14. मुगल वंश: जहाँगीर (1605 – 1627)
A. प्रारंभिक जीवन एवं परिवार
- जन्म: 1569 ई. में फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की कुटिया में हुआ।
- माता-पिता: पिता अकबर और माता ‘मरियम उजमानी’ थीं।
- बचपन का नाम: सलीम।
- गुरु: अब्दुल रहीम खानखाना।
- भाई: मुराद, दानियाल, हुसैन और हसन।
- पुत्र (5): खुसरो मिर्जा, परवेज, जहांदार, शहरयार और खुर्रम (शाहजहाँ)।
- दरबारी: सेनापति ‘महाबत खान’ और प्रधानमंत्री ‘आसफ खां’ थे।
B. प्रमुख विद्रोह एवं सैन्य अभियान
- खुसरो का विद्रोह: 1606 में जहाँगीर के बड़े पुत्र खुसरो मिर्जा ने पिता के खिलाफ विद्रोह कर दिया। पिता-पुत्र के मध्य पंजाब के भैरावल नामक स्थान पर युद्ध हुआ। जहाँगीर ने खुसरो को पकड़कर उसकी दोनों आँखें फोड़ दीं।
- गुरु अर्जुन देव: खुसरो के गुरु अर्जुन देव थे, जिस कारण जहाँगीर ने सिखों के पाँचवें गुरु अर्जुन देव को फांसी पर लटका दिया।
- मेवाड़ अभियान: 1615 में जहाँगीर ने खुर्रम को मेवाड़ पर आक्रमण के लिए भेजा। उस समय मेवाड़ के राजा अमर सिंह (महाराणा प्रताप के पुत्र) थे। युद्ध में मेवाड़ की हार हुई और मुगलों ने मेवाड़ के साथ संधि कर ली।
- दक्षिण भारत विजय: 1616 में जहाँगीर ने गोलकुंडा (आंध्रप्रदेश) तथा बीजापुर (कर्नाटक) क्षेत्र को जीतकर मुगल साम्राज्य में विलय किया।
- कांगड़ा विजय: 1619 में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र को जीतकर मुगल साम्राज्य में मिलाया (कांगड़ा चित्रकला शैली का निर्माण जहाँगीर ने किया)।
- अहमदनगर अभियान: 1617 में खुर्रम को अहमदनगर (महाराष्ट्र) पर हमले के लिए भेजा गया। वहाँ का वजीर मलिक अम्बर था, जिसने आत्मसमर्पण कर दिया। अभियान से प्रसन्न होकर जहाँगीर ने खुर्रम का नाम बदलकर शाहजहाँ रख दिया। मलिक अम्बर को भारत में पहली बार ‘गोरिल्ला युद्ध पद्धति (छापामार युद्ध)’ का संस्थापक माना जाता है।
- कंधार का पतन: 1622 में जहाँगीर ने शाहजहाँ को गंधार (अफगानिस्तान) अभियान के लिए भेजा लेकिन शाहजहाँ ने मना कर दिया। इसी का फायदा उठाकर गंधार पर ईरानी शासक ‘शाह अब्बास’ ने कब्ज़ा कर लिया।
C. नूरजहाँ का जीवन एवं प्रभाव
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| जन्म | 1577 ई. में ईरान में | वास्तविक नाम | मेहरुन्निसा |
| पिता | मिर्जा ग्यास बेग | माता | अस्मत बेगम |
| पहला पति | अलीकुली बेग (पुत्री- लाडली बेगम) | ||
- जहाँगीर ने अलीकुली बेग की हत्या कर उसे ‘शेर अफगान’ की उपाधि दी थी।
- 1609 में जहाँगीर ने मेहरुन्निसा को ‘नवरोज त्यौहार’ के अवसर पर पहली बार देखा और 1611 में उससे निकाह कर लिया।
- निकाह के पश्चात् जहाँगीर ने उसे दो उपाधियाँ दीं: नूरजहाँ और नूरमहल। अन्य नाम ‘पदमहिसि’ और ‘बादशाह बेगम’ भी था।
- नूरजहाँ के सम्मान में जहाँगीर ने चाँदी का सिक्का जारी किया।
- नूरजहाँ की माता ‘अस्मत बेगम’ ने पहली बार भारत में गुलाब से इत्र निकालने की विधि खोजी थी।
- जहाँगीर ने मिर्जा ग्यास बेग को ‘एतमाद-उद-दौला’ की उपाधि दी थी।
D. जहाँगीर के दरबार में आए विदेशी यात्री
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| यात्री का नाम | देश | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| कैप्टन हॉकिन्स | इंग्लैंड | 1608 में हेक्टर जहाज से सूरत आया। जहाँगीर ने इसे 400 का मनसब और इंग्लिश खान/फिरंगी खान की उपाधि दी। |
| सर थॉमस रो | इंग्लैंड | 1615 में जेम्स प्रथम का राजदूत बनकर आया। अजमेर में मुलाकात की। |
| पियत्रो डेला वेले | इटली | 1623 में भारत आया। |
| फ्रांसिस्को पेलसर्ट | इंग्लैंड | 1612 में भारत आया। |
| अन्य यात्री | विभिन्न | जॉन जार्डन (पुर्तगाल), निकोलस डागटन, निकोलस विदरींगटन, थॉमस कोरियट, एडवर्ड टैरी (इंग्लैंड)। |
💡 कला, वास्तुकला एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य (VVI)
चित्रकला का स्वर्ण युग
- जहाँगीर के शासनकाल को ‘चित्रकला का स्वर्ण युग’ कहा जाता है।
- प्रमुख चित्रकार: आगा रजा, अबुल हसन, मुहम्मद नासिर, फारुख बेग, दौलत बेग, मनोहर, गोवर्धन विसनदास, उस्ताद मंसूर।
- ‘उस्ताद मंसूर’ पक्षियों का प्रसिद्ध चित्रकार था, जिसे जहाँगीर ने ‘नादिर-उल-अस्र’ की उपाधि दी थी।
वास्तुकला एवं मकबरे
- न्याय की जंजीर: जहाँगीर को न्याय की जंजीर के लिए याद किया जाता है। यह सोने की जंजीर थी जो आगरा में शाहबुर्ज नामक स्थान पर लगाई गई थी।
- एतमाद-उद-दौला का मकबरा: 1627 में नूरजहाँ ने बनवाया। यह पूर्णतः सफेद संगमरमर से निर्मित भारत का पहला मकबरा था। इस मकबरे में पहली बार ‘पित्रा ड्यूरा’ (जड़ाऊ कलाकारी, इटली) का प्रयोग किया गया।
- मथुरा में वीर सिंह बुंदेला ने जहाँगीर के आदेश पर ‘केशव राय मंदिर’ बनवाया।
प्रशासन, धर्म एवं अन्य तथ्य
- जहाँगीर की आत्मकथा ‘तुजुक-ए-जहाँगीरी’ फारसी भाषा में है। इसने 12 अध्यादेश जारी किए थे जिन्हें ‘आईन-ए-जहाँगीरी’ कहा गया।
- इसने अपने शासनकाल में तंबाकू और गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाया था।
- 1612 में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने वाला यह पहला मुगल राजा था। इसने हर दिवाली पर जुआ खेलने की प्रथा भी शुरू की थी।
- 1617 में भारत के सभी जैन मंदिरों को तुड़वाया, लेकिन 1621 में हरिद्वार के प्रसिद्ध जैन गुरु भद्रबाहु से माफ़ी मांगी और संपत्ति उपहार में दी।
- पुर्तगाली ईसाई पादरी ‘सेंट जेवियर’ भारत आये थे।
- इसने अपनी आत्मकथा में लिखा: “मैं एक बोतल शराब और दो बोटी गोश्त के लिए सम्पूर्ण हिंदुस्तान को खो दिया।”
E. बंदी एवं मृत्यु
- 1626 में सेनापति महाबत खान ने झेलम नदी के किनारे जहाँगीर और नूरजहाँ को बंदी बना लिया था।
- 1627 में जहाँगीर की मृत्यु हो गई।
- इनका मकबरा नूरजहाँ ने बनवाया, जिसे लाहौर के शाहदरा में रावी नदी के तट पर दफनाया गया।