परिभाषा: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक, काल आदि के कारण **कोई विकार या परिवर्तन नहीं होता**, उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं।
सरल शब्दों में: ये शब्द हर परिस्थिति में हमेशा एक जैसे (ज्यों के त्यों) रहते हैं।
जैसे: धीरे-धीरे, आज, कल, और, तथा, किन्तु, परन्तु, के पास, अरे!, शाबाश आदि।
Ex—
• लड़का धीरे-धीरे चलता है। (पुल्लिंग, एकवचन)
• लड़कियाँ धीरे-धीरे चलती हैं। (स्त्रीलिंग, बहुवचन)
(यहाँ संज्ञा बदलने पर भी ‘धीरे-धीरे’ शब्द में कोई बदलाव नहीं हुआ, अतः यह अव्यय है)।
A. अव्यय के भेद / प्रकार – 5
आधुनिक व्याकरण के अनुसार अव्यय के मुख्य 5 भेद माने जाते हैं:
- क्रियाविशेषण अव्यय
- संबंधबोधक अव्यय
- समुच्चयबोधक अव्यय
- विस्मयादिबोधक अव्यय
- निपात अव्यय (VVI for Higher Exams)
B. पाँचों भेदों का प्रचुर उदाहरणों के साथ विस्तृत वर्णन
जो अव्यय शब्द क्रिया (Verb) की विशेषता बताते हैं, उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। इसके मुख्य 4 उप-भेद होते हैं (रट लें):
- ① कालवाचक क्रियाविशेषण (समय का बोध): यह क्रिया के होने का समय बताता है। (पहचान के लिए क्रिया पर ‘कब’ का प्रश्न करें)।
उदाहरण शब्द: आज, कल, परसों, अब, जब, तब, हमेशा, रोज, प्रतिदिन, सायंकाल, लगातार, अभी-अभी, बार-बार।
वाक्य प्रयोग: वह रोज पढ़ता है। | श्याम अभी-अभी आया है। | परीक्षा कल होगी। | वह बार-बार झूठ बोलता है। - ② स्थानवाचक क्रियाविशेषण (जगह का बोध): यह क्रिया के होने का स्थान या दिशा बताता है। (क्रिया पर ‘कहाँ’ का प्रश्न करें)।
उदाहरण शब्द: यहाँ, वहाँ, कहाँ, जहाँ, आगे, पीछे, ऊपर, नीचे, बाहर, भीतर, पास, दूर, इधर, उधर, दाएं, बाएं।
वाक्य प्रयोग: तुम वहाँ बैठो। | बच्चे बाहर खेल रहे हैं। | मोहन ऊपर सो रहा है। | वह इधर-उधर घूम रहा है। - ③ परिमाणवाचक क्रियाविशेषण (मात्रा का बोध): यह क्रिया की मात्रा या नाप-तौल बताता है। (क्रिया पर ‘कितना’ का प्रश्न करें)।
उदाहरण शब्द: बहुत, कम, थोड़ा, जरा, अत्यंत, पर्याप्त, केवल, बस, इतना, उतना, जितना, अति, अत्यधिक, बारी-बारी।
वाक्य प्रयोग: तुम कम बोला करो। | वह अत्यंत सुंदर लिखता है। | मुझे थोड़ा आराम करने दो। | उसने पर्याप्त खा लिया है। - ④ रीतिवाचक क्रियाविशेषण (ढंग/तरीके का बोध): यह क्रिया के होने की रीति, शैली या ढंग बताता है। (क्रिया पर ‘कैसे’ का प्रश्न करें)।
उदाहरण शब्द: धीरे-धीरे, अचानक, एकाएक, ध्यानपूर्वक, तेज़, अवश्य, सचमुच, फटाफट, शांतिपूर्वक, सहसा, ठीक, कदाचित।
वाक्य प्रयोग: कछुआ धीरे-धीरे चलता है। | डाकू अचानक आ गए। | छात्र ध्यानपूर्वक सुन रहे हैं। | घोड़ा तेज़ दौड़ता है।
जो अव्यय शब्द संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों या संज्ञाओं से जोड़ते हैं। (इनके पहले अक्सर ‘के’, ‘की’, ‘से’ विभक्ति चिन्ह लगा होता है)।
- उदाहरण शब्द: के पास, के दूर, के बिना, के साथ, के आगे, के पीछे, की ओर, के सामने, के विपरीत, के बदले, के सहारे।
- वाक्य प्रयोग 1: राम के बिना श्याम नहीं जाएगा। (राम का संबंध श्याम से जोड़ा गया)।
- वाक्य प्रयोग 2: मेरे घर के सामने एक बगीचा है।
- वाक्य प्रयोग 3: धन के बिना कोई नहीं पूछता।
- वाक्य प्रयोग 4: विद्यालय की ओर चोर भागे।
- वाक्य प्रयोग 5: वह लाठी के सहारे चल रहा है।
जो अव्यय शब्द दो शब्दों, वाक्यांशों या दो वाक्यों को आपस में जोड़ने (Connect) का कार्य करते हैं। इसके 2 मुख्य भेद होते हैं:
| उप-भेद | नियम व पहचान शब्द | प्रचुर उदाहरण (Examples) |
|---|---|---|
| (I) समानाधिकरण समुच्चयबोधक |
समान अधिकार वाले स्वतंत्र वाक्यों या शब्दों को जोड़ते हैं। शब्द: और, तथा, एवं, या, अथवा, किन्तु, परन्तु, लेकिन, इसलिए, अतः। |
• राम और लक्ष्मण भाई थे। • उसने मेहनत की परन्तु असफल रहा। • तुम चाय पीओगे या कॉफी? • वह बीमार था इसलिए स्कूल नहीं आया। |
| (II) व्यधिकरण समुच्चयबोधक |
एक मुख्य वाक्य में एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्यों को जोड़ते हैं। शब्द: कि, क्योंकि, ताकि, यद्यपि-तथापि, मानो, जो, तो, अर्थात्। |
• शिक्षक ने कहा कि कल छुट्टी है। • वह रुक गया क्योंकि वह थक गया था। • धीरे चलो ताकि गिर न पड़ो। • यद्यपि वह गरीब है तथापि ईमानदार है। |
जिन अव्यय शब्दों से हर्ष, शोक, विस्मय (आश्चर्य), घृणा, लज्जा, भय आदि मनोभाव प्रकट होते हैं। इनके साथ हमेशा विस्मयादिबोधक चिन्ह (!) का प्रयोग होता है। वाक्य के अर्थ से इनका सीधा संबंध नहीं होता।
- हर्ष बोधक (खुशी): वाह!, आहा!, शाबाश!, धन्य!
Ex: वाह! क्या स्वाद है। | शाबाश! तुमने मैच जीत लिया। - शोक/पीड़ा बोधक: हाय!, आह!, हे राम!, ओफ़!, त्राहि-त्राहि।
Ex: हाय! अब मेरा क्या होगा। | ओफ़! बहुत दर्द है। - आश्चर्य बोधक: अरे!, क्या!, ओहो!, सचमुच!
Ex: अरे! तुम कब आए? | क्या! वह पास हो गया? - घृणा/तिरस्कार बोधक: छी-छी!, धिक्कार!, हट!, दूर हो!
Ex: छी-छी! यहाँ कितनी गंदगी है। | धिक्कार! है ऐसे जीवन पर। - सम्बोधन बोधक: अजी!, अरी!, ओ!, रे!
Ex: अजी! सुनते हो? | ओ भाई! इधर आओ।
जो अव्यय शब्द किसी शब्द या पद के बाद लगकर उसके अर्थ में **विशेष बल (Emphasis)** पैदा कर देते हैं, उन्हें निपात कहते हैं। यह वाक्य को नया भाव प्रदान करता है।
- मुख्य निपात शब्द: ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, केवल, काश, जी, मत।
- वाक्य प्रयोग 1 (ही): राम ने ही रावण को मारा था। (बल राम पर है – केवल राम ने)।
- वाक्य प्रयोग 2 (भी): रमेश भी दिल्ली जाएगा। (यानी अन्य लोगों के साथ रमेश भी जाएगा)।
- वाक्य प्रयोग 3 (तो): तुमने तो कमाल कर दिया। | वह आया तो था।
- वाक्य प्रयोग 4 (तक): उसने मुझसे बात तक नहीं की।
- वाक्य प्रयोग 5 (मात्र/भर/केवल): मुझे मात्र दस रुपये चाहिए। | उसने जीवन भर संघर्ष किया।
- वाक्य प्रयोग 6 (निषेध): वहाँ मत जाओ।
🌟 अव्यय के गूढ़ नियम (कन्फ्यूजन दूर करें)
- 1. क्रियाविशेषण vs संबंधबोधक में सबसे बड़ा कन्फ्यूजन:
कई शब्द (जैसे: आगे, पीछे, पास, सामने, बाहर) दोनों श्रेणियों में आते हैं। पहचान का अचूक नियम देखिए:
• जब ये शब्द बिना किसी विभक्ति चिन्ह के सीधे क्रिया की विशेषता बताएं, तो ‘क्रियाविशेषण’ होंगे।
Ex: वह बाहर बैठा है। / तुम आगे चलो।
• जब इनके पहले ‘के’, ‘की’, ‘से’ आदि लग जाए और ये दो संज्ञाओं में संबंध बताएं, तो ‘संबंधबोधक’ होंगे।
Ex: वह घर के बाहर बैठा है। / सोहन राम के आगे चल रहा है। - 2. शब्दों की पुनरावृत्ति (रातों-रात, धीरे-धीरे):
UPSC/BPSC में अक्सर पूछा जाता है कि ‘रातों-रात’ या ‘धीरे-धीरे’ क्या है? याद रखें, योजक चिन्ह (-) देखकर इसे द्वन्द्व समास या विशेषण मत मान लेना। क्रिया की ढंग बताने के कारण ये **रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय** होते हैं और समास में ये **अव्ययीभाव समास** बनते हैं।