10. बौद्ध धर्म (Buddhism) – संपूर्ण विवरण
A. प्रारंभिक जीवन एवं परिवार
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| बचपन का नाम | सिद्धार्थ | वंश (कुल) | शाक्य कुल (क्षत्रिय) |
| पिता का नाम | शुद्धोधन | माता का नाम | मायादेवी (जन्म के 7वें दिन मृत्यु) |
| सौतेली माता | प्रजापती गौतमी | पत्नी का नाम | यशोधरा |
| पुत्र का नाम | राहुल | घोड़ा | कंथक |
| सारथी | चन्ना | प्रथम गुरु | अलार कलाम (वैशाली) |
| दुसरा गुरु | रुद्रकरामपुत्त (राजगीर) |
B. गृहत्याग (महाभिनिष्क्रमण) एवं ज्ञान की प्राप्ति
- सिद्धार्थ ने कपिलवस्तु की सैर के दौरान 4 दृश्य देखे: 1. एक बूढ़ा व्यक्ति, 2. एक बीमार व्यक्ति, 3. मृत व्यक्ति, और 4. एक संन्यासी/योगी।
- वह संन्यासी से सर्वाधिक प्रभावित हुए और 29 वर्ष की अवस्था में गृहत्याग कर दिया। बौद्ध धर्म में इस घटना को महाभिनिष्क्रमण कहा गया।
- गृहत्याग के बाद सिद्धार्थ सबसे पहले नेपाल गए (अनोमा नदी के किनारे अनुविया उद्यान में 7 दिन ठहरे)।
- फिर वैशाली पहुँचकर प्रथम गुरु अलार कलाम से मिले और राजगीर जाकर दूसरे गुरु रुद्रकरामपुत्त से मिले।
- उरुवेला पहुँचकर 5 ब्राह्मणों (अज, असजी, भप, वदिय, कौण्डिन्य) के साथ 6 साल तपस्या की। ‘सुजाता’ नामक लड़की द्वारा खीर खिलाने के बाद वह बोधगया आ गए।
- ज्ञान प्राप्ति (संबोधि): बोधगया में निरंजना (फल्गु) नदी के किनारे, पीपल वृक्ष के नीचे, वैशाख पूर्णिमा के 8वें दिन (35 वर्ष की आयु में) ज्ञान की प्राप्ति हुई।
- ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् इन्हें महात्मा बुद्ध, गौतम बुद्ध, तथागत, शाक्यमुनि और ‘एशिया का रौशनी’ (Light of Asia) कहा गया।
- बोधगया में वर्तमान बोधिवृक्ष 5वीं पीढ़ी का है, जिसे अलेक्जेंडर कनिंघम ने लगवाया था।
C. धर्मप्रचार एवं महत्वपूर्ण घटनाएं
- प्रथम उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन): सारनाथ (प्राचीन नाम- ऋषिपत्तनम्/मृगदाव) पहुँचकर उन 5 ब्राह्मणों को पाली भाषा में अपना पहला उपदेश दिया।
- बुद्ध के उपदेश का संबंध आचरण की शुद्धता और पवित्रता से था।
- महात्मा बुद्ध के सबसे अधिक शिष्य श्रावस्ती में हुए।
- प्रिय शिष्य आनंद के कहने पर बौद्ध संघ में महिलाओं को शामिल किया गया। हालाँकि, बुद्ध स्त्रियों के संघ में प्रवेश को लेकर प्रगतिशील नहीं थे; उनका मानना था कि इससे संघ ज्यादा समय तक नहीं चलेगा।
- बुद्ध के चचेरे भाई ‘देवदत्त’ ने राजगीर में उन्हें 3 बार जान से मारने का प्रयास किया, क्योंकि वह बुद्ध के जीवनकाल में ही संघ का प्रमुख बनना चाहता था।
D. बुद्ध का महापरिनिर्वाण एवं अस्थि अवशेष
- पावा पहुँचने पर चुंद नामक लोहार के यहाँ बरसात के मौसम में कुकुरमुत्ता (Mushroom) खाने के कारण उनका पाचन ख़राब हो गया।
- मृत्यु: 80 वर्ष की आयु में 483 ई.पू. में उनका देहांत कुशीनगर में हुआ। इस घटना को ‘महापरिनिर्वाण’ कहा गया।
- महापरिनिर्वाण स्तूप / महापरिनिर्वाण मंदिर वर्तमान में कुशीनगर में ही स्थित है।
- बुद्ध की मृत्यु के पश्चात् उनके शरीर के अवशेष (Relics) को 8 राजाओं ने प्राप्त किया: मगध (अजातशत्रु), कपिलवस्तु (शाक्य), वैशाली (लिच्छवी), वेठदीप (ब्राह्मण), अलकप्प (बुलि), पावा एवं कुशीनगर (मल्ल), पिप्पलिवन (मोरिय), रामगाँव (कोलिय)।
E. बौद्ध साहित्य (त्रिपिटक)
बौद्ध धर्म के आरंभिक ग्रंथों को ‘त्रिपिटक’ कहा जाता है।
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| पिटक का नाम | संकलनकर्ता | प्रमुख विशेषता एवं विषय |
|---|---|---|
| सुत्तपिटक | आनंद | इसमें बुद्ध की शिक्षाएं एवं उपदेशों का वर्णन है (पाली भाषा)। इसके 5 निकाय हैं: दीघ, मज्झिम, संयुत्त, अगुंतर और खुद्दक। |
| विनयपिटक | उपाली | इसमें बौद्ध धर्म के नियम, कानून, आचार-विचार का वर्णन है (पाली भाषा)। |
| अभिधम्मपिटक | मोग्गलिपुत्त तिस्स | इसमें बौद्ध धर्म के दार्शनिक पक्षों का वर्णन है (पाली भाषा)। ‘यमक’ का संबंध इसी पिटक से है। |
F. बौद्ध संघ एवं 4 प्रमुख बौद्ध संगीतियां
बौद्ध संघ के नियम
- संघ में शामिल होने वाली प्रथम महिला प्रजापती गौतमी थीं।
- संघ में प्रवेश करने की घटना को ‘उपसंपदा’ कहा जाता था।
- संघ की प्रणाली गणतंत्रात्मक थी। मीटिंग के लिए कोरम 20 सदस्य का होना चाहिए था।
4 प्रमुख बौद्ध संगीतियां (Councils)
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| संगीति | समय व स्थान | शासक व अध्यक्ष | विशेषता / कार्य |
|---|---|---|---|
| प्रथम | 483 ई.पू. (राजगीर) | अजातशत्रु / महाकश्यप | सुत्तपिटक एवं विनयपिटक का संकलन। |
| द्वितीय | 383 ई.पू. (वैशाली) | कालाशोक / सबाकामी | बौद्ध भिक्षु संघ का 2 भागों में विभाजन— ‘स्थावीर’ और ‘महासंधिक’। |
| तृतीय | 255 ई.पू. (पाटलीपुत्र) | अशोक / मोग्गलिपुत्त तिस्स | अभिधम्मपिटक का संकलन। |
| चतुर्थ | प्रथम शताब्दी ईस्वी (कुण्डलवन, कश्मीर) | कनिष्क / वसुमित्र (उपाध्यक्ष: अश्वघोष) | बौद्ध धर्म का 2 भागों में स्पष्ट विभाजन— हीनयान और महायान। |
G. हीनयान, महायान एवं अन्य सम्प्रदाय
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| हीनयान (Hinayana) | महायान (Mahayana) |
|---|---|
| • इसे ‘निम्न मार्ग’ या ‘श्रावकयान’ कहते हैं। • ये बुद्ध को एक साधारण मानव मानते थे। • मूर्ति पूजा के विरोधी थे एवं पूर्णतः शाकाहारी थे। • ये लोग अपना उपदेश पाली भाषा में देते थे। • प्रमुख शाखाएं: वैभाषिक एवं सौतांत्रिक। |
• इसे उच्च मार्ग या ‘बोधिसत्व’ कहा गया। • ये बुद्ध को भगवान मानते थे। • मूर्ति पूजा के समर्थक थे। • ये लोग अपना उपदेश संस्कृत भाषा में देते थे। • प्रमुख शाखाएं: माध्यमिक (शून्यवाद) एवं विज्ञानवाद। |
विभिन्न सम्प्रदाय एवं उनके प्रवर्तक (VVI)
- माध्यमिकवाद (शून्यवाद): इसके मुख्य प्रवर्तक नागार्जुन हैं, जिनकी प्रमुख पुस्तक ‘माध्यमिक सूत्र’ है। इसके अन्य प्रवर्तक चन्द्रकीर्ति और आर्य देव थे। नागार्जुन की तुलना ‘मार्टिन लूथर’ से की जाती है।
- विज्ञानवाद: इसकी स्थापना मैत्रेयनाथ (या मैत्रेय) ने की। मैत्रेय को बौद्ध धर्म में ‘भावी बुद्ध’ कहा गया है। इसके अन्य प्रवर्तक असंग, वसुबंधु और वसुमित्र थे।
- वैभाषिक सम्प्रदाय: यह विभाषाशास्त्र ग्रंथ पर आधारित है। इसका उदय कश्मीर में हुआ। इसके प्रमुख प्रवर्तक धर्मत्रात, घोषक, बुद्धदेव, और वसुमित्र थे।
- सौत्रांतिक सम्प्रदाय: यह सुत्तपिटक ग्रंथ पर आधारित था। इसका उदय भी कश्मीर में हुआ और इसके प्रमुख प्रवर्तक ‘कुमारलात’ थे।
- वज्रयान सम्प्रदाय: इसका सर्वाधिक विकास 8वीं शताब्दी में बंगाल में हुआ।
H. बौद्ध धर्म का प्रसार एवं लोकप्रियता के कारण
- बौद्ध धर्म की लोकप्रियता के प्रमुख कारण: जटिल दार्शनिक वाद-विवाद से मुक्त होना, आम जनमानस की भाषा (पालि) में उपदेश देना, मध्यम मार्ग की अवधारणा अपनाना और सामाजिक समानता के सिद्धांत को स्वीकृति प्रदान करना।
- कुषाण शासक कनिष्क के समकालीन बौद्ध विद्वान अश्वघोष, वसुमित्र और पार्श्व थे। इसी समय चीन में बौद्ध धर्म का प्रचार हुआ।
- चीन में प्रचार का श्रेय ‘कश्यप मातंग’ नामक भिक्षु को जाता है। इसके अतिरिक्त ‘धर्मरत्न’ और बाद में ‘कमलशील’ ने भी तिब्बत होते हुए चीन में धर्म प्रसार किया।
- अशोक ने अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को प्रचार के लिए श्रीलंका भेजा।
- सातवाहन काल में ‘महायान’ शाखा का बोलबाला था। गुप्तकाल में भी आर्यदेव, असंग, वसुबंधु, मैत्रेयनाथ और दिग्नाग जैसे विद्वानों ने इसका प्रसार किया।
- हर्षवर्धन महायान बौद्ध धर्म का संरक्षक था और उसने प्रयाग में दो बौद्ध सम्मेलनों का आयोजन किया था।
- पाल शासक बौद्ध धर्म के अंतिम महान संरक्षक थे। पाल वंश के समय ही बौद्ध धर्म में ‘तंत्रवाद’ का विकास हुआ।
I. बौद्ध संघ की प्रमुख शब्दावलियाँ (Terminology)
- अधिकरण: प्रस्ताव पर होने वाले मतभेद।
- गुल्हक: संघ में गुप्त मतदान।
- विवतक: संघ में प्रत्यक्ष मतदान।
- शलाका: पुरुष मतदाता।
- उपोसथ भिक्षु: भिक्षुणियों का धर्म संबंधी वार्ता के लिए इकट्ठा होना।
- उपासक: गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वाले बौद्ध अनुयायी।
- संघराय: भिक्षुओं का विश्राम स्थल।
- संघपरिणायक: संघ का प्रमुख।
- उपझाय: बौद्ध भिक्षु।
- सद्धिविहारिक: बौद्ध भिक्षु जो गुरु के साथ निवास करते हैं।
- अर्हत: जिसने निर्वाण प्राप्त कर लिया हो।
💡 परीक्षा उपयोगी विविध तथ्य (One-Liners)
- प्राचीन काल में बौद्ध शिक्षा के 3 प्रमुख केंद्र थे: नालंदा (बिहार – महायान का केंद्र), वल्लभी (गुजरात – हीनयान का केंद्र), और विक्रमशिला (भागलपुर)।
- अवलोकितेश्वर प्रधान को बौद्ध धर्म में ‘पद्मपाणि’ कहा गया है।
- ‘स्तूप’ शब्द की सबसे पहली जानकारी ऋग्वेद में देखने को मिलती है।
- विश्व का सबसे ऊँचा स्तूप विश्वशांति स्तूप (राजगीर) है, जिसकी ऊंचाई 400 मीटर है (अजातशत्रु द्वारा निर्मित)।
- अशोकाराम विहार का निर्माण अशोक ने पाटलीपुत्र में करवाया था।
- बुद्ध की 80 फुट की मूर्ति गया में जापानियों द्वारा बनवाई गई थी (यह लाल बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से 7 साल में बनी थी)।
- महात्मा बुद्ध की पूर्व जन्म की कथा का संकलन जातक ग्रंथ (पाली भाषा) में मिलता है।
- दीपवंश एवं महावंश: इन ग्रंथों में श्रीलंका (सिंहलद्वीप) का इतिहास और मगध के राजाओं की क्रमबद्ध सूची मिलती है। महावंश के रचयिता भदंत महानाम हैं।
- मिलिन्दपन्हो ग्रंथ: पालि भाषा में लिखे इस ग्रंथ में यूनानी राजा मिनांडर और बौद्ध भिक्षु ‘नागसेन’ के मध्य वार्ता का वर्णन है। इसके लेखक नागसेन हैं। इसमें प्रथम दो शताब्दियों के भारतीय जनजीवन की जानकारी मिलती है।
- बुद्ध दण्डविहीन और शस्त्रविहीन राजशासन के पक्षधर थे। वह जाति-पाति के घोर विरोधी थे, उनका मानना था कि इंसान बड़ा या छोटा ‘कर्म’ से होता है न कि जन्म से।
- क्षणिकवाद सिद्धांत का प्रतिपादन महात्मा बुद्ध के द्वारा किया गया था।
- प्रसिद्ध पुस्तक ‘The Light of Asia’ के लेखक एडविन आर्नोल्ड (Edwin Arnold) हैं।
- भारत में नवबौद्धवाद (Neo-Buddhism) के प्रतिपादक डॉ. भीमराव अंबेडकर थे।