2. सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization)
उत्पत्ति/उदय: भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में।
विस्तार: भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान।
- उत्तर से दक्षिण (N-S): 1400 km
- पश्चिम से पूर्व (W-E): 1600 km
कुल क्षेत्रफल: 12,99,600 वर्ग km।
A. सिंधु घाटी सभ्यता के नामकरण
- हड़प्पा सभ्यता: खुदाई के दौरान प्रथम स्थल ‘हड़प्पा’ ही मिला, इसलिए इस नाम से जाना जाता है।
- सिंधु-सरस्वती सभ्यता: अधिकतम स्थल सिंधु और सरस्वती नदी के किनारे खोजे गए।
- कांस्ययुगीन सभ्यता: यहाँ के लोगों ने ताम्बा में टीन मिलाया -> कांसा का निर्माण किया।
- प्रथम नगरीय क्रान्ति: इसे प्रथम नगरीय क्रान्ति भी कहा जाता है।
B. उत्पत्ति की तिथियों को लेकर इतिहासकारों में मतभेद
| इतिहासकार | निर्धारित तिथि (BC) |
|---|---|
| मार्टिमर व्हीलर | 2500 – 1500 BC |
| DP अग्रवाल | 2350 – 1750 BC (NCERT मान्य है) |
| जॉन मार्शल | 3250 – 2750 BC |
| मैके | 2800 – 2500 BC |
C. इस सभ्यता की उत्पत्ति कैसे हुई? (विदेशी vs देशी मत)
1. विदेशी मत
इतिहासकार: गार्डन चाइल्ड, DP अग्रवाल, मार्टिमर व्हीलर, DD कौसाम्बी।
इनका कहना था कि बाहर के लोग आकर सिंधु सभ्यता को विकसित किए हैं।
- मार्टिमर व्हीलर: सिंधु सभ्यता सुमेरियन (मेसोपोटामिया) के उपनिवेश थे।
- गार्डन चाइल्ड: सुमेरियन सभ्यता के लोग जब भारत में आये, यहाँ की भौगोलिक एवं जलवायु दशा को देखते हुए अपने विशेषताओं में परिवर्तन को लेकर बस गए।
- DD कौसाम्बी: सिंधु सभ्यता, मिस्र की सभ्यता, सुमेरियन सभ्यता को विकसित करने वाले एक ही लोग थे जो सुमेरियन लोग थे।
| सुमेरियन सभ्यता | सिंधु घाटी सभ्यता |
|---|---|
| • मंदिर पुजारियों के अधीन होता था। • लिपि ‘V’ आकार की थी। • नगर योजना अर्धविकसित था। • ईंट धूप में पकाई गई। • मोहर बेलनाकार रूप में है। |
• मंदिर का प्रमाण नहीं मिला है। • लिपि ‘U’ आकार की थी। (यहाँ पर V का प्रमाण नहीं मिला)। • नगर नियोजन काफी विकसित था। • ईंटें भट्ठे में पकाई गई। • मोहर वर्गाकार आकार में है। • ईंटों के आकार का अनुपात 4:2:1 है। |
2. देशी मत
इनका मानना है कि सिंधु घाटी सभ्यता की उत्पत्ति भारत से हुआ।
सिंधु सभ्यता के निर्माता: द्रविड़ प्रजाति के थे (ये भूमध्यसागरीय थे)।
- सिंधु सभ्यता में 4 प्रजातियाँ पाई गई: 1. काकेसस, 2. निग्रेटो, 3. अल्पाइन, 4. मंगोलायड।
- द्रविड़ प्रजाति में भी मूर्तिपूजा प्रचलित था और सिंधु घाटी में भी।
- द्रविड़ प्रजाति के लोग ग्रामीण थे, जबकि सिंधु घाटी के लोग शहरी।
भारतीय इतिहासकार: अमलानंद घोष, DP अग्रवाल, आल्चिन दंपत्ति।
इन तीनों ने कहा: “इन लोगों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता की उत्पत्ति राजस्थान के सोथी संस्कृति से हुआ।” (राजस्थान में सिंधु घाटी का एक स्थल है जिसका नाम कालीबंगा है। सोथी संस्कृति एवं कालीबंगा का मृदभांड एक समान है)।
विदेशी इतिहासकार: फेयर सर्विस महोदय। इनके अनुसार उत्पत्ति बलूचिस्तान की कुली एवं नाल संस्कृति (ग्रामीण लोग) से हुआ।
D. नामकरण एवं पुरातात्विक खोज का इतिहास
- एलेक्जेंडर कनिंघम: पेशे से इंजीनियर। इन्होने सारनाथ व साँची स्तूप की खुदाई की। 1861 में लार्ड कैनिंग के सहयोग से ‘भारतीय पुरातत्व विभाग’ की स्थापना की। (कनिंघम को भारतीय पुरातत्व विभाग का जनक कहा जाता है)। 1885 तक ये महानिदेशक रहे।
- 1902 में लार्ड कर्जन ने: नाम बदलकर ‘भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग’ रखा और इसका अध्यक्ष सर जॉन मार्शल को बनाया।
- जॉन मार्शल ने: दयाराम सहनी को पाक में उत्खनन का आदेश दिया।
- 1921: दयाराम सहनी ने पहला स्थल खोजा – जिसका नाम हड़प्पा था।
- 1922: राखाल दास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की।
💡 Factual Questions (तथ्यात्मक प्रश्न)
- जॉन मार्शल: पुस्तक – ‘लंदन वीकली’ (इसमें नाम सिंधु सभ्यता रखा)।
- मुगल रफीक: इस सभ्यता का नाम ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ रखा।
- इतिहास विज्ञान सम्मेलन: इसमें नाम ‘हड़प्पा सभ्यता’ रखा गया।
- 1784: विलियम जोन्स ने ‘एशियाटिक सोसाइटी’ की स्थापना की।
- 1826: चार्ल्स मैसन ने हड़प्पा टीला का सर्वेक्षण किया।
- 1853: कनिंघम ने हड़प्पा क्षेत्र में वस्तुओ को खोजने का प्रयास किया।
- 1856: विलियम ब्रंटन + जॉन ब्रंटन (इन दोनों भाइयों को कराची रेलवे ट्रैक पर कुछ ईंटें मिली)।
E. सिंधु घाटी सभ्यता के स्थल कहाँ-कहाँ पाए गए?
- अफगानिस्तान से 2 स्थल: 1. मुंडीगाक, 2. शोर्टुघई (पंचनदी के किनारे)। (शोर्टुघई से नहरों का प्रमाण, कीमती नगीना का प्रमाण, सोने का टुकड़ा का प्रमाण मिला है)।
- पाकिस्तान से: 1000 स्थल।
- भारत से: 500 स्थल खोजा गया।
🌟 पाक के बलूचिस्तान से 8 स्थल (TRICK)
“मे रा सु त बुलि न डाबर बालक है”
मेहरगढ़, राना घुंडई, सुतकागेंडोर, सुतकाकोह, कुल्लि नौल, डाबरकोट, बालाकोट।
- सुतकागेंडोर: मकरान तट पर स्थित। यह सिंधु सभ्यता का सबसे पश्चिमी स्थल है। दाश्क नदी के किनारे बसा है। खोज: RL स्टाईन द्वारा। इसका इस्तेमाल बंदरगाह के रूप में होता था।
- बालाकोट: सीप उद्योग के लिए प्रसिद्ध।
- पाक के सिंध प्रांत से 8 स्थल: मोहनजोदड़ो, जुदेरजोदड़ो, लोहमजोदड़ो, चन्हुदड़ो, आमरी, कोटदीजी, अलीमुराद, अलहदिनो।
- भारत में विस्तार: कश्मीर, पंजाब, Haryana, गुजरात, राजस्थान, UP, महाराष्ट्र।
- 7 नगरीय स्थल: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, धौलावीरा, कालीबंगा, चन्हुदड़ो, बनवाली।
F. नगर नियोजन (Town Planning)
सिंधु घाटी सभ्यता के नगर 2 भागों में बंटे हैं:
| पश्चिमी भाग | पूर्वी भाग |
|---|---|
| • इसे ‘दुर्ग टीला’ कहा जाता है। • यहाँ केवल पुरोहित वर्ग निवास करते थे। • इसके चारों तरफ चारदीवारी होती थी। |
• यह नीचे खाई में स्थित। इसे ‘दुर्ग नगर’ की संज्ञा। • व्यापारी वर्ग, आम जनता, प्रशासनिक वर्ग निवास करते थे। • कोई भी चारदीवारी नहीं होता था। |
G. प्रमुख स्थल और वहाँ से मिले प्रमाण (VVI)
1. हड़प्पा स्थल के बारे में
- पाक के मोंटगोमरी जिला में। रावी नदी के किनारे बसा है। खोज: रायबहादुर दयाराम सहनी (1921)।
- मिले प्रमाण: 12 कमरा वाला अन्नागार, मजदूर आवास, 18 वृत्ताकार चबूतरा, गेहूँ एवं जौ का दाना, R-आकार का कब्रिस्तान, H-आकार का कब्रिस्तान, मातृदेवी की मूर्ति, जली हुई ईंट का आवास, लिंग पूजन का प्रमाण, तांबे की बैलगाड़ी, अभिलेख वाला मोहर, गठिया रोग का प्रमाण, गरुड़ पक्षी, तांबे की भट्टी, नटराज की प्रतिमा, सोना का कंगन, दूध पिलाती हिरण, मछली की हड्डी।
2. अन्य विशिष्ट प्रमाण
- सिंध प्रांत के आमरी स्थल से -> बारहसिंगा।
- जुरीदरदड़ो से -> स्टेडियम।
- बलूचिस्तान के नौसारो से -> सिंदूर का प्रमाण।
- लोथल से -> मिट्टी की नाव का प्रमाण, मुख्य सड़क की ओर खुलता दरवाजा।
- धौलावीरा से -> 16 जलाशय का प्रमाण, ब्लैक बोर्ड (सूचना पट्ट)।
💡 नदियों के किनारे बसे प्रमुख स्थल
- सिंधु नदी: मोहनजोदड़ो, चन्हुदड़ो, आमरी, कोटदीजी
- चेनाब नदी: मांडा (J&K)
- रावी नदी: हड़प्पा
- सरस्वती नदी: बनवाली, कालीबंगा, राखीगढ़ी
- भोगवा नदी: लोथल
- हिण्डन नदी: आलमगीरपुर (UP)
- ताप्ती नदी: मालवन (गुजरात)
- भादर नदी: रंगपुर (गुजरात)
- गोदावरी नदी: दैमाबाद (महाराष्ट्र)
- दाश्क नदी: सुतकागेंडोर (पाक)
H. जनजीवन, समाज, व्यापार एवं मुहरें
- सड़कें: एक दूसरे को समकोण पर काटती थी (ग्रिड प्रणाली)। केवल मोहनजोदड़ो में पक्की ईंट की सड़क का प्रमाण मिला है।
- मकान: पक्की ईंटों से निर्मित (अधिकतम 2 मंजिला), आकार- आयताकार। मकान के दरवाजे पीछे की ओर खुलते थे (केवल लोथल को छोड़कर)।
- वस्त्र: सूती एवं ऊनी वस्त्रों का इस्तेमाल।
- श्रृंगार: हड़प्पा से -> महिलाओं के श्रृंगार दान और काजल का प्रमाण। मोहनजोदड़ो से -> चाँदी की चूड़ी।
- समाज: मातृसत्तात्मक समाज था। लोग शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों थे।
- व्यापार: मेसोपोटामिया, मिस्र, फारस जैसे देशों के साथ। आयात: बहुमूल्य पत्थर, सोना, चाँदी, ताम्बा, सीसा। निर्यात: हाथी दाँत, सूती वस्त्र, मनके।
- मुहरें (Seals): कुल 2500 मुहर प्राप्त (1200 केवल मोहनजोदड़ो से)। आकार: वर्गाकार (सर्वाधिक), आयताकार, बेलनाकार। इन मुहरों पर लिपि एवं पशु दोनों का चित्रण होता था। सर्वाधिक अभिलेखीय मोहर हड़प्पा से मिला। अधिकांश मोहर सेलखड़ी पत्थर से बना था।
- मोहरों पर चित्र: 1 सींग वाले बैल का चित्रण सर्वाधिक। इसके अलावा हाथी, बाघ, गैंडा का चित्र। (नोट: किसी भी मुहर पर गाय, घोड़ा, ऊँट, शेर का चित्र नहीं मिलता है)। बेलनाकार मोहर सुमेरियन सभ्यता से मोहनजोदड़ो एवं लोथल से मिले।
I. पतन के कारण (इतिहासकारों का मत)
| इतिहासकार | पतन का कारण |
|---|---|
| मार्टिमर व्हीलर + मैके + मार्शल | आर्यों के आक्रमण से |
| मार्शल + मैके + SR राव | बाढ़ के कारण (NCERT मान्य) |
| RL स्टाईन + अमलानंद घोष | जलवायु परिवर्तन के कारण |
| लैम्बरिक महोदय | जनसंख्या में वृद्धि के कारण |
| जॉर्ज डेल्स | प्लेट विवर्तनिकी के कारण |
| जॉन मार्शल | प्रशासनिक लापरवाही |
| अमलानंद घोष | नदी मार्ग में परिवर्तन |
J. परीक्षा उपयोगी विविध तथ्य (VVI Points)
- लोथल एवं सुतकोतदा एकमात्र स्थल है जहाँ से एक साथ चारदीवारी का प्रमाण मिला।
- सुतकोतदा एवं कालीबंगा का पतन भूकंप से हुआ।
- रंगपुर एवं लोथल से धान की भूसी / चावल का दाना मिला।
- कोटदीजी से अलंकृत खंबे एवं पत्थर के तीर का प्रमाण।
- मोहनजोदड़ो के स्नानागार की माप: लम्बाई- 11.88m, चौड़ाई- 7.01m, गहराई- 2.43m (कमरा- 27)।
- सिंधु घाटी की सबसे बड़ी इमारत: स्नानागार (या अन्नागार)।
- धर्म/पूजा: भूत एवं अग्नि पूजा, पशुओं की बलि, पुनर्जन्म एवं अंधविश्वास में भरोसा करते थे।
- मोहनजोदड़ो से एक सील पर तीन मुख वाले देवता (पशुपति) की मूर्ति मिली (चारों ओर 4 जानवर: हाथी, गैंडा, चीता, भैंसा)।
- मिठास के लिए शहद का इस्तेमाल।
- सुतकोतदा, कालीबंगा एवं लोथल से घोड़ा का अस्थि पंजर का प्रमाण।
- तौल का अनुपात 16 के गुणज में था। ये लोहा से परिचित नहीं थे।
- कालीबंगा: एकमात्र शहर है जिसका निचला शहर भी किले से घिरा है। यहाँ से अग्निपूजा का प्रमाण मिला।
- सिंधु घाटी में पर्दा प्रथा एवं वेश्यावृत्ति का प्रचलन था।
- शव संस्कार: हड़प्पा में शव को दफनाया जाता था, मोहनजोदड़ो में शव को जलाया जाता था।
- आग में पके मिट्टी के बर्तन को टेराकोटा कहा गया।
- हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो को एक विस्तृत राज्य की जुड़वा राजधानी ‘पिगट’ ने कहा।
- सिंधु घाटी सभ्यता से स्वास्तिक चिन्ह का प्रमाण मिला।