10. विजयनगर साम्राज्य (1336 – 1672)

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक के काल में 1336 ई. में हुई थी। यह साम्राज्य अपनी भव्य वास्तुकला और समृद्धि के लिए प्रसिद्ध था।

A. स्थापना एवं प्रमुख वंश

  • स्थापना: 1336 ई. में हरिहर एवं बुक्का ने की थी।
  • राजधानी: हम्पी (तुंगभद्रा नदी के किनारे)।
  • प्रमुख वंश: विजयनगर साम्राज्य पर मुख्य रूप से 4 वंशों ने शासन किया:
    1. संगम वंश (1336–1485)
    2. सालुव वंश (1485–1505)
    3. तुलुव वंश (1505–1570)
    4. अरविदु वंश (1570–1672)

B. प्रमुख शासक एवं तथ्य

हरिहर एवं बुक्का

  • ये पांच भाई थे (संगम के पुत्र), जिन्होंने अपने गुरु विद्यारण्य के सहयोग से साम्राज्य की नींव रखी।
  • बुक्का प्रथम ने ‘वेदमार्ग प्रतिष्ठापक’ की उपाधि धारण की थी।

देवराय प्रथम (1406-1422)

  • इसने तुंगभद्रा नदी पर बांध बनवाया और जल प्रणाली में सुधार किया।
  • इसके दरबार में इतालवी यात्री ‘निकोलस कोंटी’ आया था।

देवराय द्वितीय (1422-1446)

  • इसे ‘इम्माडिदेवराय’ या ‘गजबेटेकर’ (हाथियों का शिकारी) कहा जाता था।
  • इसके दरबार में फारसी यात्री ‘अब्दुल रज्जाक’ आया था।
  • इसने अपनी सेना में मुस्लिमों को भर्ती किया और उन्हें जागीरें दीं।

C. कृष्णदेवराय (1509 – 1529)

  • यह तुलुव वंश का सबसे महान शासक था। बाबर ने अपनी आत्मकथा में इसे भारत का सबसे शक्तिशाली राजा बताया है।
  • इसके दरबार में ‘अष्टदिग्गज’ (8 महान तेलुगु कवि) रहते थे।
  • इसने ‘नागलपुर’ नामक नया शहर बसाया और ‘विट्ठल स्वामी’ एवं ‘हजारा मंदिर’ का निर्माण करवाया।
  • इसे ‘आंध्रभोज’, ‘अभिनव भोज’ और ‘आंध्र पितामह’ की उपाधियाँ प्राप्त थीं।
  • इसके दरबार में पुर्तगाली यात्री ‘डोमिंगो पायस’ और ‘बारबोसा’ आए थे।

D. तालीकोटा का युद्ध (1565)

  • इसे ‘राक्षसी-तंगड़ी’ का युद्ध भी कहा जाता है।
  • एक तरफ विजयनगर साम्राज्य था, तो दूसरी तरफ बहमनी राज्यों (अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुंडा और बीदर) का संघ था।
  • इस युद्ध में विजयनगर की हार हुई और हम्पी को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।