16. मराठा राज्य का उत्कर्ष

मराठा राज्य के संस्थापक: मराठा शक्ति के उत्कर्ष में शिवाजी का श्रेष्ठ नेतृत्व सबसे महत्वपूर्ण था। इनका जन्म 1627 ई. में शिवनेर के दुर्ग में हुआ था। शिवाजी के पिता का नाम ‘शाहजी भोंसले’ और माता का नाम ‘जीजाबाई’ था। शिवाजी सर्वाधिक अपनी माता जीजाबाई से प्रभावित थे।

A. शिवाजी: प्रारंभिक जीवन एवं प्रमुख तथ्य

  • शिवाजी के गुरु का नाम समर्थ रामदास था (इन्होंने ‘दास बोध’ की रचना की थी)।
  • शिवाजी की प्रारंभिक कार्यस्थली ‘मावल प्रदेश’ थी। ‘मावली’ एक पहाड़ी लड़ाकू जाति थी।
  • शिवाजी की राजधानी रायगढ़ थी।
  • शिवाजी का ‘छत्रपति’ के रूप में औपचारिक राज्याभिषेक जून 1674 में रायगढ़ में हुआ था।
  • वह अंतिम हिन्दू राजा जिसने ‘हिन्दू स्वराज’ स्थापित करने में सफलता पाई, वे छत्रपति शिवाजी थे।
  • गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का पथ-प्रदर्शक शिवाजी को माना जाता है।
  • शिवाजी ने अपनी सबसे मजबूत नौसेना का गठन कोलाबा में किया था।
  • अंग्रेजों ने शिवाजी को तोपें प्रदान की थीं।

B. शिवाजी का प्रशासन: ‘अष्टप्रधान’

शिवाजी के राज्य प्रबंध में सहायता के लिए 8 मंत्रियों की एक परिषद थी जिसे अष्टप्रधान कहा जाता था。

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पद का नामकार्य/विभाग
पेशवाराजा का प्रधानमंत्री था।
अमात्यवित्त मंत्री।
सुमंत या दबीरविदेश मंत्री (विदेशी मामलों की देख-रेख)।
न्यायाधीशन्याय विभाग का प्रधान।
सचिव या शुरूनीसपत्राचार विभाग का प्रधान।
वाकिया नवीस या मंत्रीराजा के दैनिक कार्यों व दरबार की प्रतिदिन की कार्यवाही का विवरण रखना।
पंडित रावधर्म व दान विभाग।
सेनापति या सर-ए-नौबतसेना का प्रधान (सैनिकों की भर्ती, सेना का प्रबंध)।

C. मराठा राजस्व व्यवस्था एवं शब्दावली

  • चौथ: सुरक्षा के लिए पड़ोसी राज्यों पर शिवाजी द्वारा लगाया गया भू-कर (राजस्व का 1/4)। चौथ वसूलने वाले अधिकारी को कामविसदार कहते थे।
  • सरंजामी प्रथा: यह मराठा भू-राजस्व व्यवस्था से सम्बंधित थी (मराठा जागीरदारों को निर्वहन के लिए दी जाने वाली भूमि)।
  • पागा: घुड़सवार सेना का एक नियमित संगठन।
  • मोडी लिपि: इसका प्रयोग मराठों के लेखों में किया जाता था।
  • पतदाम: विधवा पुनर्विवाह पर लगाया गया कर।
  • कुलकर्णी: मराठा काल में भूमि का लेखा-जोखा रखने वाला (लेखपाल)।

नोट: शिवाजी के निर्देश पर अन्नाजी दत्तो ने विस्तृत भू-सर्वेक्षण किया था। फौजदारी और दीवानी मुकदमों में न्याय मनुस्मृति के आधार पर किया जाता था।

D. मुगलों से संघर्ष एवं संधियां

  • 1659 ई. में बीजापुर के सुल्तान ने अपने सेनानायक अफजल खाँ को शिवाजी को मारने भेजा था, लेकिन शिवाजी ने उसकी शक्ति को कुचल दिया।
  • शिवाजी ने 1672 ई. में सलहार के युद्ध में मुगलों को हराया था।
  • शिवाजी ने मुगलों को पुरंदर की संधि के द्वारा किलों को हस्तांतरित किया था।
  • 1666 ई. में शिवाजी औरंगजेब के आगरा दरबार में उपस्थित हुए थे, जहाँ औरंगजेब ने उन्हें कैद कर लिया। शिवाजी आगरा की कैद से भागने में सफल रहे थे।
  • औरंगजेब ने शिवाजी को ‘पहाड़ी चूहा’ और ‘साहसी डाकू’ की संज्ञा दी थी।
  • मुगल-मराठा सम्बन्ध की जानकारी भीमसेन की पुस्तक ‘नुस्खा-ए-दिलकुशा’ से मिलती है।

E. शिवाजी के उत्तराधिकारी एवं पेशवाओं का शासन

  • शिवाजी का अंतिम सैन्य अभियान ‘कर्नाटक अभियान’ था।
  • शिवाजी के बाद उनके पुत्र शम्भाजी शासक बने, जिनकी हत्या औरंगजेब ने कर दी थी।
  • शम्भाजी के बाद मराठा शासन को बालाजी विश्वनाथ ने सरल और कारगर बनाया (इन्हें मराठा राज्य का दूसरा संस्थापक कहा जाता है)।
  • वर्ष 1700 ई. से आगे (औरंगजेब की मृत्यु के समय) मुगलों के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व मराठा संरक्षिका ताराबाई (मराठा साम्राज्य की सबसे बहादुर महिला) ने किया।
  • बालाजी बाजीराव के समय से मराठा राजा नाचीज हो गया और पेशवा वास्तविक शासक बन गया।
  • शिवाजी के बाद गुरिल्ला युद्ध का संचालन बाजीराव प्रथम ने किया। इन्होंने ही पुर्तगालियों से सालसेट एवं बेसिन के द्वीपों को छीना था।
  • नाना फड़नवीस को मराठा पेशवाओं का ‘मैकियावेली’ कहा जाता है।
  • ‘अंतिम महान पेशवा’ माधव राव को कहा जाता है।

⚔️ पानीपत का तृतीय युद्ध एवं आंग्ल-मराठा युद्ध

पानीपत का तीसरा युद्ध (14 जनवरी 1761)

  • यह युद्ध मराठा (पेशवा बाजीराव II) और अफगान शासक अहमदशाह अब्दाली के बीच लड़ा गया, जिसमें अफ़गानों ने मराठों को हराया।
  • अब्दाली के आक्रमण का तात्कालिक कारण मराठों द्वारा उसके वायसराय तैमूरशाह को लाहौर से निकालना था।
  • इस युद्ध में मराठा सेना का नेतृत्व सदाशिवराव भाऊ (सिंधिया) ने किया था।
  • इस लड़ाई को काशीराज पंडित नामक इतिहासकार ने स्वयं देखा था।

आंग्ल-मराठा युद्ध

  • प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-82): माधवराव नारायण के समय हुआ, इसमें किसी भी पक्ष की जीत नहीं हुई।
  • द्वितीय (1803-06) एवं तृतीय (1817-18) आंग्ल-मराठा युद्ध: यह पेशवा बाजीराव द्वितीय के समय हुए। बाजीराव द्वितीय मराठा साम्राज्य के अंतिम पेशवा थे।
  • तृतीय युद्ध के दौरान हुई सबसे अंतिम संधि कानपुर की संधि थी।
  • लार्ड वेलेजली की ‘सहायक संधि’ (Subsidiary Alliance) को स्वीकार करने वाला पहला मराठा सरदार पेशवा बाजीराव II ही था।