13. मौर्य साम्राज्य: चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार एवं प्रशासन
A. चन्द्रगुप्त मौर्य का जीवन एवं उपाधियां
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| जन्म | 340 ई.पू. | माता-पिता | मुरा एवं सूर्यवर्धन |
| पत्नी | दुर्धरा एवं हेलेना (कार्नेलिया) | पुत्र | बिन्दुसार |
| जैन गुरु | भद्रबाहु | प्रधान मंत्री | चाणक्य |
विभिन्न नाम एवं उपाधियां
- विशाखदत्त ने अपनी पुस्तक ‘मुद्राराक्षस’ में चन्द्रगुप्त मौर्य को ‘वृषल’ (निम्न कुल) बताया है।
- इन्हें भारत का ‘प्रथम ऐतिहासिक शासक’, ‘प्रथम मुक्तिदाता’, ‘अखंड भारतीय साम्राज्य का निर्माणकर्ता’, और ‘प्रथम स्वतंत्रता सेनानी’ कहा जाता है।
- जस्टिन, स्ट्रैबो और एरियन ने इन्हें ‘सेन्ड्रोकोट्स’ नाम दिया।
- एप्पियानस एवं प्लूटार्क ने इन्हें ‘एंड्रोकोट्स’ कहा।
- ‘विलियम जोंस’ ने ‘सेन्ड्रोकोट्स’ की पहचान चन्द्रगुप्त मौर्य के रूप में की।
- जैन ग्रंथों में इन्हें ‘विशाखाचार्य’ कहा गया।
B. सेल्यूकस निकेटर से युद्ध एवं मेगास्थनीज
- 305 ई.पू. में यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर ने चन्द्रगुप्त पर हमला किया। पाटलिपुत्र में हुए इस युद्ध में सेल्यूकस हार गया।
- हारने के पश्चात् सेल्यूकस ने अपनी पुत्री ‘हेलेना’ का विवाह चन्द्रगुप्त से कर दिया और दहेज में 4 प्रांत दिए: काबुल (पेरीपनीसदाई), कंधार (अराकोशिया), हेरात (ऐरिया), और मकरान (जेड्रोसिया)।
- प्लूटार्क के अनुसार चन्द्रगुप्त ने सेल्यूकस को 500 हाथी दिए। इस युद्ध का वर्णन ‘एप्पियानस’ ने किया है।
- सेल्यूकस का राजदूत मेगास्थनीज चन्द्रगुप्त के दरबार में आया और 304 से 299 ई.पू. तक भारत में रहा।
- मेगास्थनीज ने ‘इंडिका’ (यूनानी भाषा) पुस्तक लिखी। इसका संकलन ‘स्वानबेग’ ने और अंग्रेजी अनुवाद ‘मैक्रिंडल’ ने किया।
C. ‘इंडिका’ के अनुसार पाटलिपुत्र एवं समाज (VVI)
पाटलिपुत्र का वर्णन
- पाटलिपुत्र 16 km लम्बा, 5 km चौड़ा और 30 हाथ गहरी खाई में फैला था (समानांतर चतुर्भुज आकार)।
- यहाँ राजा का घर लकड़ी का था (इसकी खोज ‘स्पूनर’ द्वारा कुम्हरार में की गई)।
- लकड़ी के घर में 64 दरवाजे और 570 खिड़कियां थीं। इसकी तुलना सूसा और एकबतना के महलों से की गई है।
- पाटलिपुत्र की चारदिवारी बुलंदीबाग तक फैली थी। मेगास्थनीज ने इसे ‘पालिब्रोथा’ (पूर्वी भारत का सबसे बड़ा नगर) कहा।
सामाजिक स्थिति एवं प्रशासन (इंडिका के अनुसार)
- भारतीय लोगों को लेखन कला का अभाव था। भारत में अकाल नहीं पड़ता था।
- समाज में दास प्रथा, सती प्रथा, बहुविवाह प्रथा नहीं थी। घरों में ताले नहीं लगते थे।
- राजस्व की दर 1/4 बताई गई है।
- 7 वर्गों में समाज: किसान, कारीगर, दार्शनिक, निरीक्षक, सभासद, सैनिक, और अहीर।
- नगर प्रशासन: 6 समितियां मिलकर नगर चलाती थीं (प्रत्येक में 5 सदस्य)। 1. उद्योग धंधा, 2. विदेशी मामले, 3. जनगणना, 4. व्यापार, 5. बाजार, 6. विक्रय कर।
- सैन्य प्रशासन: सेना 6 समितियों द्वारा चलती थी। 1. जल सेना, 2. यातायात, 3. पैदल सेना, 4. घुड़सवार सेना, 5. रथ सेना, 6. हाथी सेना।
D. चाणक्य (कौटिल्य) एवं ‘अर्थशास्त्र’
- चाणक्य के पिता का नाम ‘चाणक’ था। अन्य नाम: अजय, अंशु, अंशुल, कौटिल्य, विष्णुगुप्त, द्विजर्षभ, भारत का मैकियावेली।
- इनकी प्रसिद्ध रचना ‘अर्थशास्त्र’ है (इसका हिंदी संकलन ‘शामाशास्त्री’ ने किया)।
- अर्थशास्त्र ‘राजनीति एवं लोक प्रशासन’ पर आधारित है। इसमें 15 भाग (अधिकरण), 180 उपभाग (प्रकरण), और 6000 श्लोक हैं। यह चम्पू शैली में लिखी गई है।
- राजस्व की दर 1/6 बताई गई है और 9 प्रकार के दासों का उल्लेख है।
- गुप्तचर विभाग को ‘महामात्यसर्प’ और गुप्तचरों को ‘गूढ़ पुरुष’ कहा गया है।
💡 सप्तांग सिद्धांत (अर्थशास्त्र के अनुसार)
- 1. राजा
- 2. अमात्य (राजस्व मंत्री)
- 3. जनपद
- 4. कोष (खजाना)
- 5. दुर्ग (किला)
- 6. सेना
- 7. मित्र
E. बिंदुसार (298 – 269 ई.पू.)
चन्द्रगुप्त मौर्य अपने गुरु भद्रबाहु के साथ कर्नाटक के श्रवणबेलगोला चले गए, जहाँ उन्होंने ‘संलेखना विधि’ से प्राण त्याग दिए। उनके बाद बिंदुसार राजा बने।
- अन्य नाम: यूनानी ग्रंथों में ‘अमित्रचेट्स’, संस्कृत ग्रंथों में ‘अमित्रघात / वारिसार’, और जैन ग्रंथों में ‘सिंहसेन’ कहा गया। इन्हें “पिता का पुत्र एवं पुत्र का पिता” भी कहा जाता है।
- इनके प्रधानमंत्री ‘खलाटक’ थे। बिंदुसार ‘आजीवक सम्प्रदाय’ के अनुयायी थे (पिंगल वत्स के प्रभाव में आकर अपनाया)।
- इनके समय तक्षशिला में भयंकर विद्रोह (सुसीम के समय अधिक टैक्स के कारण) हुआ था, जिसे दबाने के लिए ‘अशोक’ को भेजा गया था।
- सीरिया के राजा ‘एंटिओकस’ से बिंदुसार ने 3 चीज़ें मांगी: मीठी मदिरा, सुखा अंजीर, और दार्शनिक। एंटिओकस ने दार्शनिक देने से मना कर दिया था और अपने राजदूत ‘डायमेकस’ को बिंदुसार के दरबार में भेजा।
F. मौर्यकालीन प्रशासन एवं प्रमुख अधिकारी
- प्रशासन 3 क्षेत्रों में बंटा था: नाभिकीय, मुख्य, और दूरवर्ती। व्यवस्था राजतंत्रात्मक और पितृसत्तात्मक थी।
- अशोक ने धौली शिलालेख में कहा- “समस्त प्रजा मेरी संतान है” (लोक कल्याणकारी राज्य)।
- बौद्ध ग्रंथ ‘महावंश’ के अनुसार कौटिल्य ने चन्द्रगुप्त को ‘जम्बूद्वीप’ का सम्राट बनाया था।
- अंतिम शासक बृहद्रथ था, जिसकी हत्या पुष्यमित्र शुंग ने की।
- अर्थशास्त्र में 18 तीर्थों (उच्च अधिकारी) और 26 अध्यक्षों का उल्लेख है, जिन्हें 1000 पण वार्षिक वेतन मिलता था (मेगास्थनीज ने इन्हें ‘मजिस्ट्रेट’ कहा)।
प्रमुख अध्यक्ष एवं उनके विभाग (VVI)
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| अध्यक्ष / अधिकारी | सम्बंधित विभाग |
|---|---|
| समाहर्ता | राजस्व विभाग का अधिकारी |
| सन्निधाता | कोषाध्यक्ष |
| प्रदेष्टा | फौजदारी न्यायालय का प्रमुख |
| व्यवहारिक | दीवानी न्यायालय का प्रमुख |
| पण्याध्यक्ष | वाणिज्य विभाग का अध्यक्ष |
| आकराध्यक्ष | खान विभाग का अध्यक्ष |
| लक्षणाध्यक्ष | छापेखाना का अध्यक्ष |
| पौतवाध्यक्ष | माप तौल का अध्यक्ष |
| सीताध्यक्ष | कृषि विभाग का अध्यक्ष |
| कुप्याध्यक्ष | वनों का अध्यक्ष |
| शुल्काध्यक्ष | व्यापार कर वसूलने वाला |
| सूत्राध्यक्ष | कताई-बुनाई विभाग का अध्यक्ष |
| लोहाध्यक्ष | धातु विभाग का अध्यक्ष |
| विवीताध्यक्ष | चारागाहों का अध्यक्ष |
| गोअध्यक्ष | पशुधन विभाग का अध्यक्ष |
| नवाध्यक्ष | जहाजरानी विभाग का अध्यक्ष |
| पत्तनाध्यक्ष | बंदरगाहों का अध्यक्ष |
| संस्थाध्यक्ष | व्यापारिक मार्गों का अध्यक्ष |
| देवताध्यक्ष | धार्मिक संस्थाओं का अध्यक्ष |
| अश्वाध्यक्ष | घोड़ों का अध्यक्ष |
| हस्त्यध्यक्ष | हाथियों का अध्यक्ष |
| सुवर्णाध्यक्ष | सोने का अध्यक्ष |
| अक्षपटलाध्यक्ष | महालेखाकार |
G. प्रान्त एवं ग्राम प्रशासन
अर्थशास्त्र में 5 प्रांतों का उल्लेख है: उत्तरापथ (तक्षशिला), दक्षिणापथ (सुवर्णगिरी), अवंति (उज्जैन), प्राची (पाटलिपुत्र), कलिंग (तोसली)।
प्रशासनिक इकाइयाँ
- प्रदेष्टा: मंडल का प्रशासनिक प्रमुख
- स्थानिक: 800 ग्रामों का समूह
- द्रोणमुख: 400 ग्रामों का समूह
- खार्वाटिक: 200 ग्रामों का समूह
- संग्रहण: 10 ग्रामों का समूह
महत्वपूर्ण बिंदु (One-Liners)
- प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ‘ग्राम’ थी (प्रधान- ग्रामिक या ग्रामणी)।
- ग्राम सभा के कार्यालय का कार्य ‘गोप’ नामक कर्मचारी करता था।
- ग्राम प्रशासन की विस्तृत जानकारी ‘सोहगौरा’ और ‘महास्थान’ अभिलेखों से मिलती है।
- जिला प्रशासन ‘समाहर्ता’ (कर संग्रह अधिकारी), ‘रज्जुक’ (न्याय अधिकारी) और ‘युक्त’ (पुलिस अधिकारी) द्वारा होता था।
- जस्टिन ने चन्द्रगुप्त मौर्य और सिकंदर की भेंट का वर्णन किया है।
- एग्रोनोमोई: मार्ग निर्माण से सम्बंधित अधिकारी।
- मौर्यकाल में शिक्षा ग्रहण करने का प्रसिद्ध केंद्र तक्षशिला था।