12. संधि (Sandhi) और प्रकार

उपसर्ग: सम् + धि = सन्धि
शाब्दिक अर्थ: मेल / जोड़
  • दो समीपवर्ती या निकटवर्ती वर्णों के आपस में मेल से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे सन्धि कहते हैं।
    Ex— विद्या + अर्थी (ज्ञान चाहने वाला/इच्छुक) = विद्यार्थी
  • सन्धि हुए शब्दों के अलग-अलग होना सन्धि विच्छेद कहलाता है।
    Ex— गणेश (गुण स्वर सन्धि – ए) = गण + ईश (अ/आ + इ/ई)

सन्धि के भेद / प्रकार

स्वर सन्धि व्यंजन सन्धि विसर्ग सन्धि
स्वर के मेल स्वर से होने पर जो विकार उत्पन्न होता है।
(स्वर + स्वर = स्वर)
Ex— विद्या + आलय = विद्यालय
स्वर/व्यंजन का मेल व्यंजन वर्ण से होने पर जो विकार उत्पन्न होता है।
(स्वर/व्यंजन + व्यंजन = व्यंजन)
Ex— वाक् + ईश = वागीश
दिक् + गज = दिग्गज
सन्धि के बीच में विसर्ग (:) का प्रयोग हो।
Ex— मनः + रथ = मनोरथ

1. स्वर सन्धि (स्वर + स्वर = स्वर सन्धि)

स्वर सन्धि के 5 भेद (पहचान):
  • ① दीर्घ स्वर सन्धि: आ, ई, ऊ की मात्रा
  • ② गुण स्वर सन्धि: ए, ओ की मात्रा / अर् का उच्चारण
  • ③ यण स्वर सन्धि: य, व, र वर्ण
  • ④ वृद्धि स्वर सन्धि: ऐ, औ की मात्रा
  • ⑤ अयादि स्वर सन्धि: अय, आय, अव, आव का उच्चारण
① दीर्घ स्वर सन्धि
  • युगांतर = युग + अंतर
  • विद्यालय = विद्या + आलय
  • कपीश = कपि + ईश
  • भानुदय = भानु + उदय
  • उदयाचल = उदय + अचल
  • देवालय = देव + आलय
  • तथापि = तथा + अपि
  • कवीन्द्र = कवि + इन्द्र
  • गिरीश = गिरि + ईश
  • रजनीश = रजनी + ईश
② गुण स्वर सन्धि

नियम: अ+इ=ए, अ+ई=ए, आ+इ=ए, आ+ई=ए | अ+उ=ओ, आ+उ=ओ, अ+ऊ=ओ, आ+ऊ=ओ | अ+ऋ=अर्, आ+ऋ=अर्

  • गणेश = गण + ईश
  • महेश = महा + ईश
  • सुरेन्द्र = सुर + इन्द्र
  • महेन्द्र = महा + इन्द्र
  • नरेन्द्र = नर + इन्द्र
  • सुरेश = सुर + ईश
  • सूर्योदय = सूर्य + उदय
  • सर्वोत्तम = सर्व + उत्तम
  • महर्षि = महा + ऋषि
  • देवर्षि = देव + ऋषि
③ यण स्वर सन्धि

नियम: इ/ई + असमान/भिन्न स्वर = य में परिवर्तित होगा | उ/ऊ + असमान स्वर = व | ऋ + असमान स्वर = र | लृ + असमान स्वर = ल

  • अत्यल्प = अति + अल्प
  • स्वल्प = सु + अल्प
  • यद्यपि = यदि + अपि
  • स्वागत = सु + आगत
  • प्रत्यक्ष = प्रति + अक्ष
  • रीत्यनुसार = रीति + अनुसार
  • प्रत्यारोपण = प्रति + आरोपण
  • अभ्युदय = अभि + उदय
  • अत्युत्तम = अति + उत्तम
  • अन्वेषण = अनु + एषण
  • न्यून = नि + ऊन
  • पितृनुमति = पितृ + अनुमति
  • मात्राज्ञा = मातृ + आज्ञा
④ वृद्धि स्वर सन्धि

नियम: अ/आ + ए/ऐ तो ऐ तथा ओ/औ तो औ में हो जाते हैं।

  • एकैक = एक + एक
  • महैश्वर्य = महा + ऐश्वर्य
  • महौषद = महा + औषध
  • तथैव = तथा + एव
⑤ अयादि स्वर सन्धि

नियम: ए/ऐ/ओ/औ के बाद असमान या भिन्न स्वर आये तो इनका परिवर्तन अय/आय/अव/आव में हो जाता है।

  • नयन = ने + अन (न्+ए)
  • नायक = नै + अक
  • पवन = पो + अन
  • पावक = पौ + अक
  • गवीश = गो + ईश
  • नायिका = नै + इका
  • गायिका = गै + इका
  • नाविक = नौ + इक

2. व्यंजन सन्धि / हल् सन्धि

व्यंजन का मेल स्वर या व्यंजन से होने पर जो विकार या परिवर्तन उत्पन्न होता है उसे व्यंजन सन्धि कहा जाता है।

  • 1. व्यंजन का मेल स्वर से हो – पूरा अक्षर:
    वाक् + ईश = वागीश
    जगत् + नाथ = जगन्नाथ
    व्यंजन का मेल व्यंजन से -> हो अर्द्धस्वर / आधा अक्षर: दिक् + गज = दिग्गज़ / दिग्गज
  • 2. यदि म् व्यंजन के बाद – अन्तस्थ/ऊष्म/स्वर आये तो म् के स्थान पर अनुस्वार हो जाता है:
    सम् + विधान = संविधान
    सम् + यम = संयम
    सम् + तप्त = संतप्त
    सम् + सार = संसार
    सम् + हार = संहार
    अलम् + कार = अलंकार
  • 3. म् के बाद म् आने पर कोई परिवर्तन नहीं होता अथवा म् द्वित्व हो जाता है:
    सम् + मान = सम्मान
    सम् + मति = सम्मति
  • 4. यदि किसी भी वर्ग के पहले अक्षर के बाद – न/म आये तो वर्ग का पहला अक्षर अपने ही वर्ग के पंचम् अक्षर में बदल जाता है:
    सत् + मार्ग = सन्मार्ग
    जगत् + नाथ = जगन्नाथ
    उत् + मूलन = उन्मूलन
    चित् + मय = चिन्मय
  • 5. त् के बाद ल आये तो त् के स्थान पर ल् हो जाता है:
    उत् + लेख = उल्लेख
    उत् + लास = उल्लास
    तत् + लीन = तल्लीन
    उत् + लंघन = उल्लंघन
  • 6. त् के बाद च/छ आये तो त् के स्थान पर च् हो जाता है:
    उत् + चारण = उच्चारण
    सत् + चरित्र = सच्चरित्र
  • 7. त् के बाद ज/झ आये तो त् के स्थान पर ज् हो जाता है:
    सत् + जन = सज्जन
    विपत् + जाल = विपज्जाल
    उत् + ज्वल = उज्ज्वल
  • 8. त् के बाद ड आये तो त् के स्थान पर ड् हो जाता है:
    उत् + डयन = उड्डयन
  • 9. त् के बाद ट/ठ आये तो त् के स्थान पर ट् हो जाता है:
    बृहत् + टीका = बृहट्टीका
    तत् + टीका = तट्टीका
  • 10. त् के बाद श आये तो त् के स्थान पर च् तथा श का परिवर्तन छ् में होगा:
    सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र
    उत् + श्वास = उच्छ्वास
  • 11. त् के बाद ह आये तो त् के स्थान पर द् तथा ह का ध् में हो जाता है:
    उत् + हार = उद्धार
    उत् + हरण = उद्धरण
    तत् + हित = तद्धित
  • 12. स के पहले अ/आ के अलावा अन्य स्वर आये तो स के स्थान पर ष् हो जाता है:
    वि + सम = विषम
    अभि + सेक = अभिषेक
    नि + सेध = निषेध
  • 13. किसी भी स्वर के बाद ‘छ’ आये तो छ से पहले च् जोड़ देते हैं:
    परि + छेद = परिच्छेद
    अनु + छेद = अनुच्छेद
    स्व + छंद = स्वच्छंद
  • 14. यदि शब्द में कहीं भी र्/ष् आया हो तथा बाद के शब्द में न आया हो तथा न से पहले (क,ख,ग,घ, प,फ,ब,भ, म,ल,व) आये तो न के स्थान पर ण् हो जाता है:
    राम + अयन = रामायण
    भर् + अन = भरण

3. विसर्ग सन्धि

सन्धि के वर्णों में यदि विसर्ग का प्रयोग हो। विसर्ग के बाद स्वर या व्यंजन के आने पर जो परिवर्तन होता है उसे विसर्ग (:) सन्धि कहते हैं।
Ex— मनः + रथ = मनोरथ, अधः + गति = अधोगति, मनः + विकार = मनोविकार, मनः + हर = मनोहर
अपवाद: पुनः + जन्म = पुनर्जन्म, अन्तः + धान = अन्तर्धान
  • नियम: विसर्ग के पहले ‘अ’ तथा विसर्ग के बाद क,ख,प,फ आये तो विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
    अन्तः + करण = अन्तःकरण
    प्रातः + काल = प्रातःकाल
    अपवाद: नमः तथा पुरः में विसर्ग का स् हो जाता है। (नमः + कार = नमस्कार, पुरः + कार = पुरस्कार)
  • नियम: यदि विसर्ग के बाद च/छ आये तो विसर्ग का श् हो जाता है।
    हरिः + चन्द्र = हरिश्चन्द्र
    निः + चल = निश्चल
    निः + छल = निश्छल
    निः + चय = निश्चय
    दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
  • नियम: यदि विसर्ग के बाद ट/ठ आये तो विसर्ग के स्थान पर आधा ष् हो जायेगा।
    धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
    दुः + ट = दुष्ट
    निः + ठुर = निष्ठुर
  • नियम: यदि विसर्ग के पहले इ/उ आये तथा विसर्ग के बाद (क,ख,प,फ) आये तो विसर्ग के स्थान पर आधा ष् हो जाता है।
    निः + कपट = निष्कपट
    आविः + कार = आविष्कार
    दुः + परिणाम = दुष्परिणाम
  • नियम: यदि विसर्ग के बाद त,थ,स आया हो तो विसर्ग के स्थान पर स् हो जाता है।
    नमः + ते = नमस्ते
    दुः + साहस = दुस्साहस
    निः + तेज = निस्तेज
  • नियम: यदि विसर्ग के पहले अ/ई आये तथा विसर्ग के बाद र आये तो अ/ई का दीर्घ तथा विसर्ग गायब हो जाता है।
    निः + रोग = नीरोग
    निः + रज = नीरज
    निः + रव = नीरव
  • नियम: यदि विसर्ग के पहले ‘अ’ आये तथा विसर्ग के बाद ‘अ’ को छोड़कर कोई अन्य स्वर आये तो विसर्ग का लोप हो जाता है तथा शेष कोई परिवर्तन नहीं होता है।
    अतः + एव = अतएव
  • नियम: विसर्ग के पहले अ/आ को छोड़कर कोई अन्य स्वर आये तथा विसर्ग के बाद कोई भी स्वर/सघोष वर्ण/अन्तस्थ व्यंजन अथवा ह आये तो विसर्ग के स्थान पर र् हो जाता है।
    आशीः + वाद = आशीर्वाद
    दुः + जन = दुर्जन
    दुः + बल = दुर्बल
    दुः + आत्मा = दुरात्मा
    दुः + आशा = दुराशा
    निः + बल = निर्बल
    निः + आधार = निराधार
  • नियम: यदि विसर्ग के पहले अ,इ,उ तथा विसर्ग के बाद श,ष,स आये तो विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता अथवा उसी वर्ण का द्वित्व हो जाता है।
    दुः + शासन = दुःशासन
    अतः + शक्ति = अन्तःशक्ति