16. मराठा राज्य का उत्कर्ष
A. शिवाजी: प्रारंभिक जीवन एवं प्रमुख तथ्य
- शिवाजी के गुरु का नाम समर्थ रामदास था (इन्होंने ‘दास बोध’ की रचना की थी)।
- शिवाजी की प्रारंभिक कार्यस्थली ‘मावल प्रदेश’ थी। ‘मावली’ एक पहाड़ी लड़ाकू जाति थी।
- शिवाजी की राजधानी रायगढ़ थी।
- शिवाजी का ‘छत्रपति’ के रूप में औपचारिक राज्याभिषेक जून 1674 में रायगढ़ में हुआ था।
- वह अंतिम हिन्दू राजा जिसने ‘हिन्दू स्वराज’ स्थापित करने में सफलता पाई, वे छत्रपति शिवाजी थे।
- गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का पथ-प्रदर्शक शिवाजी को माना जाता है।
- शिवाजी ने अपनी सबसे मजबूत नौसेना का गठन कोलाबा में किया था।
- अंग्रेजों ने शिवाजी को तोपें प्रदान की थीं।
B. शिवाजी का प्रशासन: ‘अष्टप्रधान’
शिवाजी के राज्य प्रबंध में सहायता के लिए 8 मंत्रियों की एक परिषद थी जिसे अष्टप्रधान कहा जाता था。
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| पद का नाम | कार्य/विभाग |
|---|---|
| पेशवा | राजा का प्रधानमंत्री था। |
| अमात्य | वित्त मंत्री। |
| सुमंत या दबीर | विदेश मंत्री (विदेशी मामलों की देख-रेख)। |
| न्यायाधीश | न्याय विभाग का प्रधान। |
| सचिव या शुरूनीस | पत्राचार विभाग का प्रधान। |
| वाकिया नवीस या मंत्री | राजा के दैनिक कार्यों व दरबार की प्रतिदिन की कार्यवाही का विवरण रखना। |
| पंडित राव | धर्म व दान विभाग। |
| सेनापति या सर-ए-नौबत | सेना का प्रधान (सैनिकों की भर्ती, सेना का प्रबंध)। |
C. मराठा राजस्व व्यवस्था एवं शब्दावली
- चौथ: सुरक्षा के लिए पड़ोसी राज्यों पर शिवाजी द्वारा लगाया गया भू-कर (राजस्व का 1/4)। चौथ वसूलने वाले अधिकारी को कामविसदार कहते थे।
- सरंजामी प्रथा: यह मराठा भू-राजस्व व्यवस्था से सम्बंधित थी (मराठा जागीरदारों को निर्वहन के लिए दी जाने वाली भूमि)।
- पागा: घुड़सवार सेना का एक नियमित संगठन।
- मोडी लिपि: इसका प्रयोग मराठों के लेखों में किया जाता था।
- पतदाम: विधवा पुनर्विवाह पर लगाया गया कर।
- कुलकर्णी: मराठा काल में भूमि का लेखा-जोखा रखने वाला (लेखपाल)।
नोट: शिवाजी के निर्देश पर अन्नाजी दत्तो ने विस्तृत भू-सर्वेक्षण किया था। फौजदारी और दीवानी मुकदमों में न्याय मनुस्मृति के आधार पर किया जाता था।
D. मुगलों से संघर्ष एवं संधियां
- 1659 ई. में बीजापुर के सुल्तान ने अपने सेनानायक अफजल खाँ को शिवाजी को मारने भेजा था, लेकिन शिवाजी ने उसकी शक्ति को कुचल दिया।
- शिवाजी ने 1672 ई. में सलहार के युद्ध में मुगलों को हराया था।
- शिवाजी ने मुगलों को पुरंदर की संधि के द्वारा किलों को हस्तांतरित किया था।
- 1666 ई. में शिवाजी औरंगजेब के आगरा दरबार में उपस्थित हुए थे, जहाँ औरंगजेब ने उन्हें कैद कर लिया। शिवाजी आगरा की कैद से भागने में सफल रहे थे।
- औरंगजेब ने शिवाजी को ‘पहाड़ी चूहा’ और ‘साहसी डाकू’ की संज्ञा दी थी।
- मुगल-मराठा सम्बन्ध की जानकारी भीमसेन की पुस्तक ‘नुस्खा-ए-दिलकुशा’ से मिलती है।
E. शिवाजी के उत्तराधिकारी एवं पेशवाओं का शासन
- शिवाजी का अंतिम सैन्य अभियान ‘कर्नाटक अभियान’ था।
- शिवाजी के बाद उनके पुत्र शम्भाजी शासक बने, जिनकी हत्या औरंगजेब ने कर दी थी।
- शम्भाजी के बाद मराठा शासन को बालाजी विश्वनाथ ने सरल और कारगर बनाया (इन्हें मराठा राज्य का दूसरा संस्थापक कहा जाता है)।
- वर्ष 1700 ई. से आगे (औरंगजेब की मृत्यु के समय) मुगलों के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व मराठा संरक्षिका ताराबाई (मराठा साम्राज्य की सबसे बहादुर महिला) ने किया।
- बालाजी बाजीराव के समय से मराठा राजा नाचीज हो गया और पेशवा वास्तविक शासक बन गया।
- शिवाजी के बाद गुरिल्ला युद्ध का संचालन बाजीराव प्रथम ने किया। इन्होंने ही पुर्तगालियों से सालसेट एवं बेसिन के द्वीपों को छीना था।
- नाना फड़नवीस को मराठा पेशवाओं का ‘मैकियावेली’ कहा जाता है।
- ‘अंतिम महान पेशवा’ माधव राव को कहा जाता है।
⚔️ पानीपत का तृतीय युद्ध एवं आंग्ल-मराठा युद्ध
पानीपत का तीसरा युद्ध (14 जनवरी 1761)
- यह युद्ध मराठा (पेशवा बाजीराव II) और अफगान शासक अहमदशाह अब्दाली के बीच लड़ा गया, जिसमें अफ़गानों ने मराठों को हराया।
- अब्दाली के आक्रमण का तात्कालिक कारण मराठों द्वारा उसके वायसराय तैमूरशाह को लाहौर से निकालना था।
- इस युद्ध में मराठा सेना का नेतृत्व सदाशिवराव भाऊ (सिंधिया) ने किया था।
- इस लड़ाई को काशीराज पंडित नामक इतिहासकार ने स्वयं देखा था।
आंग्ल-मराठा युद्ध
- प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-82): माधवराव नारायण के समय हुआ, इसमें किसी भी पक्ष की जीत नहीं हुई।
- द्वितीय (1803-06) एवं तृतीय (1817-18) आंग्ल-मराठा युद्ध: यह पेशवा बाजीराव द्वितीय के समय हुए। बाजीराव द्वितीय मराठा साम्राज्य के अंतिम पेशवा थे।
- तृतीय युद्ध के दौरान हुई सबसे अंतिम संधि कानपुर की संधि थी।
- लार्ड वेलेजली की ‘सहायक संधि’ (Subsidiary Alliance) को स्वीकार करने वाला पहला मराठा सरदार पेशवा बाजीराव II ही था।