18. वाक्य विचार और शुद्धीकरण

वाक्य विचार: शब्दों के सार्थक समूह को ‘वाक्य’ कहते हैं। वाक्य शुद्धि का अर्थ है- व्याकरण के नियमों के अनुसार वाक्य को शुद्ध करना। परीक्षा में एक गलत वाक्य देकर उसका सही रूप (शुद्ध वाक्य) पूछा जाता है।

A. अशुद्धियाँ पहचानने के महत्वपूर्ण नियम

अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य कारण
वह सोमवार के दिन आएगा। वह सोमवार को आएगा। ‘दिन’ अनावश्यक है।
साहित्य और जीवन का घोर संबंध है। साहित्य और जीवन का घनिष्ठ संबंध है। ‘घोर’ नकारात्मक है।
मेरे को घर जाना है। मुझे घर जाना है। ‘मेरे को’ व्याकरणिक गलत है।
यहाँ शुद्ध गाय का दूध मिलता है। यहाँ गाय का शुद्ध दूध मिलता है। पदक्रम संबंधी त्रुटि।
वह विदुषी महिला है। वह विदुषी है। ‘महिला’ अनावश्यक है।

B. लिंग-वचन के महत्वपूर्ण नियम

  • अशुद्ध: मैं मेरी कलम से लिखता हूँ। | शुद्ध: मैं अपनी कलम से लिखता हूँ।
  • अशुद्ध: वहाँ बहुत सारे लोग आ गए थे। | शुद्ध: वहाँ बहुत से लोग आ गए थे।
  • अशुद्ध: उसके प्राण निकल गया। | शुद्ध: उसके प्राण निकल गए (प्राण हमेशा बहुवचन)।
  • अशुद्ध: मैंने हस्ताक्षर कर दिया। | शुद्ध: मैंने हस्ताक्षर कर दिए (हस्ताक्षर हमेशा बहुवचन)।

C. अक्सर पूछी जाने वाली वर्तनी (Spelling)

  • अशुद्ध: उज्जवल | शुद्ध: उज्ज्वल
  • अशुद्ध: कवियत्री | शुद्ध: कवयित्री
  • अशुद्ध: आशीर्वाद | शुद्ध: आशीर्वाद
  • अशुद्ध: कालिदास | शुद्ध: कालिदास
  • अशुद्ध: ज्योत्सना | शुद्ध: ज्योत्स्ना
  • अशुद्ध: सन्यास | शुद्ध: संन्यास
  • 💡 VVI – वाक्य शुद्धि पहचानने की ट्रिक
    • अनावश्यक शब्द: यदि वाक्य में ‘शायद’ और ‘संभवतः’ एक साथ आएं, तो उन्हें हटा दें। (उदा: शायद वह संभवतः आएगा – गलत है)।
    • क्रिया का कर्ता से मेल: कर्ता यदि पुल्लिंग है तो क्रिया पुल्लिंग, और यदि कर्ता बहुवचन है तो क्रिया भी बहुवचन होनी चाहिए।
    • क्रम व्यवस्था: हिंदी में पहले ‘कर्ता’ + ‘कर्म’ + ‘क्रिया’ का क्रम होता है। इस क्रम को न बदलें।