12. अशोक महान (272 – 232 ई.पू.)

जीवन परिचय: अशोक का शासनकाल 272 ई.पू. से 232 ई.पू. तक रहा। इनके पिता का नाम बिन्दुसार और माता का नाम सुभद्रांगी था (अशोक अवदानमाला ग्रंथ के अनुसार)। माता के अन्य नाम धम्मा और पसादिका भी मिलते हैं।

A. अशोक का परिवार एवं सत्ता संघर्ष

पत्नियां एवं संताने

अशोक के 4 पुत्र और 2 पुत्रियां थीं।

पत्नी का नाम संतान (पुत्र/पुत्री)
असंघमित्राजालौक (पुत्र)
महादेवीमहेन्द्र (पुत्र), संघमित्रा (पुत्री)
कारुवाकीतीवर (पुत्र)
पद्मावतीकुणाल (पुत्र)
तिष्यरक्षिताचारुमती (पुत्री)

तिष्यरक्षिता से जुड़े तथ्य

  • यह भयंकर बौद्ध धर्म विरोधी थी और हिन्दू सनातन धर्म को मानती थी।
  • इसी के कहने पर बंगाल नरेश शशांक ने बोधगया का बोधिवृक्ष काटकर फल्गु नदी में फेंक दिया था।
  • अशोक के मरने के पश्चात् यह सती हो गई थी।

सत्ता प्राप्ति के लिए संघर्ष

  • अशोक ने गद्दी पाने के लिए अपने 99 भाइयों की हत्या करके पटना के ‘अगम कुँआ’ में उनके शव को फेंक दिया था (इस बात की जानकारी बौद्ध ग्रंथ दीपवंश + महावंश में है)।
  • बौद्ध ग्रंथ तंगायुर + कंगायुर के अनुसार अशोक ने सत्ता के लिए 6 भाइयों की हत्या की थी।
  • अपवाद: जबकि अशोक ने अपने 5वें शिलालेख में कहा है कि ‘मैं अपने पुरे परिवार सहित मगध में रहता था’।

B. अशोक के प्रारंभिक धर्म एवं धर्म परिवर्तन

  • प्रारंभ में यह ब्राह्मण धर्म के बहुत बड़े अनुयायी थे।
  • महावंश बौद्ध ग्रंथ के अनुसार अशोक प्रतिदिन 60,000 ब्राह्मणों को भोजन करवाते थे।
  • ब्राह्मण धर्म के बाद अशोक ने शैव धर्म भी अपनाया (इस बात की जानकारी कल्हण के राजतरंगिणी ग्रंथ में है)।
  • अशोक ने कश्मीर में शिव और पार्वती का मंदिर बनवाया था (राजतरंगिणी के अनुसार ‘विजयेश्वर मंदिर’)।
  • अशोक ने कश्मीर में श्रीनगर शहर की स्थापना की और अपने बेटे (जालौक) को वहां का राज्यपाल बनाया।
  • राजतरंगिणी के अनुसार अशोक ने नेपाल में देवपाटन एवं लालीपाटन शहर की स्थापना की थी।
  • कलिंग युद्ध के बाद हृदय परिवर्तन होने पर इन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया।
  • बौद्ध धर्म अपनाने में तीन लोगों का योगदान रहा: उपगुप्त (गुरु), निग्रोथ (भाई का लड़का), और मोगलीपुत तिस (संत) (ये सर्वाधिक प्रेरित किये थे)।

C. अभिलेखों में अशोक के विभिन्न नाम

  • अशोक: मास्की, गुर्जरा, नेत्तुर, उदेगोलन अभिलेख में।
  • बुद्धशाक्य: सिर्फ मास्की अभिलेख में।
  • देवनाम प्रियदर्शी + मगधाधिराज: भाब्रू एवं बैराट शिलालेख में।
  • महाराजाधिराज: पनगुडरिया के अभिलेख में।
  • अशोकवर्धन: पुराणों में।

D. अशोक के अभिलेख एवं शिलालेख

  • भारत में अभिलेख/शिलालेख लाने का काम अशोक द्वारा किया गया।
  • अशोक ईरान देश के शासक दारा प्रथम से प्रभावित होकर भारत में अभिलेख लाये।
  • वर्तमान समय तक 150+ अभिलेख खोजे जा चुके हैं।
  • खोज: अशोक के अभिलेखों की खोज 1750 ई. में ‘टी. पैंनथेलर’ ने की।
  • पढ़ना: अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ने में सफलता 1837 ई. में ‘जेम्स प्रिंसेप’ को मिली।
  • लिपि: अभिलेखों में 4 लिपियों का प्रयोग हुआ है: ब्राह्मी, खरोष्ठी, ग्रीक, और अरमाइक।
  • भाषा: अशोक ने ‘प्राकृत’ भाषा का प्रयोग किया।
  • अशोक के अभिलेखों का डिजाईन ‘चापड़’ नामक व्यक्ति द्वारा दिया गया।
  • अभिलेखों के आधार पर अशोक का इतिहास ‘डॉ. भण्डारकर महोदय’ ने लिखा है।

अशोक के 8 वृहत् शिलालेख (14 बातें)

अशोक के वृहत् शिलालेखों की संख्या 8 है, हर शिलालेख पर 14 बातें लिखवाई गई हैं। 6 भारत में हैं और 2 पाकिस्तान में हैं (सभी पर प्राकृत भाषा का इस्तेमाल हुआ है)。

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शिलालेखस्थानखोजकर्ता
1. शहबाजगढ़ीपेशावर जिला (पाक.)जनरल कोर्ट
2. मानसेहराहजारा जिला (पाक.)कनिंघम
3. गिरनारजुनागढ़ (गुजरात)कर्नल टॉड
4. धौलीपुरी (उड़ीसा)जनरल कोर्ट
5. जौगढ़गंजाम (उड़ीसा)वाल्टर इलियट
6. सोपाराथाणे (महाराष्ट्र)अनुघोष
7. येरागुंडीकर्नूल (आंध्र प्रदेश)अनुघोष
8. कालसीदेहरादून (उत्तराखंड)फॉरेस्ट

वृहत् शिलालेखों में वर्णित 14 मुख्य बातें

  • 1. पशुबलि की निंदा।
  • 2. मनुष्य एवं पशुओं की चिकित्सा का उल्लेख।
  • 3. हर अधिकारी प्रत्येक 5 साल पर राज्य का दौरा करें।
  • 4. भेरीघोष (युद्ध/मारपीट) की जगह धम्मघोष की नीति।
  • 5. पुरुष धर्म महामात्र की नियुक्ति का वर्णन।
  • 6. हर मनुष्य अपने ऊपर आत्म नियंत्रण रखे।
  • 7-8. अशोक की तीर्थयात्रा का वर्णन।
  • 9. सच्चे भेंट एवं सच्चे शिष्टाचार की बात।
  • 10. राजा एवं अधिकारी हमेशा प्रजा के हित के बारे में सोचें।
  • 11. धम्म की व्याख्या।
  • 12. स्त्री महामात्रों की नियुक्ति।
  • 13. कलिंग युद्ध का वर्णन।
  • 14. जनता को धार्मिक जीवन बिताने की सलाह।

अशोक के लघु शिलालेख

सार ए कुना/कंधार (अफगानिस्तान), लंपक/लमघान/जलालाबाद (अफगानिस्तान), अहरौरा (मिर्जापुर, UP), सहसाराम (रोहतास, बिहार), भाब्रू एवं बैराट (राजस्थान), गुर्जरा/रुपनाथ/सारोमारो/पनगुडरिया (मध्य प्रदेश), सन्नाती/सिद्धपुर/जटिंग रामेश्वर/गोविमठ/ब्रह्मगीरि/नेत्तुर/मास्की/उदेगोलन/पालकीकुंड (कर्नाटक), और राजुल मण्डल गिरी (आंध्र प्रदेश)。

अशोक के वृहत् स्तंभलेख (Pillars)

  • दिल्ली-टोपरा (हरियाणा) और दिल्ली-मेरठ (UP): इन दोनों को फिरोज शाह तुगलक (FST) ने दिल्ली में स्थापित किया।
  • लौरिया अरेराज (पूर्वी चंपारण)।
  • लौरिया नंदनगढ़ (पश्चिमी चंपारण): इस पर सिंह का चित्र अंकित है और आसन के चारो ओर हंस की पंक्ति है।
  • रामपुरवा (पश्चिमी चंपारण): इस पर सिंह एवं वृषभ का चित्र अंकित है। इसमें अशोक के धार्मिक घोषणा एवं धार्मिक कार्यों का उल्लेख है।
  • कौशाम्बी/प्रयाग (UP): यह पहले कौशाम्बी में था, अकबर के कहने पर जहाँगीर ने इसे इलाहाबाद किले में शिफ्ट करवाया। इसे ‘रानी का अभिलेख’ भी कहा जाता है। इसमें पत्नी (कारुवाकी) एवं पुत्र (तीवर) का वर्णन है।

अशोक के लघु स्तंभलेख एवं गुहा लेख

  • सारनाथ (UP) और साँची (MP)।
  • रुमनदेई (नेपाल): अशोक ने यहाँ टैक्स 1/6 से घटाकर 1/8 कर दिया था।
  • निगाली सागर (नेपाल): अशोक ने यहाँ पर कनकमुनी संत का स्तूप बनवाया।
  • गुहा लेख: अशोक ने बोधगया में बराबर की पहाड़ी पर आजीवकों के ठहरने हेतु 4 गुफाएं बनवाईं- कर्ज, चोपर, सुदामा, विश्वझोपड़ी।
  • अशोक के पौत्र दशरथ ने भी आजीवकों के ठहरने हेतु 4 गुफाएं बनवाईं- गोपी, लोमस, वथिका, वाहिका।

E. कलिंग युद्ध (261 ई.पू.)

  • यह युद्ध अशोक के राज्याभिषेक के 8वें साल में लड़ा गया।
  • वजह: साम्राज्य का विस्तार।
  • क्षेत्र: महानदी एवं गोदावरी के मध्य।
  • राजधानी: तोसली।
  • परिणाम: 1 लाख लोगों की हत्या की गई और 1.5 लाख लोगों को बंदी बनाया गया। इस भीषण रक्तपात से अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया।

F. बौद्ध धर्म के प्रति अशोक के कार्य

  • अशोक ने साँची स्तूप में बताया है कि ‘जो भी भिक्षु या भिक्षुणी बौद्ध संघ को भंग करेगा तो उसे श्वेत वस्त्र पहनाकर अयोग्य स्थान पर रख दिया जाएगा’।
  • सारनाथ स्तंभ लेख में अशोक ने जीवनकाल में बौद्ध तीर्थस्थानों का दौरा किये जाने और संघ में एकता बनाये रखने की सलाह दी।
  • अशोक के दौरों का क्रम: कुशीनगर ➔ लुम्बिनी ➔ कपिलवस्तु ➔ सारनाथ ➔ श्रावस्ती।
  • राज्याभिषेक के 10वें साल बोधगया की यात्रा की।
  • राज्याभिषेक के 20वें साल लुम्बिनी गए (टैक्स घटाया)।
  • राज्याभिषेक के 14वें साल निगाली सागर की यात्रा की और कनकमुनी का स्तूप बनवाया।
  • महेन्द्र ने श्रीलंका के राजा ‘तिस’ को बौद्ध धर्म अपनाया; तिस ने बौद्ध धर्म को अपना राजधर्म बनाया।
  • अशोक द्वारा दिया गया ‘धम्म’ की परिभाषा ‘राहुलोवाद सुत्त’ से लिया गया है।
  • अशोक ने अपने सातवां स्तंभ लेख में पशु एवं मनुष्य के ठहरने हेतु वट वृक्ष लगवाने और कुआँ खुदवाने का वर्णन किया है।

💡 परीक्षा उपयोगी विविध तथ्य (VVI One-Liners)

अशोक के समकालीन राजा

  • सीरिया (युनान): एंटिओकस
  • मिस्र: तुरमय (Ptolemy)
  • मेसोडोनिया: एंटीगोनस गोनतास
  • एपीरस: मग
  • सिरिन: अलिक सुन्दर

महत्वपूर्ण तथ्य

  • रुमनदेई स्तंभलेख की खोज ‘फिहरर’ ने की।
  • मास्की शिलालेख की खोज ‘बोडन’ ने की।
  • अशोक द्वारा स्थापित सबसे सुरक्षित स्तंभ लेख ‘लौरिया नंदनगढ़’ है।
  • अशोक के तीसरे शिलालेख में ‘अल्पव्यय’ एवं ‘अल्पसंग्रह’ का वर्णन है।
  • सारनाथ स्तंभ लेख: इसके शीर्ष भाग पर उल्टा कमल का फुल है; ऊपर गोल पट्टी पर 24 तिलियां बनी हैं; चार जानवरों (हाथी, घोड़ा, सिंह, सांड) का चित्र बना है। भारत सरकार ने इसे राजकीय चिन्ह के रूप में स्वीकार किया है।
  • अशोक के स्तंभ लेखों में केवल ब्राह्मी लिपि का प्रयोग है।
  • 5वें वृहत् स्तंभ लेख से पता चलता है कि अशोक अपने जन्मदिन के दिन सभी कैदियों को आज़ाद कर देते थे।
  • द्वितीय मुख्य शिलालेख में दक्षिण भारत के राज्यों का वर्णन है।
  • श्रीलंका अशोक के साम्राज्य में शामिल नहीं था।
  • अफगानिस्तान, बिहार एवं कलिंग अशोक के साम्राज्य में शामिल था।

G. मौर्य वंश के इतिहास की जानकारी के स्रोत

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पुरातात्विक स्रोत साहित्यिक स्रोत
• अभिलेख, शिलालेख, मुद्रा, मोहर, स्मारक, मृदभांड, चित्रकला।
• चन्द्रगुप्त मौर्य के अभिलेख से मौर्य वंश की जानकारी।
• अशोक के अभिलेख से मौर्य वंश की जानकारी।
चन्द्रगुप्त मौर्य के 3 अभिलेख: 1. गिरनार (गुजरात), 2. महास्थान (बांग्लादेश), 3. सहगौरा (गोरखपुर)।
• कौटिल्य का अर्थशास्त्र
• विशाखदत्त की मुद्राराक्षस
• पतंजलि का महाभाष्य
• विष्णु पुराण।
• भद्रबाहु ग्रंथ – दक्षिण भारत का ग्रंथ।
• मौर्यकाल की भाषा ➔ संस्कृत।
• बौद्ध साहित्य: दिव्यावदान, दीपवंश, महावंश, मिलिन्दपन्हो।
• मेगास्थनीज की इंडिका
• जैन ग्रंथ: कल्पसूत्र, परिशिष्टपर्वन।