व्युत्पत्ति: ‘भाषा’ शब्द संस्कृत की ‘भाष्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है— ‘बोलना’ या ‘कहना’।
परिभाषा: विचारों और भावों की अभिव्यक्ति (Expression) के लिए समाज द्वारा स्वीकृत ध्वनियों के माध्यम को भाषा कहते हैं।
भाषा के तीन मुख्य रूप:
परिभाषा: विचारों और भावों की अभिव्यक्ति (Expression) के लिए समाज द्वारा स्वीकृत ध्वनियों के माध्यम को भाषा कहते हैं।
भाषा के तीन मुख्य रूप:
- मौखिक भाषा (Oral): जब बोलकर विचार प्रकट किए जाएं (यह भाषा का मूल और सबसे प्राचीन रूप है)।
- लिखित भाषा (Written): जब लिखकर विचार प्रकट किए जाएं (यह भाषा का स्थायी रूप है)।
- सांकेतिक भाषा (Sign): इशारों के माध्यम से विचारों का आदान-प्रदान (व्याकरण में इसका अध्ययन नहीं होता)।
A. भाषा के विविध रूप (Types of Language)
| भाषा का रूप | विशेषताएँ / परिभाषा |
|---|---|
| मातृभाषा (Mother Tongue) |
वह भाषा जो बालक सबसे पहले अपने परिवार या माता से सीखता है। |
| राजभाषा (Official Language) |
जिस भाषा में देश के सरकारी कार्यालयों (Government Offices) का कामकाज होता है। (नोट: हिंदी भारत की राजभाषा है, राष्ट्रभाषा नहीं)। |
| राष्ट्रभाषा (National Language) |
देश के बहुसंख्यक लोगों (Maximum Population) द्वारा बोली और समझी जाने वाली भाषा, जो पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधती है। |
| संपर्क भाषा (Lingua Franca) |
वह भाषा जो दो अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोगों के बीच संपर्क का माध्यम बनती है। (जैसे भारत में हिंदी और अंग्रेजी)। |
B. हिंदी भाषा का विकास-क्रम (Evolution of Hindi)
संस्कृत ➔ पालि ➔ प्राकृत ➔ अपभ्रंश ➔ अवहट्ठ ➔ प्राचीन/प्रारंभिक हिंदी
- संस्कृत: हिंदी की आदि जननी (Mother of Hindi)।
- पालि (प्रथम प्राकृत): भारत की प्रथम देशभाषा। भगवान बुद्ध के सारे उपदेश इसी भाषा में हैं।
- प्राकृत (द्वितीय प्राकृत): भगवान महावीर (जैन धर्म) के उपदेश इसी भाषा में हैं।
- अपभ्रंश: इसका अर्थ है ‘पतन’ या ‘बिगड़ा हुआ रूप’। इसी अपभ्रंश (मुख्यतः शौरसेनी अपभ्रंश) से आधुनिक हिंदी का जन्म हुआ।
C. संविधान में हिंदी की स्थिति (Polity Angle – VVI)
- तिथि: 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारत संघ की राजभाषा (Official Language) के रूप में स्वीकार किया गया। इसीलिए 14 सितंबर को ‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ मनाया जाता है। (विश्व हिंदी दिवस: 10 जनवरी)।
- भाग और अनुसूची: भारतीय संविधान के भाग 17 और अनुसूची 8 (जिसमें 22 भाषाएँ हैं) में राजभाषा का उल्लेख है।
- अनुच्छेद 343 (1): संघ की राजभाषा ‘हिंदी’ और लिपि ‘देवनागरी’ होगी।
- अनुच्छेद 344: राजभाषा आयोग का गठन। (प्रथम राजभाषा आयोग 1955 में ‘बी. जी. खेर’ की अध्यक्षता में बना था)।
- अनुच्छेद 351: संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का विकास और प्रसार करे।
D. लिपि एवं देवनागरी लिपि (Script)
लिपि की परिभाषा: भाषा को लिखित रूप में व्यक्त करने के लिए जिन प्रतीक चिन्हो / ध्वनि-चिन्हों का प्रयोग किया जाता है, उसे लिपि कहते हैं।
देवनागरी लिपि का उद्भव (Origin)
भारत की सभी प्राचीन लिपियों का विकास ‘ब्राह्मी लिपि’ से हुआ है। देवनागरी लिपि का विकास क्रम इस प्रकार है:
ब्राह्मी लिपि ➔ गुप्त लिपि ➔ कुटिल लिपि ➔ देवनागरी लिपि
देवनागरी लिपि की वैज्ञानिक विशेषताएँ
- यह लिपि बाएँ से दाएँ (Left to Right) लिखी जाती है। (जबकि खरोष्ठी/उर्दू दाएँ से बाएँ लिखी जाती है)।
- यह एक अक्षरात्मक लिपि (Syllabic Script) है। (जबकि रोमन/अंग्रेजी वर्णात्मक (Alphabetic) लिपि है)।
- इसमें प्रत्येक ध्वनि के लिए एक निश्चित और अलग प्रतीक चिन्ह है।
- जैसा बोला जाता है, बिल्कुल वैसा ही लिखा जाता है (मूक/Silent letters की समस्या नहीं है)।
- इसमें अक्षरों के ऊपर ‘शिरोरेखा’ (Top Line) लगाने का नियम है।
🌟 Special Fact
💡 देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली अन्य भाषाएँ:
अक्सर छात्र सोचते हैं कि देवनागरी केवल हिंदी की लिपि है, लेकिन परीक्षाओं में अन्य भाषाएँ भी पूछी जाती हैं। देवनागरी लिपि में मुख्य रूप से ये भाषाएँ लिखी जाती हैं:
- हिंदी, संस्कृत, मराठी, नेपाली, कोंकणी, बोडो और संथाली
(नोट: पंजाबी की लिपि ‘गुरुमुखी’ और उर्दू की लिपि ‘फारसी’ है।)