प्रथम विश्व युद्ध की भूमिका तथा होमरूल लीग आंदोलन

आंदोलन का नाम: होमरूल लीग आंदोलन (1916)।
‘होमरूल’ शब्द की उत्पत्ति: यह मूलतः एक ‘आयरिश’ (आयरलैंड) शब्द है।
वैश्विक प्रणेता: विश्व स्तर पर (आयरलैंड में) होमरूल के प्रणेता ‘रेडमांड’ थे।
शाब्दिक अर्थ: ‘स्व-शासन’ (Self-Governance)।
भारत में उद्देश्य: ब्रिटिश शासन के अधीन रहते हुए स्व-शासन प्राप्त करना। भारत में इसकी शुरुआत एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक द्वारा की गई।

A. प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) और भारत की स्थिति

  • प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन का सीधा मुकाबला ऑटोमन साम्राज्य (तुर्की) से था।
  • तुर्की के सुल्तान को ‘खलीफा’ की पदवी प्राप्त थी, जिन्हें पूरी दुनिया में इस्लाम का सर्वोच्च धार्मिक गुरु माना जाता था।
  • कांग्रेस (INC) का रुख: कांग्रेस ने इस उम्मीद में युद्ध में ब्रिटेन का साथ दिया कि युद्ध समाप्त होने के बाद उन्हें ‘स्व-शासन’ प्राप्त होगा।
  • मुस्लिम लीग (ML) का रुख: मुस्लिम लीग ब्रिटेन द्वारा तुर्की पर हमला करने के सख्त खिलाफ थी और उसने इसका कड़ा विरोध किया।
  • तुर्की का परिणाम: 1920 में तुर्की के साथ ‘सेवर्स की संधि’ (Treaty of Sèvres) हुई। बाद में 1924 में मुस्तफा कमाल पाशा ने तुर्की को ‘सेक्युलर’ (Secular) घोषित कर दिया।
  • लखनऊ समझौता (1916): अंग्रेजों से धोखा खाने के बाद, मुस्लिम लीग ने 1915 में बॉम्बे में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इसके बाद 1916 के लखनऊ अधिवेशन में मुस्लिम लीग ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में कांग्रेस का साथ देने का ऐतिहासिक फैसला किया।

B. भारत में होमरूल लीग की शुरुआत (1916)

भारत में स्व-शासन की प्राप्ति के लिए होमरूल लीग की स्थापना की गई। इस आंदोलन की रूपरेखा मुख्य रूप से एनी बेसेंट द्वारा तैयार की गई थी:

  • एनी बेसेंट 1913 में इंग्लैंड गई थीं और 1914 में भारत वापस आईं।
  • 2 जनवरी 1914 को एनी बेसेंट ने अपनी पत्रिका ‘कॉमनवील’ (Commonweal) में होमरूल की पुरजोर वकालत की।
  • भारत में होमरूल लीग को दो भागों में बांटकर चलाया गया: 1. बाल गंगाधर तिलक का होमरूल लीग, 2. एनी बेसेंट का होमरूल लीग।
↔️ टेबल को दायें-बायें खिसकाएं
बाल गंगाधर तिलक का होमरूल लीग एनी बेसेंट का होमरूल लीग
शुरुआत: 28 अप्रैल 1916
स्थान: बेलगाम (कर्नाटक)
मुख्यालय: पूना
अध्यक्ष: जोसेफ बैप्टिस्टा
सचिव: एन.सी. केलकर
शाखाएँ: 6
सदस्य: 32,000+
प्रचार पत्रिका: मराठा (अंग्रेजी) और केसरी (मराठी)
शुरुआत: 3 सितम्बर 1916
मुख्यालय: अड्यार (मद्रास)
अध्यक्ष: स्वयं एनी बेसेंट
सचिव: जॉर्ज अरुंडेल
शाखाएँ: 200+
सदस्य: 27,000+
प्रचार पत्रिका: कॉमनवील और न्यू इंडिया
कार्यक्षेत्र: महाराष्ट्र (बॉम्बे क्षेत्र को छोड़कर), बरार, मध्य प्रांत और कर्नाटक। कार्यक्षेत्र: संपूर्ण भारत (तिलक के अधिकार क्षेत्र को छोड़कर)।
एनी बेसेंट के प्रमुख सहयोगी: मो. अली जिन्ना, मदन मोहन मालवीय, सुब्रमण्यम अय्यर, जवाहरलाल नेहरू, सी.आर. दास, और मोतीलाल नेहरू।

C. विदेशों में होमरूल लीग

  • लंदन में: वर्ष 1916 में स्थापित, इसके सचिव डी. पाल थे।
  • अमेरिका में: वर्ष 1915 में स्थापित, इसके अध्यक्ष लाला लाजपत राय थे।

D. परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य और कथन (VVI Points)

💡 अति-महत्वपूर्ण तथ्य

  • अखिल भारतीय होमरूल लीग: अखिल भारतीय होमरूल लीग के अध्यक्ष (1916) बी.पी. वाडिया थे।
  • बाल गंगाधर तिलक का नारा: “स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, मैं इसे लेकर रहूँगा।”
  • गोखले की संस्था पर रोक: बाल गंगाधर तिलक ने गोपाल कृष्ण गोखले की संस्था ‘Servants of India Society’ के सदस्यों को अपनी होमरूल लीग में शामिल होने की अनुमति नहीं दी थी।
  • भारतीय अशांति का जनक: अंग्रेज लेखक वैलेंटाइन शिरोल ने बाल गंगाधर तिलक को “भारतीय अशांति का जनक” कहा था।
  • एनी बेसेंट का प्रसिद्ध कथन: “भारत अब अनुग्रहों के लिए अपने घुटने पर नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए पैरों पर खड़ा है।”