लोदी वंश: लोदी वंश दिल्ली सल्तनत का अंतिम राजवंश था। इस वंश में तीन प्रमुख राजाओं ने शासन किया:
1. बहलोल लोदी (1451 – 1489)
2. सिकंदर लोदी (1489 – 1517)
3. इब्राहिम लोदी (1517 – 1526)
A. लोदी वंश के शासक
1. बहलोल लोदी
इसने दिल्ली में प्रथम अफगान वंश की नींव रखी।
इसका वास्तविक नाम ‘वल्लू’ था और इसने ‘बहलोल शाह गाजी’ की उपाधि ली थी।
पूरे दिल्ली सल्तनत में इसका कार्यकाल सबसे लंबा (38 साल) रहा।
यह अपने सरदारों को ‘मसनद-ए-अली’ कहकर बुलाता था।
इसने जौनपुर के शासक हुसैन शाह शर्की को पराजित कर जौनपुर को दिल्ली में मिलाया।
इसने ‘बहलोल सिक्का’ (चांदी) चलवाया और इसके इतिहास की जानकारी ‘तारीख-ए-दाऊदी’ ग्रंथ से मिलती है।
इसका कथन था— “हम सब एक ही खुदा के बंदे हैं”।
2. सिकंदर लोदी
इसका वास्तविक नाम ‘निजाम खां’ था, जो बहलोल लोदी और उसकी माता जैबंद (सुनार जाति) का पुत्र था।
इसने दो बार अपना राज्याभिषेक करवाया और यह लोदी वंश का महानतम एवं प्रतापी राजा था।
1504 में आगरा शहर की स्थापना की और 1507 में उसे अपनी राजधानी बनाया (राजमहल ‘बादलगढ़’ बनवाया)।
इसने मुहर्रम पर ताजिया निकालने, मुस्लिम स्त्रियों के मस्जिद जाने और मुस्लिम संतों की मजारों पर जाने पर रोक लगा दी थी।
यह ‘गुलरूखी’ नाम से फारसी में कविताएं लिखता था।
इसने भूमि मापन के लिए ‘गज-ए-सिकंदरी’ पैमाना (30 इंच) चलाया और ‘रांडा’ नामक तांबे का सिक्का जारी किया।
इसके समकालीन ग्वालियर के राजा ‘मान सिंह’ थे।
1517 में गले की बीमारी के कारण इसकी मृत्यु हो गई।
3. इब्राहिम लोदी
यह दिल्ली सल्तनत का अंतिम राजा था।
इसने अपने भाई जलाल खान को जौनपुर का सूबेदार बनाया था।
यह ‘इब्राहिम शाह’ के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
1517 में इसने ग्वालियर के राजा विक्रमजीत के खिलाफ हमला किया और ग्वालियर को दिल्ली में विलय कर लिया।
1517 में ही मेवाड़ के राजा राणा सांगा के साथ ‘खतौली का युद्ध’ हुआ, जिसमें इब्राहिम लोदी की हार हुई। इस युद्ध में राणा सांगा का दायां हाथ, दाहिना पैर और दाहिनी आँख लोदी ने काट दिया था।