1897अमरावतीसी. शंकरन नायर
1898मद्रासआनंद मोहन बोस
1899लखनऊरोमेश चन्द्र दत्त
1900लाहौरएन जी चंदावरकर
1901कलकत्तादिनशा एदुल्वी वाचा
1902अहमदाबादसुरेन्द्र नाथ बनर्जी
1903मद्रासलाल मोहन घोष
1904बॉम्बेहेनरी कॉटन

नोट: 1901 कलकत्ता अधिवेशन वह प्रथम अधिवेशन था जिसमें महात्मा गांधी ने हिस्सा लिया था। पहली बार उदारवादी एवं युवा वर्ग के बीच मतभेद खुलकर सामने आया। (गांधी जी तीन बार भारत आये थे: 1897, 1901, 1915)।

D. 1905 से 1919 के बीच के महत्वपूर्ण अधिवेशन

  • 1905 बनारस: अध्यक्ष- गोपाल कृष्ण गोखले। बंगाल विभाजन के विरोध में प्रस्ताव। गोखले ने ‘Servant of India Society’ (भारतीय सेवक मंडल) की स्थापना की। कनाडा-ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर स्वशासन की मांग। गोखले को विपक्ष का नेता घोषित किया गया। बंग-भंग के प्रतिकार में स्वदेशी-बहिष्कार आंदोलन का प्रस्ताव। गोखले (उदारवादी नेता, गांधीजी के राजनीतिक गुरु) ने गांधीजी को 1 वर्ष भारत का दौरा करने (आँखें खुली, कान खुली, मुँह बंद रखने) की सलाह दी।
  • 1906 कलकत्ता: अध्यक्ष- दादा भाई नौरोजी। अध्यक्ष पद पर विवाद (उदारवादी डा० रास बिहारी घोष vs उग्रवादी तिलक)। भूपेन्द्र नाथ बसु ने विवाद निपटाया। 4 प्रस्ताव पारित: 1. स्वदेशी, 2. बहिष्कार, 3. स्वराज, 4. राष्ट्रीय शिक्षा। पहली बार ‘स्वराज’ का प्रस्ताव पारित। मोहम्मद अली जिन्ना (गुजराती मूल) दादा भाई नौरोजी के निजी सचिव के रूप में शामिल हुए।
  • 1907 सूरत: अध्यक्ष- डा० रास बिहारी घोष (यह नागपुर में प्रस्तावित था)। कांग्रेस दो भागों में विभाजित: नरमदल और गरमदल। उग्रराष्ट्रवादियों को 7 वर्ष के लिए निष्कासित किया गया। हंगामे के कारण अधिवेशन रद्द हुआ।
  • 1908 मद्रास: अध्यक्ष- डा० रास बिहारी घोष। कांग्रेस का संविधान लागू हुआ (नियम 7 का हवाला देकर उग्रराष्ट्रवादियों को निष्कासित किया गया)। बिहार प्रांतीय कांग्रेस का गठन हुआ।
  • 1909 लाहौर: अध्यक्ष- मदन मोहन मालवीय।
  • 1910 इलाहाबाद: अध्यक्ष- विलियम वेडरबर्न।
  • 1911 कलकत्ता: अध्यक्ष- बिशन नारायण धर। रबिन्द्र नाथ टैगोर द्वारा रचित ‘जन-गण-मन’ 27 Dec 1911 को पहली बार गाया गया। (देवेन्द्र नाथ टैगोर की पत्रिका ‘तत्वबोधिनी सभा’ में ‘भारत भाग्य विधाता’ शीर्षक से यह गीत छपा था)।
  • 1912 बाँकीपुर (पटना): अध्यक्ष- आर. एन. माधोलकर। यह बिहार में आयोजित प्रथम अधिवेशन था (बिहार में 3 बार हुआ: 1912 बाँकीपुर, 1922 गया, 1940 रामगढ़)। यह 27वाँ अधिवेशन था। जवाहर लाल नेहरू पहली बार शामिल हुए। इसी में A.O. Hume को ‘कांग्रेस का पिता’ कहा गया।
  • 1913 कराची: अध्यक्ष- सैयद महमद खान।
  • 1914 मद्रास: अध्यक्ष- भूपेन्द्र नाथ बसु।
  • 1915 बॉम्बे: अध्यक्ष- सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा।
  • 1916 लखनऊ: अध्यक्ष- अंबिका चरण मजूमदार। नरम दल-गरमदल समझौता (सूत्रधार: एनी बेसेंट+तिलक)। कांग्रेस-मुस्लिम लीग समझौता (सूत्रधार: जिन्ना+तिलक)। पृथक निर्वाचन की मांग स्वीकार की गई। सरोजनी नायडू पहली बार शामिल हुईं।
  • 1917 कलकत्ता: अध्यक्ष- एनी बेसेंट (प्रथम महिला अध्यक्ष एवं प्रथम यूरोपीय महिला)। पहली बार तिरंगा झंडा फहराया गया। होमरूल का प्रस्ताव स्वीकार।
  • 1919 अमृतसर: अध्यक्ष- मोती लाल नेहरू। जलियांवाला नरसंहार का विरोध प्रस्ताव पारित। असहयोग के प्रस्ताव पर चर्चा।

E. 1920 से 1929 के महत्वपूर्ण अधिवेशन

  • 1920 कलकत्ता (विशेष अधिवेशन): अध्यक्ष- लाला लाजपत राय (‘लाल-बाल-पाल’ में केवल यही अध्यक्ष बने)। असहयोग का प्रस्ताव अस्थायी रूप से पारित हुआ। (1920 बिहार प्रांतीय कांग्रेस – भागलपुर: अध्यक्ष डा० राजेन्द्र प्रसाद, यहाँ भी असहयोग पारित)।
  • 1920 नागपुर (वार्षिक अधिवेशन): अध्यक्ष- वीर राघवाचारी। असहयोग का प्रस्ताव पारित हुआ (1 वर्ष में स्वराज)। भाषाई आधार पर राज्यों के गठन का प्रस्ताव। देशी रियासतों के प्रति नीति की घोषणा। सुभाष चन्द्र बोस कांग्रेस में शामिल। सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी को बढ़ावा।
  • 1921 अहमदाबाद: अध्यक्ष- चितरंजन दास (जेल में थे)। कार्यकारी अध्यक्ष- हकीम अजमल खाँ। जेल में रहते हुए अध्यक्ष बनने वाले प्रथम व्यक्ति C.R. दास थे। इनका भाषण सरोजनी नायडू ने पढ़ा।
  • 1922 गया: अध्यक्ष- चितरंजन दास। चुनाव में भाग लेने का प्रस्ताव अस्वीकार हुआ। C.R. दास ने इस्तीफा दिया और 1923 में ‘स्वराज पार्टी’ का गठन किया (अध्यक्ष- चितरंजन दास, सचिव- मोतीलाल नेहरू)।
  • 1923 दिल्ली (विशेष अधिवेशन): अध्यक्ष- मौलाना अबुल कलाम आजाद (35 वर्ष की आयु में सबसे युवा अध्यक्ष)। प्रस्ताव पारित कि कांग्रेस सदस्य निर्दलीय चुनाव लड़ सकता है।
  • 1923 काकीनाडा, बंगाल (वार्षिक अधिवेशन): अध्यक्ष- मौलाना मुहम्मद अली। स्वराज पार्टी का विलय का प्रस्ताव पारित। इन्होंने ‘कामरेड’ समाचार पत्र का संपादन किया।
  • 1924 बेलगाम (कर्नाटक): अध्यक्ष- महात्मा गांधी (एकमात्र अधिवेशन)। गांधी-दास समझौता स्वीकृत। कांग्रेस और लीग पुनः अलग हुए।
  • 1925 कानपुर: अध्यक्ष- सरोजनी नायडू (प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष)। पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाने का प्रस्ताव पारित।
  • 1926 गुवाहाटी: अध्यक्ष- श्रीनिवास आयंगर। कांग्रेस नेताओं को खादी वस्त्र पहनना अनिवार्य कर दिया गया।
  • 1927 मद्रास: अध्यक्ष- डा० एम. ए. अंसारी। साइमन कमीशन के विरोध का प्रस्ताव पारित। नारा- ‘साइमन वापस जाओ (Simon go back)’ यह नारा यूसुफ मेहर अली ने दिया था।
  • 1928 कलकत्ता: अध्यक्ष- मोतीलाल नेहरू। नेहरू रिपोर्ट को स्वीकार करने का प्रस्ताव पारित।
  • 1929 लाहौर: अध्यक्ष- जवाहर लाल नेहरू। ‘पूर्ण स्वराज’ का प्रस्ताव पारित। 31 Dec 1929 को रात्रि 12 बजे रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया गया। 26 Jan 1930 को ‘पूर्ण स्वतंत्रता दिवस’ मनाया गया।

नोट: 1930 में कांग्रेस का अधिवेशन आयोजित नहीं हुआ था।

F. 1931 से 1948 तक के अधिवेशन

  • 1931 कराची: अध्यक्ष- सरदार वल्लभ भाई पटेल। मूल अधिकार का प्रस्ताव पारित (नेहरू ने तैयार किया)। चरखा लगा तिरंगा फहराया गया। आर्थिक नीतियों से संबंधित प्रस्ताव पारित। गांधी-इरविन समझौते को स्वीकृति मिली।
  • 1932 दिल्ली: अध्यक्ष- रणछोड़ दास।
  • 1933 कलकत्ता: अध्यक्ष- श्रीमती नलिनी सेन गुप्ता।
  • 1934 बॉम्बे: अध्यक्ष- डा० राजेन्द्र प्रसाद। (यह 50वाँ स्वर्ण जयंती अधिवेशन था)। अखिल भारतीय खादी ग्रामोद्योग की स्थापना (अध्यक्ष- गांधी, सचिव- श्री कृष्ण दास)। अखिल भारतीय चरखा संघ की स्थापना (अध्यक्ष- गांधी, सचिव- JL नेहरू)। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना (अध्यक्ष- आचार्य नरेन्द्र देव, सचिव- जय प्रकाश नारायण)।

नोट: 1930 (सविनय अवज्ञा आंदोलन), 1935 (GOI Act 1935) और 1941-45 में अधिवेशन नहीं हुए।

  • 1936 लखनऊ: अध्यक्ष- जवाहर लाल नेहरू। कांग्रेस का नया लक्ष्य ‘समाजवाद’ घोषित किया गया। ‘कांग्रेस संसदीय दल’ का गठन किया गया।
  • 1937 फैजपुर (बंगाल): अध्यक्ष- जवाहर लाल नेहरू। यह गाँव में आयोजित प्रथम अधिवेशन था। 13 सूत्रीय अस्थायी कृषि कार्यक्रम घोषित। महिलाओं के लिए ‘महिला प्रकोष्ठ’ का गठन।
  • 1938 हरिपुरा (गुजरात): अध्यक्ष- सुभाष चन्द्र बोस। ‘राष्ट्रीय नियोजन समिति’ का गठन (अध्यक्ष- जवाहर लाल नेहरू)। रोमन लिपि को लागू करने का प्रस्ताव (SC बोस द्वारा)। देशी रियासतों को शामिल करने का प्रस्ताव।
  • 1939 त्रिपुरी (जबलपुर, MP): अध्यक्ष- सुभाष चन्द्र बोस। अध्यक्ष पद के लिए चुनाव (सुभाष चन्द्र बोस जीत, पट्टाभि सीतारमैय्या हार – गांधीजी की हार)। गुस्से में बोस ने इस्तीफा दे दिया।
  • 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक (Forward Block): सुभाष चन्द्र बोस ने क्रांतिकारी विचारधारा के तहत इसकी स्थापना की। 1940 में अंग्रेजों ने बोस को कलकत्ता वाले घर में नजरबंद कर दिया। 1940 में भागे → गोमो रेलवे स्टेशन → कालका मेल → कराची से जहाज से जर्मनी (हिटलर से मिले)।
  • 1940 रामगढ़ (बिहार): अध्यक्ष- मौलाना अबुल कलाम आजाद। (बिहार में तीसरा अधिवेशन)। व्यक्तिगत सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन पर चर्चा। पाकिस्तान की माँग उठी। कांग्रेस पार्टी को अवैध घोषित कर दिया गया। मौलाना अबुल कलाम आजाद 1940-1946 तक सबसे लंबी अवधि तक अध्यक्ष रहे।
  • 1946 मेरठ: अध्यक्ष- जे. बी. कृपलानी (Dec 1946 – Dec 1947)। यह स्वतंत्रता पूर्व अंतिम अधिवेशन था।
  • 1947 (June): कांग्रेस की दिल्ली में बैठक। जे. बी. कृपलानी के इस्तीफे के बाद डा० राजेन्द्र प्रसाद अध्यक्ष बने। “स्वतंत्रता के समय कांग्रेस के अध्यक्ष डा० राजेन्द्र प्रसाद थे”।
  • 1948 जयपुर: अध्यक्ष- पट्टाभि सीतारमैय्या।